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Update: फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

Rajasthan High Court Dismisses Plea to Quash FIR Against Filmmaker Vikram Bhatt in ₹30 Crore Fraud Case

नई दिल्ली। 44 करोड़ की कथित धोखाधड़ी मामले में श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस

नई दिल्ली, शुक्रवार। कथित 44 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को बड़ी राहत देते हुए अंतरिम जमानत दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही मामले में राजस्थान पुलिस, शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।.

हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली दंपत्ति की याचिका पर नोटिस जारी कर सभी पक्षों से जवाब मांगा गया है।

श्वेतांबरी भट्ट को उदयपुर केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में रखा गया था, जहां से अब उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई अगली तिथि पर की जाएगी, लेकिन प्रथम दृष्टया परिस्थितियों को देखते हुए श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम राहत दी जाना उचित है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार तथा शिकायतकर्ता पक्ष को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने रखा पक्ष

याचिकाकर्ता दंपत्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि राजस्थान पुलिस मुंबई जाकर दंपत्ति को उनके निवास स्थान से गिरफ्तार कर लाई थी और यह विवाद मूल रूप से एक फिल्म परियोजना से जुड़ा व्यावसायिक विवाद है, जिसे आपराधिक मामला बना दिया गया।

अधिवक्ता ने इस स्तर पर कम से कम श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने सहमति जताते हुए अंतरिम जमानत प्रदान कर दी।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता अजय मुर्दिया की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला लगभग ₹44 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से संबंधित है और इसमें गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप शामिल हैं, इसलिए राहत देने से पहले सभी तथ्यों का परीक्षण आवश्यक है।

सरकार ने किया विरोध

राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा तथा सौरभ राजपाल ने भी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि राज्य को विस्तृत प्रत्युत्तर दाखिल करने का अवसर दिया जाए और स्थायी जमानत फिलहाल न दी जाए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह देखना आवश्यक है कि कहीं आपराधिक कार्यवाही का उपयोग केवल धन-वसूली के साधन के रूप में तो नहीं किया जा रहा है।

अदालत ने यह प्रश्न भी उठाया कि विवाद का क्षेत्राधिकार किस आधार पर चुना गया और क्या मामला मूल रूप से सिविल विवाद का रूप ले सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता अजय मुर्दिया को भी कार्यवाही में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश दिया है

उदयपुर में दर्ज हुआ था मामला

यह पूरा मामला उदयपुर के भूपालपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म निर्माता विक्रम प्रवीण भट्ट, उनके परिजन, व्यावसायिक साझेदार तथा फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के कुछ पदाधिकारियों ने फिल्म निर्माण और निवेश से संबंधित परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की।

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि निवेशकों से धन लेने के बाद पारदर्शिता नहीं बरती गई और परियोजनाओं के संबंध में तय शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिससे भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

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