जोधपुर। राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में बम से उड़ाने की धमकी मिली। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत परिसर खाली कराकर तलाशी अभियान शुरू किया, जिसके चलते अदालतों का कामकाज अस्थायी रूप से प्रभावित रहा और कार्यवाही 11:30 बजे से शुरू की गई।
इसी बीच कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा अचानक हैरिटेज बिल्डिंग परिसर पहुंचे और अधीनस्थ न्यायालयों का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कई कोर्ट रूम खाली मिले तथा कुछ न्यायिक अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
जिला जज सहित 8 अधिकारी एपीओं
रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश में 8 न्यायिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से “Awaiting Posting Order (APO)” पर भेज दिया गया। इनमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो विशेष अदालत के न्यायाधीश तथा अतिरिक्त जिला एवं वरिष्ठ सिविल जज स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए जिला न्यायाधीश और वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश स्तर के 8 न्यायिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से “Awaiting Posting Order (APO)” पर भेज दिया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश ने न्यायिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू कर दी है और इसे जोधपुर न्यायिक व्यवस्था का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है।
रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार अनुसार, जोधपुर महानगर एवं जिला न्यायालयों में कार्यरत कई महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों को फिलहाल उनके वर्तमान पदों से हटाकर मुख्यालय या जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय में पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में रखा गया है।

ये अधिकारी शामिल
प्रशासनिक दृष्टि से इसे नियमित प्रक्रिया बताया गया है, लेकिन एक साथ इतने अधिकारियों के एपीओ होने से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश में जिन अधिकारियों को एपीओ किया गया है, उनमें
जोधपुर महानगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यालय पर एपीओ रखा गया है।
इसी तरह मनीषा चौधरी, जो पोक्सो एक्ट मामलों की विशेष अदालत की न्यायाधीश थीं, को जिला एवं सत्र न्यायाधीश जोधपुर जिला मुख्यालय पर एपीओ किया गया है।
इसके अलावा मनीषा शर्मा (एडीजे नं. 2, जोधपुर महानगर), नेहा शर्मा (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जोधपुर जिला), करुणा शर्मा (सीनियर सिविल जज एवं सीजेएम, जोधपुर), प्रवीण चौधरी (अतिरिक्त सीनियर सिविल जज-कम-एसीजेएम नं. 2), सीमा संधु (अतिरिक्त सीनियर सिविल जज-कम-एसीजेएम नं. 9) तथा मनोज जिंगर (अतिरिक्त सीनियर सिविल जज-कम-एसीजेएम नं. 7) को भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश जोधपुर जिला मुख्यालय पर एपीओ रखा गया है।
न्यायिक सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर समय-समय पर इस प्रकार के आदेश जारी किए जाते हैं, जिससे अदालतों में पदस्थापन संतुलन बनाए रखा जा सके।
हालांकि एक साथ कई महत्वपूर्ण अदालतों के अधिकारियों के एपीओ होने से न्यायिक कार्यप्रणाली पर अस्थायी प्रभाव पड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
इससे पूर्व भी राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारियों को भी एक साथ एपीओं किया गया था.