जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड (REIL) के प्रबंध निदेशक (एमडी) पद पर की गई नियुक्ति को रद्द कर दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि प्रबंध निदेशक (एमडी) पद पर की गई नियुक्ति में चयन प्रक्रिया में निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया और राज्य सरकार के प्रतिनिधित्व से संबंधित नियमों की अनदेखी की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं थी और संयुक्त उपक्रम कंपनी होने के बावजूद राज्य सरकार के मुख्य सचिव को चयन समिति में शामिल नहीं किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को आदेश दिया कि चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए और उसमें राज्य के मुख्य सचिव को चयन पैनल में शामिल किया जाए।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. पुरुषोत्तम नारायण शर्मा द्वारा दायर याचिका पर दिया हैं.
याचिका में दलील
डॉ पुरूषोतम शर्मा की ओर से दायर याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने दलील देते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप नहीं थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) कंपनी होने के बावजूद राज्य सरकार के मुख्य सचिव को चयन समिति में शामिल नहीं किया गया, जबकि संबंधित दिशानिर्देश ऐसा करना अनिवार्य बताते हैं।
ये हैं मामला
केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड (PESB) ने 1 फरवरी 2024 को REIL के प्रबंध निदेशक पद के लिए विज्ञापन जारी किया था।
चयन प्रक्रिया के तहत 24 जुलाई 2024 को इंटरव्यू आयोजित किए गए और अंततः एक उम्मीदवार की नियुक्ति की सिफारिश की गई, जिसे 28 मार्च 2025 को औपचारिक रूप से नियुक्त कर दिया गया।
याचिकाकर्ता, जो स्वयं इस चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे, ने आरोप लगाया कि चयन समिति का गठन निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं किया गया और राज्य सरकार की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई।
संयुक्त उपक्रम
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि REIL केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व चयन प्रक्रिया में होना आवश्यक था। रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि चयन प्रक्रिया के दौरान मुख्य सचिव को आमंत्रित करने या राज्य सरकार को औपचारिक रूप से शामिल करने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया।
योग्यता पर संदेह
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया से संबंधित कई आवश्यक दस्तावेज और मूल्यांकन मानदंड रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किए गए।
इससे यह संदेह पैदा हुआ कि उम्मीदवारों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों—जैसे योग्यता, नेतृत्व क्षमता, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड—के आधार पर उचित तरीके से किया गया या नहीं।
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों में उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ऐसे पदों का सीधा संबंध सार्वजनिक हित से होता है।
जयपुर में कार्यालय—सुनवाई का अधिकार
केन्द्र की ओर से मामले में कहा गया कि प्रबंध निदेशक की चयन प्रक्रिया दिल्ली में हुई हैं इसलिए अदालत का यह क्षेत्राधिकार नहीं हैं.
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि चयन प्रक्रिया दिल्ली में हुई, यह नहीं कहा जा सकता कि राजस्थान हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि कंपनी का पंजीकृत कार्यालय जयपुर में है और नियुक्त व्यक्ति को अपने दायित्व राजस्थान में निभाने हैं, इसलिए इस मामले में राजस्थान में कारण-कार्रवाई (Cause of Action) उत्पन्न होती है और अदालत को क्षेत्राधिकार प्राप्त है।
हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं थी, इसलिए नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता।