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राजस्थान हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की 9वीं धमकी, न ई-मेल भेजने वाले का पता न अब तक ठोस सिस्टम बना

Rajasthan High Court Receives 9th Bomb Threat in Five Months, No Trace of Email Sender Yet

पिछले पांच माह में लगातार धमकियां, सुरक्षा व्यवस्था और जांच तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।

पिछले पांच महीनों में यह 9वीं बार है जब हाईकोर्ट को इस तरह की धमकी दी गई है।

लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद अब तक न तो ई-मेल भेजने वाले का पता चल पाया है और न ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई प्रभावी तंत्र विकसित हो सका है।

हाईकोर्ट परिसर खाली कराया गया

गुरूवार सुबह मिली ताजा धमकी के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी। एहतियातन पूरे कोर्ट परिसर को खाली करा लिया गया।

कोर्ट शुरू होने से पहले ही मिली धमकी के चलते फिलहाल कोर्ट में ज्यादा लोग नहीं पहुंचे थे.

प्रशासन ने सुबह 11 बजे कोर्ट की कार्यवाही पुन: शुरू करने की बात कही हैं.

अक्टूबर 2025 से जारी है सिलसिला

जयपुर बेंच को पहली धमकी अक्टूबर 2025 में मिली थी। इसके बाद नवंबर और दिसंबर 2025 में कई बार धमकी भरे ई-मेल भेजे गए। वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला जारी है। अब तक कुल 9 बार हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है।

हर बार धमकी मिलने पर कोर्ट परिसर को खाली कराना पड़ता है, जिससे न्यायिक कार्य घंटों तक बाधित रहता है। अनुमान है कि इन घटनाओं के कारण अब तक 20 हजार से अधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो चुकी है। दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ई-मेल भेजने वाले का अब तक सुराग नहीं

सबसे गंभीर पहलू यह है कि लगातार धमकियों के बावजूद ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति या गिरोह की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। साइबर सेल और अन्य जांच एजेंसियां ई-मेल के आईपी एड्रेस और सर्वर की जांच कर रही हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन के सदस्यों ने सवाल उठाया है कि जब हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील संस्थान को बार-बार धमकी मिल रही है, तो अब तक कोई स्थायी सुरक्षा प्रणाली क्यों नहीं विकसित की गई। उनका कहना है कि केवल तलाशी अभियान चलाना समाधान नहीं है; तकनीकी निगरानी और साइबर ट्रैकिंग को और मजबूत किया जाना चाहिए।

न्यायिक प्रक्रिया पर असर

लगातार मिल रही धमकियों से न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई टल रही है, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया है कि केंद्र और राज्य स्तर की एजेंसियों को मिलकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करना चाहिए, ताकि इस मामले की गहन और त्वरित जांच हो सके।

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