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ट्रांसफर मामलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन प्राधिकरण/विभागों को नीति के अनुरूप “व्यावहारिक दृष्टिकोण” अपनाना चाहिए- राजस्थान हाईकोर्ट

Retirement Near, Yet Transferred to Srinagar: Rajasthan High Court Declines to Interfere in AAI Officer’s Transfer Order

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक वरिष्ठ अधिकारी के तबादले से जुड़े मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रांसफर मामलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन प्राधिकरण/विभागों को नीति के अनुरूप “व्यावहारिक दृष्टिकोण” अपनाना चाहिए.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के ट्रांसफर आदेश में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करने से इनकार किया, लेकिन अपीलकर्ता को अपने अथॉरिटी के समक्ष नया प्रतिवेदन देने और अथॉरिटी को उसे समयबद्ध ढंग से निस्तारित करने का आदेश दिया हैं.

यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला जयपुर एयरपोर्ट के अधिकारी कैलाशचन्द्र शर्मा की याचिका पर दिया हैं.

क्या हैं मामला

कैलाश चंद्र शर्मा, जो वर्तमान में जयपुर एयरपोर्ट पर मैनेजर (ह्यूमन रिसोर्सेज) (ग्रुप-A) के पद पर कार्यरत थे, को प्रशासनिक कारण बताते हुए श्रीनगर स्थानांतरित कर दिया गया।
अपील में कहा गया कि उनकी सेवानिवृत्ति में केवल 18 माह शेष हैं और ट्रांसफर नीति के अनुसार जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचा हो, उन्हें स्थानांतरण से छूट दी जाती है।

अपीलकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि उनके 86 वर्षीय पिता गंभीर रूप से बीमार थे और अपील लंबित रहने के दौरान उनका निधन हो गया।

ऐसे में दूरस्थ एवं “हार्ड स्टेशन” माने जाने वाले श्रीनगर में पोस्टिंग देना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

अधिवक्ता ने यह भी बताया कि एएआई के अन्य हवाई अड्डों—प्रयागराज, अमृतसर, जम्मू और सूरत—में भी मैनेजर (HR) के पद उपलब्ध हैं, जहां समायोजन संभव है।

अपील में दलील

अपीलकर्ता अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि एएआई की ट्रांसफर पॉलिसी में स्पष्ट प्रावधान है कि तीन वर्ष से कम सेवा शेष रहने पर तबादला नहीं किया जाएगा।

श्रीनगर एक दूरस्थ एवं कठिन स्टेशन है और मानवीय आधार पर भी स्थानांतरण अनुचित है।

AAI की ओर से जवाब

सुनवाई के दौरान AAI की ओर से अतिरिक्त हलफनामे में कहा गया कि जयपुर एयरपोर्ट को PPP मोड पर सौंपे जाने के कारण कुछ पद सरप्लस हो गए हैं।

विभाग ने कहा कि श्रीनगर एयरपोर्ट पर मैनेजर (HR) का पद रिक्त था और प्रशासनिक आवश्यकता के चलते ट्रांसफर आदेश पारित किया गया।

हाईकोर्ट का आदेश

दोनो पक्षों की दलीले सुनने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि सामान्यतः ट्रांसफर मामलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, क्योंकि यह प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है।

कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर आदेश प्रशासनिक आवश्यकताओं के तहत पारित किए जाते हैं और जयपुर एयरपोर्ट के PPP मॉडल में जाने के कारण पदों की पुनर्संरचना हुई।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि प्राधिकरण को अपनी ट्रांसफर पॉलिसी के अनुरूप “व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण” अपनाना चाहिए।

कोर्ट का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता को 7 दिनों के भीतर नया प्राधिकरण के समक्ष प्रतिनिधित्व (representation) प्रस्तुत करने की अनुमति देते हुए AAI को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर उस पर फैसला ले.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर आदेश में अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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