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27 साल की किरायेदारी पर हाईकोर्ट का सख्त फैसला: “मकान मालिक की असली जरूरत के आगे लंबा कब्जा बेअसर”

Rajasthan High Court Rules: 27-Year Tenancy Cannot Override Landlord’s Bona Fide Business Need
इन्द्रा बाजार की दुकान खाली करने का आदेश बहाल, कोर्ट ने कहा-किरायेदार तय नहीं करेगा कि मालिक अपना व्यवसाय कहां से चलाए; अपीलीय अधिकरण का आदेश रद्द, 6 महीने में सौंपना होगा कब्जा।

जयपुर, 21 फरवरी। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने जयपुर के बेहद व्यावसायिक क्षेत्र इन्द्रा बाजार में एक दुकान पर 27 वर्षों से चली आ रही किरायेदारी से जुड़े एक मामले में दुकान मालिक के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल लंबी अवधि के आधार पर किरायेदार मकान मालिक के वैध अधिकारों को रोक नहीं सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि मकान मालिक अपनी ही संपत्ति में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता है और उसकी आवश्यकता वास्तविक (बोनाफाइड) है, तो किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि वह अपना व्यवसाय कहां से संचालित करे।

कोर्ट ने कहा, “मकान मालिक अपनी आवश्यकता का सर्वश्रेष्ठ निर्णायक है, किरायेदार नहीं बता सकता कि व्यवसाय कहां से चलेगा।”

जस्टिस बिपिन गुप्ता ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया।

मामला क्या था?

याचिकाकर्ता राशीद अहमद कुरैशी के पिता दिवंगत शफी मोहम्मद की एक दुकान जयपुर के इन्द्रा बाजार क्षेत्र में स्थित है, जो शहर का एक प्रमुख व्यावसायिक इलाका माना जाता है।

वर्ष 1997 में राशीद अहमद के पिता ने यह दुकान अनिल धामेला और अजय धामेला को 600 रुपये प्रतिमाह के किराये पर दी थी।

वर्ष 2001 में याचिकाकर्ता राशीद अहमद के पिता शफी मोहम्मद एवं उनकी पत्नी शकूरा बेगम के निधन के बाद राशीद अहमद ने किरायेदारों से किराया भुगतान की मांग की, लेकिन किरायेदारों ने किराया देने से इंकार कर दिया।

जिसके बाद 20 मार्च 2014 को एक लीगल नोटिस जारी कर बकाया किराया जमा कराने को कहा। जिस पर नोटिस के अनुसार किरायेदारों ने किराये की बकाया राशि जमा कर दी।

याचिकाकर्ता खुद भी किराये पर

याचिकाकर्ता ने किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 की धारा 9 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत करते हुए अपनी दुकान खाली करने की मांग की।

याचिकाकर्ता ने आवेदन में अपने पक्ष में दलील दी कि वह 01 नवंबर 2001 से रायसर प्लाजा स्थित किराये की दुकान से “फोटो कलर लैब” का व्यवसाय कर रहा है।

मकान मालिक वर्ष 2001 से “फोटो कलर लैब” का व्यवसाय अपनी स्वयं की दुकान में नहीं बल्कि किराये की दुकान से संचालित कर रहा है।

आगे कहा गया कि 7 मई 2013 से उसने इन्द्रा बाजार, जयपुर स्थित एक अन्य दुकान भी किराये पर ली है, जहां वह एलबम बनाने का कार्य करता है।

यह विशेष रूप से कहा गया कि ये दोनों स्थान किराये के हैं और याचिकाकर्ता के स्वामित्व में नहीं हैं।

मकान मालिक की दलीलें

मकान मालिक की ओर से अधिवक्ता Naqvi Sehan, Najib Sabiha, Sahil Khan, Rabiya Mateen और Garima Gothwal ने दलील देते हुए कहा कि जिस दुकान में वह वर्तमान में व्यवसाय कर रहा है, उसका किराया पहले 9,000 रुपये प्रतिमाह था, जो बाद में बढ़कर 19,215 रुपये प्रतिमाह हो गया। यह बढ़ता किराया उसके लिए आर्थिक रूप से बोझिल होता जा रहा था।

मकान मालिक की ओर से दावा किया गया कि उसकी वास्तविक आवश्यकता है कि वह अपनी ही दुकान में अपना व्यवसाय स्थापित करे, ताकि वह आर्थिक रूप से स्थिर रह सके और किराये के दबाव से मुक्त हो सके।

याचिकाकर्ता दुकान मालिक की ओर से कहा गया कि वह विवादित दुकान का स्वामी है और उसे अपनी वास्तविक एवं bona fide आवश्यकता के तहत प्रतिवादियों की बेदखली आवश्यक है, ताकि वह वहां अपना फोटो कलर लैब व्यवसाय संचालित कर सके।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि विवादित दुकान इन्द्रा बाजार के मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित है, जहां कई फोटो कलर लैब पहले से संचालित हैं। यह स्थान व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त है और यहां से व्यवसाय करने पर उसकी आय में वृद्धि होगी।

अधिवक्ताओं ने मुख्य दलील दी कि याचिकाकर्ता अपनी ही संपत्ति में व्यवसाय करना चाहता है और वर्तमान में किराये की दुकान से काम कर रहा है।

यह भी कि याचिकाकर्ता के पास कोई वैकल्पिक व्यावसायिक संपत्ति उपलब्ध नहीं है और विवादित दुकान व्यावसायिक दृष्टि से उपयुक्त स्थान पर स्थित है।

किरायेदारों का पक्ष और दलील

किरायेदारों की ओर से दुकान मालिक की दलीलों का विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता स्वेच्छा से रायसर प्लाजा में किराये की दुकान लेकर व्यवसाय कर रहा है, क्योंकि वह स्थान अधिक व्यावसायिक एवं विस्तृत है तथा फोटो कलर लैब संचालन के लिए अधिक उपयुक्त है।

किरायेदारों ने यह भी कहा कि विवादित दुकान का आकार लगभग 8.5 फीट × 14 फीट है, जो ऐसे व्यवसाय के लिए पर्याप्त नहीं है।

किरायेदारों ने बेदखली आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता (मकान मालिक) की तथाकथित “बोनाफाइड आवश्यकता” वास्तविक नहीं है।

किरायेदारों ने दलील दी कि मकान मालिक द्वारा दुकान खाली कराने का बताया गया कारण बनावटी (Pretextual) है और बेदखली का उद्देश्य केवल किराया बढ़वाना या आर्थिक दबाव बनाना है।

किरायेदारों ने यह भी कहा कि दुकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

क्योंकि वह वर्तमान में रायसर प्लाजा में किराये की दुकान से अपना “फोटो कलर लैब” व्यवसाय चला रहा है और वह स्थान व्यावसायिक दृष्टि से अधिक उपयुक्त, विस्तृत और आधुनिक है।

किरायेदारों ने दलील दी कि यदि वह वहां से वर्षों से सफलतापूर्वक व्यवसाय कर रहा है, तो विवादित छोटी दुकान की आवश्यकता का दावा अविश्वसनीय है।

उन्होंने तर्क दिया कि मकान मालिक ने स्वेच्छा से बेहतर स्थान चुना है, अतः अब वह विवादित दुकान को “आवश्यक” नहीं बता सकता।

किराया बढ़ाने के लिए दबाव

किरायेदारों ने विशेष रूप से यह दलील दी कि विवादित दुकान का आकार लगभग 8.5 फीट × 14 फीट है और आधुनिक मशीनरी, उपकरण, काउंटर और ग्राहकों की आवाजाही के लिए इतना छोटा क्षेत्र “फोटो कलर लैब” जैसे तकनीकी व्यवसाय के लिए पर्याप्त नहीं है।

किरायेदारों ने यह भी कहा कि वह पहले से इन्द्रा बाजार में एक अन्य दुकान किराये पर लेकर एलबम निर्माण का कार्य कर रहा है, इसलिए उसके पास अन्य स्थान उपलब्ध हैं।

किरायेदारों ने यह भी कहा कि यदि उसे विस्तार करना है तो वह वर्तमान परिसर का उपयोग कर सकता है।

किरायेदारों ने अपनी दलील में आरोप लगाया कि मकान मालिक समय-समय पर किराया बढ़ाने के लिए दबाव डालता रहा है और जब किराया वृद्धि की मांग पूरी नहीं हुई, तब बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई।

इसलिए यह कार्यवाही bona fide आवश्यकता नहीं बल्कि “किराया बढ़ाने की रणनीति” है।

और दलील दी गई कि विवादित दुकान के आसपास मुख्यतः इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की दुकानें हैं और यह क्षेत्र फोटो कलर लैब जैसे व्यवसाय के लिए उपयुक्त वातावरण नहीं बनाता।

किराया ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल का फैसला

इस मामले में मकान मालिक के आवेदन पर किराया ट्रिब्यूनल ने मकान मालिक के पक्ष में फैसला देते हुए 3 जून 2017 को किरायेदारों को दुकान खाली करने का आदेश दिया।

इस आदेश के खिलाफ किरायेदारों की अपील पर अपीलीय किराया अधिकरण ने 23 जुलाई 2019 को फैसला देते हुए आदेश को पलट दिया और कहा कि मकान मालिक अपनी वास्तविक आवश्यकता सिद्ध करने में असफल रहा है।

अपीलीय किराया अधिकरण के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें और बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलीय किराया अधिकरण ने साक्ष्यों की गलत व्याख्या की और मूल तथ्यों को नजरअंदाज किया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मकान मालिक वर्तमान में किराये की दुकान से व्यवसाय कर रहा है और वह अपनी स्वयं की संपत्ति में व्यवसाय करना चाहता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि मकान मालिक अपना व्यवसाय कहां से संचालित करे।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया, जिनमें राजनी मनोहर कुंठा बनाम परशुराम चुनिलाल कानोजिया, मोहम्मद अयूब बनाम मुकेश चंद और भीमनगौड़ा बसनगौड़ा पाटिल बनाम मोहम्मद गुदुसाब शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि इन फैसलों में यह सिद्धांत स्थापित है कि मकान मालिक अपनी आवश्यकता का सर्वश्रेष्ठ निर्णायक होता है।

हाईकोर्ट ने “बोनाफाइड आवश्यकता” पर टिप्पणी करते हुए कहा:

“मकान मालिक की आवश्यकता को केवल इस आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि वह वर्तमान में किराये की दुकान से व्यवसाय कर रहा है।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि किरायेदारों ने यह सिद्ध करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया कि मकान मालिक के पास अन्य वैकल्पिक व्यावसायिक संपत्ति उपलब्ध है।

साथ ही, अदालत ने कहा कि किरायेदारों द्वारा किराये के भुगतान के संबंध में भी कोई ठोस प्रतिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया।

27 वर्ष पुरानी किरायेदारी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किरायेदारी वर्ष 1997 से चली आ रही है और लगभग 27 वर्षों से दुकान किरायेदारों के कब्जे में है। लेकिन केवल लंबी अवधि की किरायेदारी के आधार पर मकान मालिक के वैध अधिकारों को रोका नहीं जा सकता।

अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मकान मालिक के खिलाफ दिए गए अपीलीय अधिकरण के 23 जुलाई 2019 के आदेश को रद्द कर दिया और पूर्व में किराया अदालत द्वारा दिए गए 3 जून 2017 के मूल बेदखली आदेश को बहाल कर दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने किरायेदारों को छह महीने का समय दिया है, ताकि वे दुकान खाली कर मकान मालिक को शांतिपूर्ण कब्जा सौंप सकें।

यदि निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं सौंपा गया, तो मकान मालिक को विधिक प्रक्रिया के तहत बेदखली आदेश लागू कराने की स्वतंत्रता दी गई है।

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