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राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में अब नया विवाद, SOG और ACD से जुड़े मामलो की इनवर्डिंग रोके जाने के आरोप, हाईकोर्ट में सुनवाई-अधिवक्ता देंगे प्रतिवेदन

Rajasthan High Court Rules Insurance Company Not Liable to Pay Interest in Employee Compensation Case

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में इन दिनों एसओजी (SOG) और एसीडी (ACD) से जुड़े मामलों की इनवर्डिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट रजिस्ट्री प्रशासन योजनाबद्ध तरीके से एसओजी और एसीडी से संबंधित मामलों की इनवर्डिंग रोक रहा है, जिससे इन प्रकरणों की सुनवाई जोधपुर के बजाय जयपुर पीठ में तय की जा रही है।

चीफ जस्टिस कोर्ट में मेंशन

राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीपसिंह उदावत, महासचिव अरुण झांझड़िया, वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी, रवि भंसाली, विकास बालिया, धीरेन्द्रसिंह दासपा, जगमाल सिंह चौधरी, अरुण विनीत जैन, निखिल डुंगावत सहित कई अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे को चीफ जस्टिस कोर्ट में मेंशन किया।

एक्टिंग चीफ जस्टिस की कोर्ट ने मामले को दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया, जिसके बाद अधिवक्ता दोपहर बाद की कार्यवाही का इंतजार करते नजर आए।

दोपहर बाद सुनवाई— प्रतिवेदन देने की बात

दोपहर 2 बजे बाद इस मामले में पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई.

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न भी सामने आया—क्या हाईकोर्ट की एकलपीठ द्वारा दिए गए न्यायिक आदेश को प्रशासनिक आदेश के माध्यम से व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।

अब अधिवक्ता संगठन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को अपना औपचारिक प्रतिवेदन देंगे, जिसमें क्षेत्राधिकार, रजिस्ट्री की प्रशासनिक शक्तियों की सीमा और न्यायिक आदेशों की व्याख्या जैसे बिंदुओं पर विस्तार से पक्ष रखा जाएगा।

सोशल मीडिया पर विरोध, बार से हस्तक्षेप की मांग

अधिवक्ता इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर विरोध जता रहे हैं। कई अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इनवर्डिंग की प्रक्रिया इसी तरह प्रभावित रही तो बड़ी संख्या में एसओजी और एसीडी से जुड़े मुकदमे जयपुर पीठ में स्थानांतरित हो सकते हैं।

क्षेत्राधिकार को लेकर बना विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में हाल ही में आया एक न्यायिक आदेश है। वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एसओजी, जयपुर में दर्ज एक एफआईआर को रद्द कराने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संबंधित मामले का क्षेत्राधिकार जयपुर बेंच में बनता है, न कि जोधपुर मुख्यपीठ में।

एकलपीठ के इस आदेश के बाद से ही हाईकोर्ट प्रशासन ने एसओजी, जयपुर में दर्ज मामलों की सुनवाई जयपुर बेंच में निर्धारित करना शुरू कर दिया है। इसी को लेकर जोधपुर के अधिवक्ताओं में असंतोष व्याप्त है।

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