जोधपुर। राज राजेश्वरी आशापुरा माताजी पाट स्थान ट्रस्ट, नाडोल के अध्यक्ष करणसिंह उचियारड़ा को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को अदालत ने फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।
ऐसे में 28 फरवरी को प्रस्तावित प्रतिनिधि सभा की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन यह चुनाव हाईकोर्ट में दायर याचिका के निर्णय के अधिन रहेगा.
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में जस्टिस कुलदीप माथुर ने करणसिंह उचियाड़ा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय दिया है तथा मामले को 6 मार्च 2026 के लिए पुनः सूचीबद्ध किया है।
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल चुनाव कराने को लेकर कोई अनिवार्य निर्देश नहीं दिए जाएंगे, लेकिन यदि ट्रस्ट के उपनियम इसकी अनुमति देते हैं तो चीफ पैट्रोन इस संबंध में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। साथ ही, यदि चुनाव कराने का निर्णय लिया जाता है तो वह अंतिम निर्णय तक रिट याचिका के अधीन रहेगा।
क्या है पूरा विवाद
मामला पाली जिले के नाडोल स्थित राज राजेश्वरी आशापुरा माताजी पाट स्थान ट्रस्ट से जुड़ा है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष करणसिंह उचियारड़ा ने अपने अधिवक्ता DR Mohit Singhvi के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देवस्थान विभाग, जोधपुर के सहायक आयुक्त द्वारा जारी नोटिस को अवैध और मनमाना बताया।
याचिका में कहा गया कि ट्रस्ट की 28 दिसंबर 2025 को बैठक हुई थी तथा 31 दिसंबर 2025 की बैठक में यह कहा गया कि चीफ पैट्रोन महाराजधिराज पद्मश्री रघुवीरसिंह ने कार्यकारिणी (एग्जीक्यूटिव असेंबली) को भंग कर दिया है।
याचिकाकर्ता के अनुसार कार्यकारिणी को भंग करने का आदेश गैरकानूनी और टिकाऊ नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया कि प्रतिवादी संख्या 2 गणपतसिंह ने झूठा दावा करते हुए कार्यकारिणी के भंग होने की बात कही और नई बॉडी के पंजीकरण की मांग करते हुए कार्यवाही शुरू कर दी, जबकि 3 जनवरी 2026 को विधिवत बैठक बुलाकर कथित भंग आदेश को मनगढ़ंत और अवैध बताया गया था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें अवैध रूप से पद से हटाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
प्रतिवादियों का पक्ष
प्रतिवादी संख्या 2 की ओर से अधिवक्ता श्याम पालीवाल ने हाईकोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पूरी कार्यवाही विधि सम्मत है। उन्होंने दलील दी कि 28 फरवरी को प्रतिनिधि सभा की बैठक में अध्यक्ष को अपना बहुमत सिद्ध करना है और रिट याचिका केवल अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को टालने का प्रयास है।
Assistant Commissioner, Devasthan Department की ओर से अधिवक्ता महावीर पारीख उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक देवस्थान विभाग का सहायक आयुक्त चीफ पैट्रोन पर चुनाव कराने का दबाव नहीं डालेगा, परंतु यदि उपनियम अनुमति देते हैं तो निर्णय लेने की स्वतंत्रता रहेगी।
अविश्वास प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक द्वारा 18 फरवरी 2026 को अध्यक्ष करणसिंह उचियारड़ा और कोषाध्यक्ष भगवंतसिंह गुडला को नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस में उल्लेख है कि 28 फरवरी 2026 को सिरोही के केसर विलास पैलेस में प्रतिनिधि सभा की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अध्यक्ष को बहुमत सिद्ध करना होगा।
यदि वे बहुमत सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो संरक्षक सभा की ओर से चुनाव अधिकारी नियुक्त कर 7 मार्च 2026 को पुनः चुनाव कराए जाएंगे और नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि वर्तमान कार्यकारिणी का गठन 13 अगस्त 2023 को पांच वर्ष की अवधि के लिए हुआ था, लेकिन 18 निर्वाचित सदस्यों में से 10 ने अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास व्यक्त करते हुए इस्तीफा दे दिया था।
इन इस्तीफों को संरक्षक सभा ने अस्वीकार कर दिया था, परंतु बहुमत के मुद्दे को लेकर विवाद बना रहा।
सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग, जोधपुर की ओर से भी यह राय दी गई थी कि कार्यकारिणी को भंग करने के बजाय निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच पुनः निर्वाचन कराकर नई कार्यकारिणी का गठन किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट का रुख और आगे की स्थिति
हाईकोर्ट ने फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही पर कोई रोक नहीं लगाई है। इससे स्पष्ट है कि 28 फरवरी को प्रस्तावित बैठक में मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
हालांकि, अदालत ने यह संतुलित रुख अपनाया है कि चुनाव संबंधी कोई भी निर्णय रिट याचिका के अंतिम निपटारे के अधीन रहेगा।
अब सबकी निगाहें 28 फरवरी की बैठक और 6 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।