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अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी के जॉइनिंग आदेश को चुनौती नहीं दे सकते-राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Rules Subordinate Employees Cannot Challenge Senior Officer’s Joining Order
हाईकोर्ट ने कहा-यदि आदेश धोखे से प्राप्त हुआ हो तो संबंधित विभाग या सक्षम प्राधिकरण ही दे सकता है चुनौती, नोखा के ग्राम विकास अधिकारियों की याचिका खारिज

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की सरकारी व्यवस्था में अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति या जॉइनिंग से जुड़े मामलों को सीधे अदालत में चुनौती देने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी सरकारी अधिकारी के अधीनस्थ कर्मचारी उसके जॉइनिंग आदेश को अदालत में चुनौती नहीं दे सकते।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी आदेश को धोखे से प्राप्त किया गया है तो उस आदेश से प्रभावित संबंधित प्राधिकरण ही उसे चुनौती दे सकता है, न कि अधीनस्थ कर्मचारी।

जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने इसी आधार पर बीकानेर जिले के रामनिवास भादू व अन्य ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ताओं ने ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के जॉइनिंग आदेश को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला

मामले के अनुसार बीकानेर जिले के कई ग्राम विकास अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नोखा पंचायत समिति के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के 6 नवंबर 2025 के जॉइनिंग आदेश को चुनौती दी थी।

याचिका में कहा गया था कि संबंधित बीडीओ को पहले विभिन्न कारणों से निलंबित किया गया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि निलंबन आदेश के खिलाफ संबंधित अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन उस समय अदालत ने निलंबन आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद आरोप लगाया गया कि उक्त तथ्य को छिपाकर बीडीओ ने राजस्थान प्रशासनिक अधिकरण (RAT) से आदेश प्राप्त कर लिया और उसी आधार पर उन्हें पुनः पद पर जॉइन करने की अनुमति मिल गई।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अधिकरण के आदेश को तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया है, इसलिए उसके आधार पर दिया गया जॉइनिंग आदेश अवैध है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सबसे पहले यह देखा कि याचिकाकर्ताओं को इस मामले में याचिका दायर करने का अधिकार है या नहीं।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित बीडीओ के अधीन कार्य करने वाले अधिकारी हैं और वे उस पद या आदेश से सीधे प्रभावित पक्ष नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आदेश को धोखे से प्राप्त किया गया है तो उससे प्रभावित विभाग या संबंधित प्राधिकरण ही अधिकरण के समक्ष जाकर उसे चुनौती दे सकता है। अधीनस्थ अधिकारियों को ऐसा करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक अधिकरण का आदेश प्रभावी है, तब तक संबंधित अधिकारी उस पद पर बने रहने के हकदार हैं।

‘लॉकस स्टैंडी’ का अभाव

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान याचिका लॉकस स्टैंडी (याचिका दायर करने के अधिकार) के अभाव में दायर की गई है।

हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता इस मामले में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित पक्ष नहीं हैं, इसलिए उनके द्वारा दायर याचिका विधिसम्मत नहीं मानी जा सकती।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि वास्तव में अधिकरण का आदेश धोखे से प्राप्त किया गया है तो संबंधित सरकारी विभाग या सक्षम प्राधिकारी को ही इस विषय में कानूनी कदम उठाने चाहिए।

याचिका खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पेश की गई याचिका का लॉकस स्टैंडी प्रदर्शित नहीं होता और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

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