प्रतिष्ठित विधिक परिवार से संबंध; पिता-माता दोनों अधिवक्ता, परिवार में पहले से कई न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी
जयपुर। गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद देशभर में कई प्रेरणादायक सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं।
इन्हीं में एक नाम शिखर मूलचंदानी का भी जुड़ गया है, जिनका चयन गुजरात न्यायिक सेवा में हुआ है।
खास बात यह है कि शिखर ने पहली ही कोशिश में इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास कर न्यायिक सेवा में स्थान हासिल किया है।
शिखर मूलचंदानी का संबंध एक प्रतिष्ठित विधिक परिवार से है।

वह राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी के भतीजे हैं।
उनके चयन की खबर सामने आते ही परिवार, मित्रों और विधि जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी को भी इस उपलब्धि पर बड़ी संख्या में शुभकामनाएं और बधाइयां मिल रही हैं।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी शिखर मूलचंदानी ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्हे इसमें 24 वां स्थान हासिल हुआ हैं.
न्यायिक सेवा जैसी कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षा को पहली ही बार में पास करना उनकी प्रतिभा और समर्पण का प्रमाण माना जा रहा है।
विधिक परंपरा वाले परिवार से हैं शिखर
शिखर मूलचंदानी एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां कानून और न्यायिक सेवा की मजबूत परंपरा रही है।
उनके पिता राधा कृष्ण मूलचंदानी पूर्व में सिविल एडीजीसी (Civil ADGC) रह चुके हैं और वर्तमान में अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। वहीं उनकी माता बॉबी मूलचंदानी भी पेशे से अधिवक्ता हैं।
ऐसे माहौल में पले-बढ़े शिखर को बचपन से ही कानून और न्याय व्यवस्था की गहरी समझ मिली, जिसने उन्हें न्यायिक सेवा की ओर प्रेरित किया।

परिवार में पहले से कई न्यायिक अधिकारी
शिखर के परिवार में पहले से ही कई सदस्य न्यायिक और प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत हैं। उनके ताऊ जस्टिस गंगा राम मूलचंदानी राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश रह चुके हैं और वर्तमान में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्य कर रहे हैं।
इसी तरह शिखर के चचेरे भाई पियूष मूलचंदानी उत्तर प्रदेश के कासगंज में सिविल जज के रूप में कार्यरत हैं।
परिवार की नई पीढ़ी भी शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में लगातार आगे बढ़ रही है।
शिखर की बहन अनुष्का मूलचंदानी एलएलबी और एलएलएम में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं और वर्तमान में अहमदाबाद में रह रही हैं। उनके पति प्रशासनिक सेवा में कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
पहली ही कोशिश में सफलता
गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा को देश की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। हर वर्ष हजारों अभ्यर्थी इसमें शामिल होते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण केवल कुछ ही उम्मीदवारों का चयन हो पाता है।
ऐसे में शिखर मूलचंदानी द्वारा पहले ही प्रयास में सफलता हासिल करना कई युवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गया है।
विधि जगत में खुशी की लहर
शिखर की इस उपलब्धि पर विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों, अधिवक्ताओं और उनके शुभचिंतकों ने खुशी व्यक्त की है।
कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे परिवार की विधिक परंपरा और शिखर की मेहनत का परिणाम बताया है।
परिवार और परिचितों का कहना है कि शिखर की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और न्यायिक सेवा में उनका योगदान समाज के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।