कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने किया उद्घाटन; कहा—लोक अदालत, मध्यस्थता और प्री-लिटिगेशन समाधान से न्याय व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी
जयपुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देशानुसार वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को प्रदेशभर की अदालतों में किया गया।
इस अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की ओर से आयोजित समारोह में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदेशभर की विभिन्न अदालतों में लंबित और प्री-लिटिगेशन श्रेणी के करीब 10 लाख मामलों की एक ही दिन में सुनवाई कर उनके निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य के जिला एवं उपखंड स्तर की अदालतों में भी लोक अदालत की विशेष बेंचों का गठन किया गया है, जहां समझौते के आधार पर मामलों का त्वरित निपटारा किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए लोक अदालत, मध्यस्थता (Mediation) और प्री-लिटिगेशन समाधान जैसे वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि यदि छोटे और साधारण मामलों को अदालतों के बाहर ही समझौते के माध्यम से सुलझा लिया जाए तो न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब छोटे विवाद अदालत से बाहर हल होते हैं, तब न्यायालय महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी प्रश्नों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
इससे न केवल न्यायिक व्यवस्था मजबूत होती है बल्कि वादकारियों, अधिवक्ताओं और पूरे न्याय तंत्र को इसका लाभ मिलता है।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को लेकर शुरुआती दौर में कुछ अधिवक्ताओं के मन में शंकाएँ रहती थीं, लेकिन अब यह समझ विकसित हो चुकी है कि ऐसे कई मामले होते हैं जिन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है। इससे सभी पक्षों को लाभ मिलता है और न्याय की प्रक्रिया भी तेज होती है।
उन्होंने विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें पक्षकारों को वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यदि किसी अधिवक्ता के कुछ मामले लोक अदालत में समझौते से निपट जाते हैं तो इससे न्यायिक प्रणाली में गति आती है और नए मामलों के लिए भी अवसर बनते हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, वहीं मध्यस्थता (मेडिएशन) और प्री-लिटिगेशन समाधान प्रणाली भी विवादों के शांतिपूर्ण निपटारे में अहम भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि न्यायपालिका लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है कि मध्यस्थता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि मामले की शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक किसी भी स्तर पर पक्षकारों के बीच समझौता कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि छोटे विवादों को अदालतों से दूर रखते हुए केवल महत्वपूर्ण विधिक प्रश्नों से जुड़े मामलों को न्यायालयों में सुनवाई के लिए रखा जाए तो देश की न्याय प्रणाली में व्यापक सुधार संभव है। इससे लोगों को समय पर न्याय मिलेगा और समाज में शांति एवं संतुलन भी स्थापित होगा।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि त्वरित और सरल न्याय मिलने से लोगों को मानसिक शांति मिलती है, जो समाज के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने इस अवसर पर सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में आयोजित इस उद्घाटन समारोह में जस्टिस इन्द्रजीत सिंह, जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल, जस्टिस शुभा मेहता, जस्टिस संदीप तनेजा, जस्टिस बिपिन गुप्ता और जस्टिस रवि चिरानिया मौजूद रहे।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता अजय कुमार बाजपेई, जे. पी. गोयल, एस. के. गुप्ता, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के स्पेशल सचिव महेन्द्र प्रताप बेनीवाल, उपसचिव रश्मि नवल, सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और रालसा के अधिकारी समारोह में मौजूद रहे।
राज्यभर में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा, चेक बाउंस, बिजली-पानी बिल, पारिवारिक विवाद, राजस्व और अन्य छोटे मामलों का आपसी समझौते से निस्तारण किया जा रहा है। न्यायपालिका का मानना है कि इस प्रकार के प्रयासों से न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, त्वरित और जनहितकारी बनाया जा सकता है।
