जयपुर। न्यायपालिका में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल अपने फैसलों से ही नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, दृष्टिकोण और समाज के प्रति संवेदनशीलता से भी एक अलग पहचान बनाते हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनूप कुमार ढंड भी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन संघर्ष, समर्पण और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक
17 मार्च 1973 को जन्मे जस्टिस अनूप कुमार ढंड का जीवन इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और लगन से किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद कानून की पढ़ाई (बी.ए., एलएल.बी.) की और साथ ही क्रिमिनोलॉजी एवं क्रिमिनल एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PGDCA) भी प्राप्त किया।
यह शैक्षणिक आधार उनके भविष्य के न्यायिक करियर की मजबूत नींव बना।

वकालत से न्यायाधीश तक का सफर
जस्टिस ढंड ने 14 जनवरी 1995 को बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और अपने कानूनी करियर की शुरुआत की।
जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों—विशेष रूप से आपराधिक, सेवा और विविध (Miscellaneous) मामलों में व्यापक प्रैक्टिस की।
अपने शुरुआती दिनों से ही उन्होंने अपने तर्कों की मजबूती, कानून की गहरी समझ और मामलों की सूक्ष्मता को समझने की क्षमता के चलते एक अलग पहचान बनाई।
उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता ने उन्हें जल्द ही कानूनी जगत में स्थापित कर दिया।
बार एसोसिएशन और संस्थागत योगदान
वर्ष 2009-10 में जस्टिस अनूप कुमार ढंड को राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर का सीनियर एग्जीक्यूटिव सदस्य चुना गया।
यह उनके नेतृत्व और कानूनी समुदाय में उनकी प्रतिष्ठा का प्रमाण था।
उन्होंने कई महत्वपूर्ण सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के लिए स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी सेवाएं दीं, जिनमें राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (RIICO), राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RSRDC), राजस्थान फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (RFC) और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य किया।

समाज के प्रति संवेदनशीलता: प्रो-बोनो और एमिकस क्यूरी की भूमिका
जस्टिस ढंड का व्यक्तित्व केवल पेशेवर सफलता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) के लिए प्रो-बोनो वकील के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके साथ ही, उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में हाईकोर्ट की सहायता एमिकस क्यूरी के रूप में की। ये मामले केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि सामाजिक और जनहित से जुड़े होते थे, जिनमें उन्होंने निष्पक्ष और गहन दृष्टिकोण से न्यायालय की सहायता की।
ज्ञान और संवाद के माध्यम से योगदान
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने अपने अनुभव और ज्ञान को केवल अदालत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कई लॉ जर्नल्स के मानद संपादक के रूप में कार्य किया और कानूनी लेखन के क्षेत्र में भी योगदान दिया।
इसके अलावा, वे टेलीविजन डिबेट्स, आकाशवाणी और एफएम रेडियो पर भी सक्रिय रहे, जहां उन्होंने सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। इससे आम जनता तक कानून की समझ पहुंचाने में मदद मिली।
उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राजस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विधि सम्मेलन (NALCON) में भी संबोधन दिया, साथ ही कॉमनवेल्थ देशों के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी अपने विचार रखे।

न्यायाधीश के रूप में नई जिम्मेदारी
18 अक्टूबर 2021 को जस्टिस अनूप कुमार ढंड को राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। यह उनके वर्षों की मेहनत, ईमानदारी और कानूनी उत्कृष्टता का परिणाम था।
न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए न्याय किया है। उनके निर्णयों में कानून की गहराई के साथ-साथ मानवीय पक्ष भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए बेहतरीन फैसले
एक जानकारी के अनुसार, देशभर के हाईकोर्ट में सर्वाधिक रिपोर्टेबल जजमेंट देने वाले टॉप 5 जजों में जस्टिस अनूप कुमार ढंड का नाम शामिल है।
यह भी उल्लेखनीय है कि उनके रिपोर्टेबल जजमेंट को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखने का अनुपात भी बेहतरीन है।
वर्ष 2025 में ही उनके द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में दिए गए रिपोर्टेबल जजमेंट की संख्या सर्वाधिक रही है। जानकारी के अनुसार जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने वर्ष 2025 में कुल 266 रिपोर्टेबल जजमेंट दिए.
राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यदिवस के अनुसार प्रतिदिन 1 से अधिक रिपोर्टेबल जजमेंट दिए.
“Live-in relationship” को लेकर दिया गया उनका फैसला हो या फिर मीडिया से संबंधित रिपोर्टेबल जजमेंट—दोनों ही देशभर में चर्चा में रहे हैं।

संवेदनशील मामलों पर संज्ञान
राजस्थान हाईकोर्ट में आम जनता से जुड़े बेहद संवेदनशील मामलों पर स्वतः संज्ञान लेने का रिकॉर्ड भी जस्टिस अनूप कुमार ढंड के नाम है।
जयपुर-अजमेर हाईवे पर अग्निकांड का मामला हो, झुलसती गर्मी में आम जनता की सुविधाओं का मुद्दा हो, बालिका गृहों की स्थिति, बच्चों में कुपोषण, स्कूली बच्चों की सुरक्षा या साइबर सुरक्षा जैसे विषय—जस्टिस ढंड ने कई गंभीर मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को आवश्यक निर्देश दिए और कई मामलों को जनहित याचिका के रूप में सूचीबद्ध किया।
प्रेरणा का स्रोत
जस्टिस ढंड का जीवन युवा वकीलों और कानून के छात्रों के लिए एक प्रेरणा है।
उन्होंने यह साबित किया है कि केवल कानूनी ज्ञान ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता, नैतिकता और ईमानदारी भी एक सफल न्यायाधीश बनने के लिए उतनी ही जरूरी हैं।
जन्मदिन पर शुभकामनाएं
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पूरा कानूनी जगत उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है। उनकी उपलब्धियां न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उनका योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक है—जहां कानून केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बन जाता है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड के चर्चित फैसले
वकीलों को हड़ताल का अधिकार नहीं, शनिवार कार्यदिवस पर हड़ताल को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश