पाली/जोधपुर। राजस्थान के पाली जिले के प्रसिद्ध ओम आश्रम के स्वामी महेश्वरानंद को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, स्वामी महेश्वरानंद की मेडीकल कंडीशन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर हाईकोर्ट ने स्वामी महेश्वरानंद की मेडीकल कंडीशन की जांच करने के आदेश दिए हैं.
राजस्थान के पाली जिले के प्रसिद्ध ओम आश्रम के स्वामी महेश्वरानंद को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, स्वामी महेश्वरानंद की मेडीकल कंडीशन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर हाईकोर्ट ने स्वामी महेश्वरानंद की मेडीकल कंडीशन की जांच करने के आदेश दिए हैं.
मेडीकल कंडीशन की जांच
हाईकोर्ट ने GA Cum AAG दीपक चौधरी को पुलिस अधीक्षक, पाली तथा बागंड अस्पताल, पाली के प्रधान चिकित्सा अधिकारी से समन्वय स्थापित कर मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं.
जिसमें एक वरिष्ठ फिजिशियन, एक न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन तथा (यदि उपलब्ध हो) एक मनोचिकित्सक शामिल होंगे। उक्त मेडिकल बोर्ड स्वामी महेश्वरानंद, जो कि जिला पाली के जाडन गांव स्थित ओम आश्रम में निवासरत बताए गए हैं, की मेडीकल कंडीशन की जांच करेगा।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तिथि पर इस हाईकोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं.
गौरतलब हैं कि जाडन स्थित ओम विश्व दीप गुरुकुल ओम आश्रम के महामंडलेश्वर संत महेश्वरानंद से आश्रम की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों पर कथित रूप से जबरन अंगूठा लगवाने का लेकर मामला दर्ज कराया गया था.
इस संबंध में संत की विदेशी शिष्या एवं सेवीका उमापुरी ने पाली कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विवादों की शुरूआत
पाली का ओम आश्रम ट्रस्ट (जाडन) एक बार फिर विवादों में आ गया है। विवाद की शुरूआत 13 जनवरी को महामंडलेश्वर की सेविका उमापुरी ने शहर के कोतवाली थाने में नेमीचंद चौपड़ा और संत फूलपुरी के खिलाफ मामला दर्ज कराने से हुई.
मुकदमें में आरोप लगाया गया था कि संत महेश्वरानंद बीमार हैं, वे कई धर्मार्थ ट्रस्टों के संरक्षक हैं। रिपोर्ट में बताया कि दोनों आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर संत महेश्वरानंद को खाने पर बुलाकर आश्रम की सम्पत्तियों के डॉक्यूमेंट पर अंगूठा लगवाया था।
यह भी आरोप लगाया गया कि जाडन स्थित प्रसिद्ध ओम आश्रम में रहने वाले वृद्ध संत के हस्ताक्षरों का कथित दुरुपयोग किया गया.
17 जनवरी को दूसरा मुकदमा
आश्रम के ही संत फूलपुरी ने 17 जनवरी को शिवपुरा थाने में एक ओर मामला दर्ज करवाया.
इस मामले में महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद के शिष्य ने आश्रम में रह रहे 5 विदेशी शिष्यों के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
इसमें आरोप लगाया गया है कि पांचों ने ट्रस्ट के कामों में हस्तक्षेप किया है। इनमें से अधिकांश आरोपी वीजा की शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं और भारत में अवैध रूप से रहे हैं। इस दौरान एक सेविका पर परिवादी से मारपीट करने का भी आरोप है।
हाईकोर्ट में कैसे पहुंचा मामला
वी द पिपुल संस्था ने इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि जाडन के ओम आश्रम के स्वामी महेश्वरानंद मानसिक रूप से अस्वस्थ थे, उनकी स्थिति का फायदा उठाकर उनके हस्ताक्षर लिए गए और बाद में उन हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष मेडिकल परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि संबंधित समय में संत हस्ताक्षर करने की स्थिति में थे या नहीं।
मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है, जहां इस रिपोर्ट पर विस्तार से सुनवाई होगी।
250 एकड़ में फैला हैं ओम आश्रम
पाली के जाडन के पास नेशनल हाईवे-62 पर विश्वदीप गुरुकुल (ओम आश्रम) स्थित है।
यह आश्रम करीब 250 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
इसमें चार मंजिला इमारत और 108 कमरे बनाए गए हैं, जो ओम (ॐ) के आकार में निर्मित हैं।
मंदिर का शिलान्यास 1995 में हुआ था और फरवरी 2024 में 28 साल बाद इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।
कौन हैं महामंडलेश्वर संत महेश्वरानंद
9 साल की उम्र में स्वामी माधवानंद के सानिध्य में नीपल (देसूरी, पाली) धाम गए, जहां योग, ध्यान, धर्मशास्त्र और अध्यात्म की शिक्षा ली।
साल 1970 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अंतरराष्ट्रीय “ऑस्ट्रियन भारतीय योग वेदांत सोसायटी” और “अंतरराष्ट्रीय श्रीदीप माधवानंद आश्रम सदस्यता संस्थान” की स्थापना की।
संत महेश्वरानंद ने दुनियाभर में 45 हजार से ज्यादा ध्यान योग केंद्र स्थापित किए।
उन्होंने लोगों को नशे की लत छोड़ने के लिए प्रेरित किया और योग व अध्यात्म का मार्ग दिखाया।
उनके विश्वभर में चल रहे हजारों योग केंद्रों में योग की शिक्षा दी जा रही है, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।