जयपुर। राजधानी जयपुर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की मौत के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा स्कूल की संबद्धता को लेकर दिए गए आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने सीबीएसई के 23 फरवरी 2026 के उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें स्कूल की कक्षा 11 और 12 की संबद्धता दो वर्षों के लिए निलंबित कर दी गई थी।
जस्टिस गणेशराम मीणा ने नीरजा मोदी स्कूल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है, ताकि हजारों विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
हाईकोर्ट ने स्कूल को सशर्त राहत देते हुए महत्वपूर्ण शर्तें निर्धारित की हैं।
आदेश के अनुसार स्कूल प्रबंधन 10 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये CBSE के पास जमा कराएगा, जिसे एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट) के रूप में रखा जाएगा।
साथ ही, CBSE द्वारा बताई गई सभी कमियों को एक माह के भीतर दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
CBSE को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में CBSE को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि 45 दिनों के बाद स्कूल का पुनः निरीक्षण किया जाए।
यदि निरीक्षण के दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो बोर्ड को यह स्वतंत्रता होगी कि वह अदालत के समक्ष स्कूल के खिलाफ प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सके।
इसके अलावा, अदालत ने CBSE को यह भी आदेश दिया कि यदि भविष्य में छात्रों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता उत्पन्न होती है, तो ऐसे स्कूलों की सूची और उनकी निरीक्षण रिपोर्ट शपथपत्र के साथ कोर्ट में पेश करनी होगी।
स्कूल का पक्ष
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. शर्मा ने अदालत को बताया कि नीरजा मोदी स्कूल वर्ष 2001 से संचालित हो रहा है और वर्तमान में करीब 5500 छात्र यहां अध्ययनरत हैं।
उन्होंने दलील दी कि छात्रा अमायरा की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसके बाद CBSE ने कुछ कमियां चिन्हित की थीं, जिनमें से अधिकांश को स्कूल पहले ही दूर कर चुका है और शेष कमियों को भी निर्धारित समय में पूरा कर लिया जाएगा।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि CBSE द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, इसलिए इस पर पुनर्विचार आवश्यक है।
CBSE का विरोध
दूसरी ओर, CBSE की ओर से अदालत में कहा गया कि स्कूल ने संबद्धता उपविधियों का उल्लंघन किया है और बोर्ड ने नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की है।
मामले में हस्तक्षेप करने वाले अभिभावकों के वकील ने भी अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो सख्ती जरूरी है और इस मामले में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जानी चाहिए।
यह है मामला
गौरतलब है कि छात्रा अमायरा की मौत के बाद CBSE ने 23 फरवरी 2026 को जारी अपने आदेश में नीरजा मोदी स्कूल की सीनियर सेकेंडरी (कक्षा 11-12) स्तर की संबद्धता दो वर्षों के लिए निलंबित कर दी थी।
साथ ही, स्कूल को कक्षा 11 में नए प्रवेश लेने और छात्रों को प्रमोट करने से भी रोक दिया गया था, जबकि कक्षा 10 तक की संबद्धता जारी रखी गई थी।
अब हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद स्कूल को अस्थायी राहत मिल गई है, लेकिन अंतिम निर्णय मामले की अगली सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।