जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के विधि संकाय में शुक्रवार को देश के सबसे प्रतिष्ठित विधिक आयोजनों में से एक—तृतीय बी.एल. पुरोहित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता—का भव्य शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन के साथ ही संपूर्ण विश्वविद्यालय परिसर में कानून, तर्क और न्याय की बहसों का माहौल गरमा गया है।
देशभर के लगभग 30 विश्वविद्यालयों से आई प्रतिभाशाली टीमें इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में अपने विधिक कौशल का दमखम दिखा रही हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने किया।
प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने जोधपुर को “सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि विधिक चेतना का भी सशक्त केंद्र” बताते हुए कहा कि यहां की धरती ने हमेशा न्याय और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया है।

जस्टिस माहेश्वरी ने साफ शब्दों में कहा कि आज का दौर विधि क्षेत्र के लिए अवसरों से भरा हुआ है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां भी उतनी ही बड़ी हैं।
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि ज्ञान, नैतिकता और समर्पण के साथ देश के विधिक ढांचे को मजबूत बनाना ही असली लक्ष्य होना चाहिए।
मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “यह केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि न्यायालय की वास्तविक चुनौतियों का अभ्यास है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को चेताया कि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज, न्याय और संवेदनशीलता की गहराई को भी समझें—तभी वे एक सफल विधि विशेषज्ञ बन पाएंगे।
कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के विधि मंत्री जोगाराम पटेल की मौजूदगी ने आयोजन को और भी अहम बना दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार विधि शिक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन विद्यार्थियों के लिए बड़े अवसर लेकर आते हैं। उन्होंने कहा कि “यहीं से भविष्य के बड़े वकील, न्यायाधीश और विधि विशेषज्ञ तैयार होते हैं।”
उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मंच न केवल प्रतिस्पर्धा का है, बल्कि खुद को परखने और निखारने का भी अवसर है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जी. के. व्यास, राजस्थान बार काउंसिल के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़ और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, कड़ी मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
कुलपति प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा से गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है और यह प्रतियोगिता छात्रों के लिए सीखने का एक जीवंत मंच है, जहां वे अपने ज्ञान को व्यवहार में उतार सकते हैं।
तीसरा चैप्टर में लॉ स्टूडेंट की भागीदारी
स्वर्गीय बी.एल. पुरोहित की स्मृति में आयोजित यह प्रतियोगिता विधि जगत में एक विशेष पहचान बना चुकी है। तीन दिनों तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में प्रारंभिक राउंड से लेकर क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल तक कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
यह बी एल पुरोहित मेमोरियल राष्ट्रीय मूट कोर्ट का तीसरा चैप्टर हैं. यह प्रतियोगिता राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. बी.एल. पुरोहित की स्मृति में आयोजित की जा रही है, जो अपने समय के बेहद सम्मानित और सिद्धांतवादी वकील थे।

उद्घाटन से लेकर फाइनल तक दिग्गजों की मौजूदगी
प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन शुक्रवार को हुआ, जिसमें लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस दिनेश माहेश्वरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समापन समारोह 22 मार्च को आयोजित होगा, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे और विजेताओं को सम्मानित करेंगे।
प्रतियोगिता के फाइनल राउंड को और भी खास बनाते हुए जस्टिस संजीत पुरोहित और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गोविंद माथुर पैनल जज के रूप में प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगे। इससे प्रतियोगिता की विश्वसनीयता और स्तर और भी ऊंचा हो गया है।
30 विश्वविद्यालयों के बीच कड़ा मुकाबला
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के लगभग 30 विश्वविद्यालयों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रारंभिक राउंड, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल के जरिए प्रतिभागियों की परीक्षा होगी। हर दौर में छात्रों की विधिक समझ, तर्कशक्ति, रिसर्च और कोर्टरूम प्रेजेंटेशन का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।
क्यों खास है यह मूट कोर्ट?
यह प्रतियोगिता केवल एक अकादमिक इवेंट नहीं, बल्कि विधि छात्रों के लिए ‘रियल कोर्ट एक्सपीरियंस’ का मंच है। यहां छात्र वकीलों की तरह केस तैयार करते हैं, जजों के सामने बहस करते हैं और कानून के हर पहलू को व्यावहारिक रूप में समझते हैं।
यही वजह है कि देश के टॉप लॉ कॉलेजों के छात्र इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने को अपनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
इनाम भी आकर्षक, प्रतिस्पर्धा और तीखी
प्रतियोगिता में विजेता टीम को ₹61,000 की नगद राशि और ट्रॉफी दी जाएगी, जबकि उपविजेता टीम को ₹31,000 का पुरस्कार मिलेगा। इसके अलावा बेस्ट स्पीकर, बेस्ट रिसर्चर और बेस्ट मेमोरियल के लिए ₹11,000-₹11,000 के अलग-अलग पुरस्कार रखे गए हैं।