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ओपन एयर कैंप से फरार होने के बावजूद कैदी को मिली 20 दिन की पैरोल, हत्या-लूट के मामले में 17 साल से काट रहा है सजा

Rajasthan High Court Grants 20-Day Parole to Murder-Convict Despite Past Escape from Open Jail

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पैरोल से जुड़े एक फैसले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी भूरिया उर्फ जगदीश को 20 दिन की पहली पैरोल देने का आदेश दिया है।

हत्या और लूट के आरोपी कैदी जगदीश को हाईकोर्ट ने पैरोल देने का फैसला किया। वह पहले खुली जेल से फरार हो चुका है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही आरोपी पूर्व में ओपन एयर कैंप से फरार हुआ था, लेकिन उसके बाद लंबे समय तक जेल में रहने और कुल सजा अवधि को देखते हुए उसके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने 13 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने जिला पैरोल समिति द्वारा पैरोल याचिका खारिज करने के निर्णय को पलटते हुए यह राहत दी।

मामला क्या है?

याचिकाकर्ता भूरिया उर्फ जगदीश, निवासी कोटा, को वर्ष 2013 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भीलवाड़ा ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 392 (लूट) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

वर्तमान में याचिकाकर्ता दौसा की स्पेशल सेंट्रल जेल में निरुद्ध है।

जेल में रहते हुए उसने 20 दिन की पहली पैरोल के लिए आवेदन किया था, जिसे 16 दिसंबर 2025 को जिला पैरोल सलाहकार समिति ने अस्वीकार कर दिया था।

पैरोल कमेटी द्वारा आवेदन खारिज करने के खिलाफ याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चिराग खत्री ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि आरोपी 17 वर्ष से अधिक की सजा (रिमिशन सहित) काट चुका है और राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 1958 के तहत वह पहली पैरोल का पात्र है।

अधिवक्ता ने कहा कि नियम 14 के तहत उस पर कोई स्थायी अयोग्यता लागू नहीं होती, इसलिए उसे 20 दिन की पैरोल दी जानी चाहिए।

अधिवक्ता चिराग खत्री ने याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि लंबी अवधि की सजा काटने वाले कैदियों को सुधार के अवसर देने के लिए पैरोल एक महत्वपूर्ण अधिकार है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 23 अगस्त 2019 से 19 जनवरी 2020 तक ओपन एयर कैंप से फरार रहा था।

राजस्थान पैरोल नियम, 1958 के नियम 14 के अनुसार ऐसे कैदी पैरोल के लिए अयोग्य माने जाते हैं जो कभी फरार हुए हों।

सरकार ने कहा कि जिला पैरोल समिति द्वारा याचिका खारिज करने का फैसला सही था क्योंकि याचिकाकर्ता का आचरण पहले ही साबित हो चुका है।

राज्य का तर्क था कि फरार होना एक गंभीर अनुशासनहीनता है और इससे कैदी की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है।

हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नियम 14 की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

हाईकोर्ट ने कहा कि नियम 14 में “ordinarily” (सामान्यतः) और “unless” (जब तक) जैसे शब्दों का उपयोग महत्वपूर्ण है।

हाईकोर्ट ने कहा कि “ordinarily” का मतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में अयोग्यता लागू होगी, लेकिन विशेष परिस्थितियों में अदालत विवेकाधिकार का उपयोग कर सकती है।

वहीं “unless” का मतलब अनिवार्य शर्त से है—जैसे कि यदि कैदी ने कुल सजा का 1/4 हिस्सा नहीं काटा हो तो उसे पैरोल नहीं मिल सकती।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां कुछ अयोग्यताएं लचीली हैं, वहीं कुछ शर्तें कठोर और अनिवार्य हैं।

फरारी के बावजूद क्यों मिली राहत?

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि याचिकाकर्ता ने 2019-2020 के दौरान ओपन एयर कैंप से फरार होकर नियमों का उल्लंघन किया था।

लेकिन उसके बाद उसने लगभग 6 वर्षों तक निरंतर कारावास भुगता है और कुल मिलाकर उसने 17 साल से अधिक की सजा काट ली है।

हाईकोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में केवल एक पुरानी घटना के आधार पर पैरोल से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं होगा।

सुधारात्मक न्याय प्रणाली (Reformative Justice System) के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए उसे अवसर दिया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय केवल दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सुधार और पुनर्वास की भावना भी शामिल है। भले ही कैदी ने अतीत में गलती की हो, लेकिन यदि उसने लंबे समय तक सजा काटी है और सुधार की संभावना है, तो उसे समाज से जुड़ने का अवसर दिया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि भूरिया उर्फ जगदीश को 20 दिन की पहली पैरोल पर रिहा किया जाए।

हाईकोर्ट ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और 25,000-25,000 रुपये के दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर जमानत दी है।

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