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व्हाट्सएप नोटिस पर गिरफ्तारी गैरकानूनी: राजस्थान हाईकोर्ट ने ACB अधिकारी को ठहराया अवमानना का दोषी

Rajasthan High Court Rules WhatsApp Notice Invalid for Arrest, ACB Officer Held Guilty of Contempt

जयपुर, 24 मार्च 2026। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए व्हाट्सएप नोटिस के आधार पर की गई गिरफ्तारी को अवैध ठहराया है।

हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया नोटिस कानूनन मान्य नहीं है और ऐसे नोटिस के आधार पर की गई गिरफ्तारी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन मानी जाएगी।

जस्टिस प्रवीर भटनागर ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को अवमानना का दोषी ठहराते हुए सख्त टिप्पणी की है।

मामला जयपुर निवासी रवि मीणा द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए केवल व्हाट्सएप पर भेजे गए नोटिस के आधार पर की गई है।

बिना वैध नोटिस सीधे गिरफ्तारी-कोर्ट ने कहा “गंभीर उल्लंघन”

मामला जयपुर निवासी रवि मीणा की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिन्हें ACB ने भ्रष्टाचार के मामले में 1 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी से पहले केवल व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा गया, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह से अवैध माना।

25 जनवरी 2023 को जांच अधिकारी द्वारा उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस भेजा गया, जिसमें 31 जनवरी को पेश होने को कहा गया था।

याचिकाकर्ता ने नोटिस का जवाब देते हुए पत्नी की बीमारी के कारण समय मांगा था, लेकिन पुलिस ने बिना जवाब दिए सीधे गिरफ्तारी कर ली।

हाईकोर्ट ने इसे कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताया।

याचिका में दलीलें

याचिकाकर्ता रवि मीणा की ओर से अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने पैरवी करते हुए अदालत में दलील दी कि यह कार्रवाई CrPC की धारा 41-A का उल्लंघन है।

अधिवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य और सतेंद्र कुमार अंतिल फैसलों की अनदेखी की गई। गिरफ्तारी के लिए आवश्यक “चेकलिस्ट” और “कारणों की रिकॉर्डिंग” का पालन नहीं हुआ।

उन्होंने अदालत से मांग की कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।

एसीबी का जवाब

मामले में ACB और संबंधित अधिकारियों की ओर से जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता को नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसका पालन नहीं किया और टालमटोल (evasive conduct) अपनाया।

अधिवक्ता ने कहा कि गिरफ्तारी CrPC की धारा 41(1)(b) के तहत की गई और इसके लिए आवश्यक चेकलिस्ट तैयार की गई थी।

एसीबी ने कहा कि याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी के समय या मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के दौरान गिरफ्तारी को चुनौती नहीं दी।

साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता पहले FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं और असफल रहे हैं, जिसके बाद वर्तमान याचिका जांच एजेंसी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से दायर की गई है।

हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि व्हाट्सएप या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा गया नोटिस धारा 41-A CrPC के तहत वैध नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि नोटिस की सेवा कानून में निर्धारित प्रक्रिया (व्यक्तिगत सेवा, चस्पा, स्पीड पोस्ट आदि) से ही होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी नोटिस का पालन करता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि इसके लिए ठोस कारण दर्ज न हों।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न तो वैध नोटिस दिया गया और न ही उचित प्रक्रिया अपनाई गई और जांच एजेंसी ने याचिकाकर्ता के जवाब को नजरअंदाज किया।

कोर्ट ने कहा कि वैध नोटिस देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया और सीधे गिरफ्तारी कर ली गई, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर

हाईकोर्ट ने एसीबी की कार्रवाई को लेकर कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) सर्वोच्च है। इसे केवल कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही सीमित किया जा सकता है।

प्रक्रिया का पालन न करना संविधान के मूल अधिकारों का हनन है।

हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में संबंधित ACB अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की और यह कृत्य अदालत की अवमानना के दायरे में आता है।

कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है और इसे केवल विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही सीमित किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की अनदेखी

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार और सतेंद्र कुमार अंतिल मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को गिरफ्तारी से पहले नोटिस जारी करना और उसका विधिवत पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

कोर्ट ने कहा कि व्हाट्सएप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम इस प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकते।

एसीबी अधिकारी दोषी, सजा पर अगली सुनवाई

कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना की और याचिकाकर्ता की स्वतंत्रता का हनन किया।

मामले में सजा तय करने के लिए अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं

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