चेक बाउंस केस में समझौते के बावजूद आरोपी को जेल भेजने पर सख्त टिप्पणी, 15% लागत की शर्त खत्म कर तत्काल रिहाई के आदेश
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में समझौते के बावजूद पैसे जमा न कर पाने के कारण जेल भेजने के आदेश पर सख्त नाराजगी जताते हुए जेल में बंद आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए ऐतिहासिक और बेहद सख्त संदेश देते हुए कहा है कि “गरीबी को जेल भेजने का आधार नहीं बनाया जा सकता”।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि कानून किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को केवल उसकी आर्थिक कमजोरी के आधार पर छीनने की इजाजत नहीं देता।
क्या है पूरा मामला?
उदयपुर निवासी संतोष डांगी के खिलाफ चेक बाउंस का मामला दर्ज हुआ था। निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और सजा दी। अपील भी खारिज हो गई।
बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हाईकोर्ट ने सजा खत्म करते हुए आरोपी को राहत दी, लेकिन एक शर्त रखी—चेक राशि का 15% “कॉस्ट” के रूप में जमा करना होगा।
यही शर्त बाद में आरोपी के लिए जेल का कारण बन गई।
पैसे नहीं दे पाए… और सीधे जेल!
आरोपी-याचिकाकर्ता आर्थिक तंगी के कारण यह राशि जमा नहीं कर सका, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया और आरोपी को जेल भेज दिया।
यानी जिस केस में समझौता हो चुका था, उसमें सिर्फ पैसे न देने के कारण व्यक्ति जेल में था।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना और फैसला देते हुए कई सख्त टिप्पणियां कीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि—
“गरीबी को जेल का आधार नहीं बनाया जा सकता।”
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर है, तो उसे जेल में रखना न्याय के खिलाफ है।
“कॉस्ट” कोई सजा नहीं, सिर्फ प्रक्रिया का हिस्सा
कोर्ट ने साफ किया कि 15% लागत कोई दंड नहीं है, बल्कि एक दिशानिर्देश है—जिसे परिस्थितियों के अनुसार बदला जा सकता है।
समझौते के बाद जेल रखना गलत
हाईकोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता को कोई आपत्ति नहीं है और विवाद खत्म हो चुका है, तब आरोपी को जेल में रखना पूरी तरह अनुचित है।
हाईकोर्ट ने कहा कि:
इस मामले में अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि सिर्फ पैसे न देने पर जेल नहीं भेजा जा सकता, जब तक जानबूझकर भुगतान से बचने का सबूत न हो।
तुरंत रिहाई का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 15% लागत जमा करने की शर्त पूरी तरह खत्म कर दी और ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट रद्द करते हुए आरोपी की तुरंत रिहाई का आदेश दिया।