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राज्य पुलिस में Investigation Wing और Law & Order Wing अलग-अलग बनाने के आदेश-राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

1 FIR, 20+ Officers, 11 Years Delay: Rajasthan High Court Slams Police, Orders Separate Investigation Wing

एक FIR, 20+ जांच अधिकारी, 11 साल की देरी,पुलिस ने कहा-होली, ईद, IPL और VIP ड्यूटी में थी व्यस्त

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजधानी जयपुर के प्रतापनगर पुलिस थाने के एक ऐसे मामले में ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है, जिसने पूरे पुलिस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक FIR… 20 से अधिक जांच अधिकारी… और 11 साल बाद भी चार्जशीट नहीं—यह सुनकर खुद कोर्ट भी हैरान रह गया।

कोर्ट ने साफ कहा-“यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर करने वाला मामला है।”

राज्य में पुलिस जांच में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस सुधार का बड़ा आदेश दिया हैंं.

हाईकोर्ट ने राज्य में जांच (Investigation Wing) और कानून-व्यवस्था (Law & Order Wing) विंग को अलग अलग कर इस सुधार को संपूर्ण प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू करने के आदेश दिए हैं.

जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह रिपोर्टेबल जजमेंट याचिकाकर्ता जितेन्द्र मीणा और Shilpacharya Vishwakarma Grah Nirman Sahkari Samiti की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ​दिया हैं.

2014 का केस, 2026 तक भी अधूरा

मामला जयपुर के प्रताप नगर थाना क्षेत्र में 2014 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है।

इस एफआईआर में आरोप थे—कीमती जमीन के दस्तावेजों में जालसाजी, फर्जी पट्टे तैयार करना और सहकारी समिति की जमीन पर अवैध कब्जे की साजिश।

इस केस में IPC की गंभीर धाराएं—420, 467, 468, 471, 474 और 120-B लगाई गईं।

11 साल… 20 अधिकारी… फिर भी ‘जांच जारी’

राजस्थान हाईकोर्ट में पीड़ित और प्रतिवादी दोनो की ओर से दायर दो अलग अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे—

अदालत को बताया गया कि वर्ष 2014 में दर्ज हुई FIR में 11 साल बाद 2026 में आज दिन तक तक जांच अधूरी हैं.

कोर्ट को बताया गया कि इस एक मामले की अब तक 20 से ज्यादा पुलिस अधिकारी जांच कर चुके है.

इस मामले में कई बार कोर्ट ने समय सीमा तय की और हर बार “जांच पूरी होने वाली है” कहा गया. लेकिन… चार्जशीट एक बार भी दाखिल नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा

“यह एक अनोखा मामला है, जहां एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच लंबित है।”

हाईकोर्ट ने वर्तमान जांच अधिकारी से पूछा कि मुकदमें में इतने गंभीर आरोपों के बावजूद 11 साल तक चार्जशीट क्यों नहीं?

जांच अधिकारी का चौंकाने वाला जवाब

जब कोर्ट ने देरी का कारण पूछा, तो जांच अधिकारी ने जो जवाब दिया, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी

जांच अधिकारी ने कहा कि वो

“विधानसभा सत्र, होली, ईद, महाशिवरात्रि, IPL मैच, VIP ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त था…”

कोर्ट की सख्त फटकार

जांच अधिकारी के इस जवाब को संतोषजनक नही होना बताते हुए हाईकोर्ट पुलिस को फटकार लगाई.

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के आदेशों की बार-बार अनदेखी की गई है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR में संज्ञेय अपराध बनता है, इसलिए इसे रद्द नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि धारा 482 CrPC के तहत कोर्ट जांच की सत्यता की जांच नहीं करेगा

क्या पुलिस सिस्टम फेल हो गया है?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जांच में देरी से न्याय प्रभावित होता है, आरोपी और पीड़ित दोनों के अधिकारों का हनन होता है और पुलिस की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है.

कोर्ट ने कहा कि “ऐसी स्थिति में न्याय व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कमजोर होता है।”

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पुलिस सुधार जरूरी

हाईकोर्ट ने इस केस को राज्य की पुलिस की सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की खामी मानते हुए बड़ा फैसला दिया.

कोर्ट ने कहा एक ही अधिकारी से कानून-व्यवस्था और जांच दोनों काम करवाना गलत है और इससे न सिर्फ देरी होती है, बल्कि जांच की गुणवत्ता भी गिरती है

राज्य सरकार को सीधे आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि

राज्य में जांच विंग (Investigation Wing) और कानून-व्यवस्था (Law & Order Wing) को अलग किया जाए.

इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाए जिसमें पहले बड़े शहरों में, फिर छोटे शहरों में विस्तार करते हुए दोनों विंग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 2006 के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह केस का भी जिक्र किया।

इस फैसले में पहले ही पुलिस सुधारों की बात कही गई थी, लेकिन 20 साल बाद भी उसका पूरा पालन नहीं हुआ

साथ ही, गृह मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा अलग जांच विंग से विशेषज्ञता बढ़ेगी, दोषियों को सजा दिलाने में तेजी आएगी -पुलिस की जवाबदेही मजबूत होगी.

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