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जेल में नहीं होगा प्रसव-36 हफ्ते की गर्भवती आरोपी महिला को 3 महीने की अंतरिम जमानत: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा और मानवीय फैसला

“Rajasthan High Court Grants Interim Bail to 34-Week Pregnant Woman, Says Childbirth Should Not Occur in Jail”

जयपुर,। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 34–36 सप्ताह की गर्भवती आरोपी महिला को तीन माह की अंतरिम जमानत दी है।

हाईकोर्ट ने आरोपी महिला को जमानत देते हुए साफ कहा – “जहां तक संभव हो, प्रसव जेल के बाहर होना चाहिए।”

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने आरोपी महिला को जमानत देते हुए कहा कि “मां और बच्चे की गरिमा सर्वोपरि” हैं और गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव का अधिकार है.

कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा से जुड़ा है जेल में प्रसव महिला और नवजात दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले R.D. Upadhyay बनाम राज्य आंध्र प्रदेश (2007) का हवाला देते हुए कहा कि “प्रसव को यथासंभव जेल के बाहर कराया जाना चाहिए।”

ये हैं मामला

अलवर निवासी 27 वर्षिय आरोपी महिला के खिलाफ थाना अरावली विहार में BNS की धारा 108, 308(4), 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था.

गिरफतारी के बाद आरोपी महिला को अलवर केन्द्रीय जेल में भेजा गया था.

आरोपी महिला की ओर से दाखिल दूसरी जमानत याचिका में बताया गया कि अब वह गर्भावस्था के अंतिम चरण (तीसरी तिमाही) में हैं, जो पहले जमानत आवेदन के समय नहीं थी।

मेडिकल रिपोर्ट ने बदला केस

अधिवक्ता अविनाश चौधरी ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि 10 मार्च 2026 की सोनोग्राफी रिपोर्ट में गर्भ की उम्र करीब 33 सप्ताह 3 दिन पाई गई ​और गर्भ में एक स्वस्थ शिशु मौजूद हैं.

अधिवक्ता ने कहा कि नियमित एंटीनेटल केयर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी जरूरी हैं.

याचिका में यह भी कहा गया कि जेल में इस स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे मां और बच्चे दोनों को खतरा हो सकता है।

जेल नवजात के लिए नहीं

“जेल का वातावरण प्रसव और नवजात देखभाल के लिए उपयुक्त नहीं है।

एक अजन्मे बच्चे को सजा जैसी परिस्थितियों में जन्म लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।”

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि गर्भवती महिला को मानसिक और शारीरिक शांति जरूरी है जेल में जन्म लेने वाले बच्चों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है

जमानत की शर्तें

राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी महिला को अंतरिम जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं.

हाईकोर्ट ने 3 महीने की जमानत देते हुए 26 जून 2026 तक हर हाल सरेंडर करना अनिवार्य होगा.

याचिकाकर्ता महिला किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग देगी.

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