नई दिल्ली/जयपुर, 3 अप्रैल 2026। राजस्थान उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को दी गई राहत पर सख्ती से रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 के अपने ही आदेश में संशोधन करते हुए साफ कर दिया कि अब इस राहत का लाभ सभी ओवरएज अभ्यर्थियों को नहीं मिलेगा।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की विशेष अवकाश पीठ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की दलीलों को स्वीकार करते हुए राहत का दायरा बेहद सीमित कर दिया है। अब केवल सूरज मल मीणा और आरपीएससी द्वारा पहले से एडमिट कार्ड जारी किए गए 713 अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
अवकाश के दिन विशेष सुनवाई
गुड फ्राइडे के अवकाश के बावजूद राजस्थान सरकार और आरपीएससी की ओर से दायर कि गयी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की विशेष अवकाश पीठ का गठन किया गया.
शुक्रवार दोपहर 2 बजे से इस विशेष पीठ ने सुनवाई की जिसमे राजस्थान सरकार ओर आरपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा से दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले से 2 लाख 21 से अधिक अभ्यर्थी को शामिल करने मुश्किल है।.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि नियमों को दरकिनार कर किसी भी अभ्यर्थी को राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, आदेश में बड़ा बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 02.04.2026 के आदेश की जो व्यापक व्याख्या की जा रही थी, वह गलत है। अदालत ने कहा कि यह आदेश सभी समान परिस्थितियों वाले ओवरएज अभ्यर्थियों पर स्वतः लागू नहीं होगा।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि : राहत केवल उन्हीं को मिलेगी जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, अन्य ओवरएज अभ्यर्थी इस आदेश का लाभ नहीं ले सकेंगे
यह टिप्पणी सीधे तौर पर हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर ब्रेक लगाने वाली है।
713 अभ्यर्थियों को ही मिलेगी एंट्री
आरपीएससी ने कोर्ट को बताया कि उसने पहले ही लगभग 713 ओवरएज अभ्यर्थियों को, जो हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता थे और सूरज मल मीणा श्रेणी में आते हैं, एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि:
इन 713 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने दिया जाएगा, इनके अलावा किसी नए ओवरएज अभ्यर्थी को अनुमति नहीं मिलेगी, परीक्षा 5-6 अप्रैल को ही, शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं
कोर्ट ने प्रशासनिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि परीक्षा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार 5 और 6 अप्रैल 2026 को ही होगी, किसी भी स्थिति में परीक्षा तिथि या व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाएगा
यह आदेश उन लाखों उम्मीदवारों के लिए राहत भरा है जो परीक्षा टलने की आशंका में थे।
7.7 लाख अभ्यर्थियों का हवाला, सिस्टम पर दबाव
आरपीएससी ने कोर्ट के सामने गंभीर प्रशासनिक चुनौतियों को रखते हुए कहा कि इस भर्ती में पहले से ही 7.7 लाख अभ्यर्थी शामिल हैं और परीक्षा 41 शहरों के 1173 केंद्रों पर आयोजित हो रही है
आरपीएससी ने कहा कि अंतिम समय पर बड़े पैमाने पर नए अभ्यर्थियों को जोड़ना सुरक्षा और संचालन दोनों के लिए जोखिम है
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि ओवरएज अभ्यर्थियों को बिना सीमा के अनुमति दी गई, तो पूरी परीक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है।
2.21 लाख अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठा
सुनवाई में यह भी सामने आया कि 2021 भर्ती के 2.21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने इस बार आवेदन ही नहीं किया है।
ऐसे में अब उन्हें शामिल करने की अनुमति देना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करेगा
और पूरी चयन प्रणाली को बाधित कर सकता है.कोर्ट ने इस तर्क को भी गंभीरता से स्वीकार किया।
कोर्ट ने संतुलन बनाया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दो अहम पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि केवल परीक्षा में बैठने से किसी को कोई विशेष अधिकार (equity) नहीं मिलेगा और ऐसे अभ्यर्थियों का परिणाम अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।
कौन-कौन रहा कोर्ट में मौजूद?
RPSC की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा, राजेश चौहान
सूरज मल मीणा की ओर से: अधिवक्ता निखिलेश रामचंद्रन और हरेन्द्र नील
क्या है फैसले का असर?
हजारों ओवरएज अभ्यर्थी अब परीक्षा से बाहर
केवल 713 + सूरज मल मीणा को राहत
परीक्षा बिना रुकावट तय समय पर
भविष्य में भर्ती नियमों पर और सख्ती के संकेत