राजस्थान हाईकोर्ट ने चयनित डॉक्टरों के पद सुरक्षित रखने के भी दिए आदेश
जोधपुर, 2 अप्रैल 2026। राजस्थान हाईकोर्ट ने सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में चयनित डॉक्टरों को राहत देते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि चयनित याचिकाकर्ता डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से रिलीव किया जाए ताकि वे अपने-अपने मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंसी कोर्स जॉइन कर सकें।
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पदों पर इन डॉक्टरों का चयन हुआ है, उनके लिए सुरक्षित रखा जाए।
यह आदेश जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने डॉ. प्रह्लाद कच्छवाहा व 11 अन्य डॉक्टरों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है।.
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता 12 डॉक्टरों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उन्होंने इन-सर्विस उम्मीदवार के रूप में पीजी कोर्स पूरा करने के बाद सीनियर रेजिडेंसी के लिए आवेदन किया था और उन्हें चयनित भी किया गया।
लेकिन राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें उनके वर्तमान पद से रिलीव नहीं किया, जिससे वे समय पर सीनियर रेजिडेंसी जॉइन नहीं कर पा रहे थे।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि एक तरफ सरकार उन्हें रिलीव नहीं कर रही है, वहीं दूसरी ओर उनके लिए आवंटित सीटों को काउंसलिंग के अगले चरण में फिर से दिखाया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इसी तरह के मामले में पहले भी अंतरिम राहत दी जा चुकी है और समानता बनाए रखने के लिए इस मामले में भी वही दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने माना कि चयनित उम्मीदवारों को उच्च शिक्षा और करियर उन्नति का अधिकार है। केवल प्रशासनिक असुविधा या डॉक्टरों की कमी का हवाला देकर उन्हें रोका नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि :
उच्च शिक्षा प्राप्त डॉक्टर भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करेंगे।
सरकार को आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों को तुरंत रिलीव किया जाए।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को संबंधित मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंसी जॉइन करने की अनुमति दी जाए।
साथ ही सभी याचिकाकर्ता के के लिए आवंटित पद खाली रखने और किसी अन्य को आवंटित न करने का आदेश दिया हैं.
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था इस शर्त पर लागू होगी कि जॉइनिंग की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए या विभाग इसकी अनुमति दे।