जयपुर। पारिवारिक न्यायालय के निर्माण में हो रही देरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पी.एस. भाटी ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि पारिवारिक न्यायालय का निर्माण कार्य अति शीघ्र पूरा किया जाए और इसमें आ रही सभी बाधाओं को तुरंत हटाया जाए।
यह अहम निर्देश उस समय सामने आया जब पारिवारिक न्यायालय के संयोजक एडवोकेट पूनम चंद भंडारी, अध्यक्ष डी.एस. शेखावत और महासचिव पंकज अरोड़ा ने जस्टिस भाटी से मुलाकात कर निर्माण कार्य की जमीनी हकीकत सामने रखी।
सुविधाओं का अभाव, वादकारियों और वकीलों में नाराजगी
प्रतिनिधिमंडल ने जस्टिस पी एस भाटी से मुलाकात कर जानकारी देते हुए बताया कि जयपुर पारिवारिक न्यायालय में पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे रोजाना आने वाले वादकारियों और अधिवक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पर जस्टिस भाटी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को फौरन व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
अवैध निर्माण बना सबसे बड़ी बाधा
जस्टिस पी एस भाटी को बताया गया कि निर्माण कार्य में सबसे बड़ी रुकावट के रूप में एक अवैध कमरे का मुद्दा उठाया गया, जो बाउंड्री वॉल के निर्माण में बाधा बना हुआ है।
इस पर जस्टिस भाटी ने सख्ती दिखाते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और कहा कि अवरोधों को बिना देरी हटाया जाए। उन्होंने खुद भी जल्द साइट का निरीक्षण करने का भरोसा दिया।
वकीलों के चैंबर नहीं
बैठक में एक और गंभीर मुद्दा पर ध्यान दिलाया गया कि नए न्यायालय भवनों में वकीलों के लिए चैंबर का अभाव। एडवोकेट भंडारी ने जयपुर के शाहपुरा में बने नए कोर्ट भवन का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां न्यायालय और अधिकारियों के आवास तो तैयार हैं, लेकिन वकीलों के बैठने के लिए चैंबर तक नहीं बनाए गए।
इस पर जस्टिस भाटी ने साफ कहा “न्यायालय भवन के साथ वकीलों के चैंबर का निर्माण भी उतना ही जरूरी है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”