जयपुर। राजस्थान पुलिस की बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर आखिरकार राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा और निर्णायक फैसला सुना दिया है।
कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए भर्ती को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद हजारों चयनित अभ्यर्थियों के करियर पर संकट खड़ा हो गया है, वहीं लाखों उम्मीदवारों के लिए यह फैसला राहत के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने खंडपीठ ने एसआई भर्ती 2021 को एकलपीठ द्वारा रद्द करने के फैसले पर मुहर लगा दी हैंइसके साथ ही पिछले दो साल से राजस्थान में इस भर्ती को लेकर चल रहे विवाद का समापन हो गया हैं.
यह भर्ती शुरू से ही विवादों में रही और अब न्यायालय ने साफ कर दिया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं होगी, तो पूरी प्रक्रिया को निरस्त करना ही उचित होगा।
क्या कहा हाईकोर्ट ने
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि
- भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं
- पेपर लीक और डमी कैंडिडेट जैसे मामलों ने चयन की विश्वसनीयता खत्म कर दी
- ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया को जारी रखना न्यायसंगत नहीं होगा
कोर्ट ने यह भी माना कि चयन प्रक्रिया का आधार ही प्रभावित हो चुका है, इसलिए आंशिक सुधार संभव नहीं है।
भर्ती की पूरी पृष्ठभूमि
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित इस भर्ती में कुल 859 पद शामिल थे करीब 7.97 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया लगभग 3.80 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए
लिखित परीक्षा 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित की गई थी। इसके बाद फिजिकल टेस्ट फरवरी 2022 में हुआ
- इंटरव्यू प्रक्रिया 2023 तक चली
- और 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया
लेकिन इसी बीच भर्ती में गड़बड़ियों के आरोप लगने शुरू हो गए।
कैसे सामने आया घोटाला
भर्ती प्रक्रिया के दौरान और बाद में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए पेपर लीक होने के सबूत सामने आए, डमी कैंडिडेट बैठाने के आरोप लगे, कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने की बात सामने आई
राजस्थान पुलिस की SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने जांच में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया। जांच में यह भी सामने आया कि यह एक संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया अपराध था।
कोर्ट में कैसे चला पूरा घटनाक्रम
📅 2024
- भर्ती रद्द करने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर हुईं
- कैबिनेट सब-कमेटी ने भी भर्ती रद्द करने की सिफारिश की
📅 जनवरी 2025
- हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई
- ट्रेनिंग पर भी स्टे दे दिया गया
📅 जून 2025
- सरकार ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की
📅 जुलाई 2025
- सरकार ने कहा कि भर्ती रद्द नहीं करेंगे
📅 अगस्त 2025
- 28 अगस्त 2025 एकलपीठ ने भर्ती को रद्द किया
📅 अब (फाइनल फैसला)
- डिवीजन बेंच ने भर्ती रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था पूरी भर्ती को रद्द करना उचित नहीं है, गड़बड़ी केवल कुछ अभ्यर्थियों तक ,सीमित थी ,दोषियों को अलग से सजा दी जा सकती है
सरकार का तर्क था कि हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों को इस कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
वहीं याचिकाकर्ताओं ने जोर देकर कहा—
- पेपर लीक से पूरी परीक्षा की निष्पक्षता खत्म हो गई
- चयन प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हुई
- ऐसे में केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है
उन्होंने मांग की कि पूरी भर्ती को रद्द कर नई परीक्षा कराई जाए।
क्यों रद्द करनी पड़ी पूरी भर्ती
कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार रहा— भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म होना
मेरिट सिस्टम का प्रभावित होना, बड़े स्तर पर संगठित गड़बड़ी
कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी स्थिति में “आंशिक सुधार” संभव नहीं है।
अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा
इस फैसले का असर दो तरह से देखने को मिल रहा है—
चयनित अभ्यर्थी
- जिनका चयन हो चुका था, उनकी नौकरी चली गई
- कई उम्मीदवार ट्रेनिंग तक पहुंच चुके थे
अन्य अभ्यर्थी
- जिन्हें पहले मौका नहीं मिला था, उन्हें राहत
- नई भर्ती में फिर से मौका मिलेगा
अब आगे क्या होगा
इस फैसले के बाद संभावित स्थिति—
- राज्य सरकार नई SI भर्ती निकाल सकती है
- पुराने अभ्यर्थियों को age relaxation मिल सकता है
- मामला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया जा सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आगे कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।
युवाओं के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला सिर्फ एक भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए संदेश है—
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है” यदि कहीं भी गड़बड़ी होती है, तो पूरी प्रक्रिया रद्द हो सकती है।
