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जयपुर हिट एंड रन कांड: मुख्य आरोपी दिनेश रणवा को मिली हाईकोर्ट से जमानत, ऑडी ने 30 मीटर तक मचाया था कहर, 16 लोग कुचले-1 की हुई थी मौत, सीएम ने भी जताया था दु:ख

Jaipur Hit-and-Run Horror: Speeding Audi Mows Down 16 People, 1 Dead, 4 Critical; Accused Gets Bail from High Court
पुलिस साबित नहीं कर पायी मुख्य आरोपी दिनेश रणवा गाड़ी चला रहा था,

जयपुर। राजधानी जयपुर के चर्चित हाईस्पीड ऑडी कार हिट एंड रन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनाते हुए मुख्य आरोपी दिनेश रणवा को जमानत दे दी है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुए दिल दहला देने वाले हाईस्पीड हिट एंड रन केस ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था.

तेज रफ्तार ऑडी कार ने सड़क किनारे खड़े लोगों, ठेलों और दुकानों को कुचलते हुए करीब 30 मीटर तक मौत का तांडव मचाया, जिसमें 16 लोग चपेट में आए, 1 की मौत हो गई थी.

इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और अधिकारियों को घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे.

यहां तक कि उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने जयपुरिया अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए थे.

इस सनसनीखेज मामले में अब एक नया मोड़ तब आया, जब राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी दिनेश रणवा को जमानत दे दी, जिससे कानूनी और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस छिड़ गई है।

खौफनाक सच जो कोर्ट में नही हुआ साबित

यह खौफनाक हादसा 9 जनवरी 2026 की रात जयपुर के पत्रकार कॉलोनी थाना क्षेत्र के खाराबास सर्किल के पास हुआ था

मीडिया में दिखाए प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज रफ्तार ऑडी पहले डिवाइडर से टकराई और इसके बाद चालक का नियंत्रण बिगड़ गया. और कार करीब 30 मीटर तक ठेलों, खाने-पीने की दुकानों और राहगीरों को रौंदती चली गई

उस समय ठेले पर 10 से 15 लोग खाना खा रहे थे, जो सीधे कार की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ठेलों के परखच्चे उड़ गए और इलाके में चीख-पुकार मच गई थी.

घटना के बाद पुलिस और लोगो ने कार की स्पीड करीब 150 किमी प्रति घंटा होने का दावा किया गया था

लेकिन जयपुर पुलिस यही बात राजस्थान हाईकोर्ट में साबित नहीं कर पायी और नाह ही यह तथ्य साबित कर पायी कि वाहन मुख्य आरोपी दिनेश रणवा चला रहा था.

मजदूर की हुई थी मौत

इस मामले में भीलवाड़ा निवासी मजदूर रमेश बैरवा की मौत हुई थी और इसके साथ ही 16 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिन्हें SMS अस्पताल रेफर किया गया

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने कार में चार लोग सवार होने और सभी के नशे में होने की आशंका जताई थी और मौके से दो अंग्रेजी शराब की बोतलें मिलने का दावा किया गया था.

गुस्साई भीड़ ने पीटा था चालक को

इस घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों कने भीड़ ने ऑडी चालक और अन्य सवारों की जमकर पिटाई की थी जिसके चलते चालक को गंभीर चोटें आईं
हालांकि कार के एयरबैग खुलने से अंदर बैठे लोग बच गए

यह भी दावा किया गया था कि कार DD02 G 5709 एक ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड है जिसका पहले भी 183 किमी/घंटा की स्पीड पर चालान कट चुका था और कार के इंश्योरेंस जून 2025 से एक्सपायर होने की बाते भी सामने आयी थी.

केस की टाइमलाइन

यह मामला जयपुर के पत्रकार कॉलोनी थाना क्षेत्र का है, जहां 9 जनवरी 2026 को एक तेज रफ्तार ऑडी कार ने भीषण हादसा कर दिया था। इस हादसे में 1 व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए, जिनमें कई गंभीर रूप से जख्मी थे।

इस मामले में पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करते हुए आरोपी दिनेश रणवा को 18 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था, जिसे कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

09 जनवरी 2026 – हादसा हुआ
10 जनवरी 2026 – FIR दर्ज
18 जनवरी 2026 – आरोपी गिरफ्तार
27 जनवरी 2026 – निचली अदालत से जमानत खारिज
10 अप्रैल 2026 – हाईकोर्ट से जमानत मंजूर

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाईं, जिनमें शामिल हैं:

धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), धारा 115(2), धारा 238, धारा 249 और धारा 3(5) में मामला दर्ज किया था। इसके अलावा प्रारंभिक स्तर पर धारा 281 और 110 भी जोड़ी गई थीं।

आरोपी की दलीलें

मामले में आरोपी दिनेश रणवा की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सक्सेना ने पैरवी करते हुए दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी को इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

अधिवक्ता ने मुख्य दलील दी कि इस मामले में पुलिस यह तय नहीं कर पाई है कि वाहन दिनेश के द्वारा ही चलाया जा रहा था।

जबकि उस गाड़ी के अंदर चार लोगों के होने की बात कही गई है।

अधिवक्ता ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि हादसे के समय गाड़ी वही चला रहा था और कोई CCTV फुटेज या टेस्ट पहचान परेड (TIP) नहीं करवाई गई।

अधिवक्ता ने कहा कि केवल सह-आरोपियों के बयान पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

अधिवक्ता ने कहा कि अब पुलिस इस मामले में कार की स्पीड तक की जानकारी नहीं जुटा पाई है।

और ना ही यह साबित हो पाया है कि दिनेश रणवा नशे में था या नहीं।

अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल लंबा चलेगा।

बचाव पक्ष ने पूर्व के एक फैसले Sidharth Mehria vs State of Rajasthan (2016) का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में जमानत दी जा चुकी है।

सरकार का विरोध

जमानत याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि आरोपी याचिकाकर्ता ही वाहन का वास्तविक चालक था और गाड़ी उसके कब्जे में थी।

सरकार ने कहा कि हादसे के बाद आरोपी 10 दिन तक फरार रहा और मौके पर पकड़े गए सह-आरोपियों ने सीधे तौर पर उसका नाम लिया।

सरकार ने यह भी कहा कि जांच में वाहन के दस्तावेज (Form 28, 29, 35, बैंक NOC) आरोपी के नाम पर पाए गए और गवाहों के बयान बताते हैं कि कार बेहद तेज गति से चलाई जा रही थी।

सरकार की मुख्य दलील थी कि वाहन दिनेश रणवा द्वारा ही चलाया जा रहा था। इस मामले में 1 की मौत और 14 घायल हुए हैं, ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने किन आधारों पर जमानत दी?

जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महत्वपूर्ण टिप्पणियां करते हुए आरोपी को जमानत दे दी है।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी 18 जनवरी 2026 से जेल में है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है तथा साक्ष्य विस्तृत हैं।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में काफी समय लगने की संभावना है और आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत देना उचित है।

आरोपी की भूमिका पर विवाद

हाईकोर्ट ने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न कि हादसे के समय वाहन कौन चला रहा था, इस पर कहा कि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। न तो CCTV फुटेज और न ही टेस्ट पहचान परेड (TIP) करवाई गई, और आरोपी को केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर जोड़ा गया।

हाईकोर्ट ने इन तर्कों को रिकॉर्ड पर लेते हुए माना कि इस बिंदु पर साक्ष्य का अंतिम निष्कर्ष ट्रायल के दौरान ही निकलेगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी 18 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है तथा ट्रायल के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि लंबे समय तक विचाराधीन कैदी को जेल में रखना उचित नहीं है, खासकर जब ट्रायल में देरी संभावित हो।

आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना भी जमानत देने के पक्ष में गया, क्योंकि कानून में प्रथम बार आरोपी होने पर राहत का सिद्धांत लागू होता है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “बिना मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई राय व्यक्त किए कोर्ट जमानत दे रहा है।”

सशर्त जमानत

हाईकोर्ट ने आरोपी दिनेश रणवा को सशर्त जमानत देते हुए जमानत याचिका स्वीकार की है।

हाईकोर्ट ने आरोपी को ₹50,000 के निजी मुचलके और ₹25,000 के दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया है और आरोपी को हर सुनवाई पर उपस्थित रहने की भी शर्त रखी है।

बड़ा सवाल: क्या न्याय या राहत?

राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद जमानत सही है? क्या हाईस्पीड ड्राइविंग से होने वाले हादसों पर कानून सख्त है? क्या सबूतों की कमजोरी ने आरोपी को राहत दिलाई?

इस मामले में सरकार के विरोध के बावजूद अभियोजन पर सवाल खड़े होते हैं कि बेहद गंभीर मामले में भी आरोपी की दलीलों का प्रभावी तरीके से विरोध नहीं किया जा सका।

घटना के बाद मीडिया में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पुलिस अधिकारियों के दावे के उलट हाईकोर्ट में अभियोजन यह साबित नही कर पाया कि वाहन मुख्य आरोपी दिनेश रणवा चला रहा था.

यहां तक शराब की बोतले मिलने की बात कही गयी लेकिन कोर्ट में यह भी साबित नही हुआ कि दिनेश रणवा नशे में था.

यह भी कि अभियोजन यह साबित करने में कमजोर साबित हुआ कि कार की स्पीड क्या थी.

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