विवेक शर्मा
जयपुर। आज राजस्थान के हर शहर में – चाहे जयपुर हो, जोधपुर हो, कोटा हो, उदयपुर हो या बीकानेर – आवारा कुत्तों का खतरा एक बड़ी समस्या बन चुका है।
सरकारी आँकड़े बताते हैं कि सिर्फ 2024 में पूरे भारत में 37,17,336 लोगों को कुत्तों ने काटा – यानी हर दिन 10,000 से ज्यादा घटनाएं। WHO के अनुसार दुनिया में रेबीज से होने वाली हर 100 मौतों में से 36 भारत में होती हैं, और इनमें से 30 से 60 प्रतिशत पीड़ित 15 साल से छोटे बच्चे होते हैं।
दिल्ली के RML अस्पताल के डॉ. देबाशीष परमार कहते हैं कि उनके यहाँ आने वाले 90-95 प्रतिशत मरीज गंभीर घाव (Category III) लेकर आते हैं।
अच्छी बात यह है कि कानून आपके साथ है। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट ने 2025-26 में इस मुद्दे पर कई बड़े फैसले दिए हैं।
पालतू कुत्ता या आवारा – फर्क क्यों पड़ता है?
पालतू कुत्ते ने काटा: तो सीधी जिम्मेदारी मालिक की है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 291 के तहत मालिक को 6 महीने की जेल और ₹5,000 तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही आप सिविल कोर्ट में इलाज का खर्च और मानसिक पीड़ा का मुआवजा भी मांग सकते हैं।
आवारा कुत्ते ने काटा: तो जिम्मेदारी नगर पालिका, नगर निगम या ग्राम पंचायत की है। सार्वजनिक जगहों पर नागरिकों की सुरक्षा करना उनका संवैधानिक फर्ज है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो राज्य लापरवाही बरतेंगे उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के चार बड़े फैसले:
28 जुलाई 2025: टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में दिल्ली की 6 साल की बच्ची की रेबीज से मौत का जिक्र था। न्यायमूर्ति पर्डीवाला और न्यायमूर्ति महादेवन की पीठ ने इस पर खुद संज्ञान लेते हुए SMW(C) No. 5/2025 दर्ज किया।
11 अगस्त 2025: उसी पीठ ने आदेश दिया कि दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) के सभी आवारा कुत्तों को तुरंत आश्रयों में भेजा जाए और वापस सड़क पर न छोड़ा जाए।
22 अगस्त 2025: पशु अधिकार संगठनों की आपत्ति के बाद न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन-जजों की पीठ ने पिछले आदेश को संशोधित किया। नया आदेश था — कुत्तों को पकड़ो, नसबंदी और टीका लगाओ, और उसी इलाके में छोड़ो। लेकिन रेबीज से ग्रस्त या हिंसक कुत्तों को आश्रय में ही रखो। यह आदेश पूरे देश पर लागू हुआ और सभी राज्यों को 27 अक्टूबर 2025 तक रिपोर्ट देने को कहा गया। लेकिन 28 में से सिर्फ 2 राज्यों ने समय पर रिपोर्ट दी — जिस पर कोर्ट ने मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
7 नवम्बर 2025: इसी पीठ ने आदेश दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाना अनिवार्य है। रुकावट डालने पर FIR होगी। यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट के D.B. CWP No. 14726/2025 को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करते हुए दिया गया।
जनवरी 2026: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने बताया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज खुद आवारा जानवरों से हुई दुर्घटनाओं में घायल हुए – एक को रीढ़ में गंभीर चोट आई। राजस्थान सरकार ने बताया कि उनके 22 डॉग पाउंड हैं, जिनमें से 21 की क्षमता सिर्फ 100 कुत्तों की है। कोर्ट ने कहा — “जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में अकेले 20 से ज्यादा आश्रयों की जरूरत है।” 29 जनवरी 2026 को सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश- 11 अगस्त 2025
जस्टिस कुलदीप माथुर और जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर और दैनिक नवज्योति की रिपोर्टों पर D.B. Civil Writ Petition No. 14726/2025 में खुद संज्ञान लिया।
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के नगर निकायों को आदेश दिया गया कि सड़कों से आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से हटाएं, और बाधा डालने वालों पर FIR दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवम्बर 2025 को इसे पूरे देश में लागू किया।
खाना खिलाने वाले भी जिम्मेदार
22 अगस्त 2025 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर खुले में कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाई और हर वार्ड में तय फीडिंग जोन बनाने का निर्देश दिया। जनवरी 2026 में कोर्ट ने कहा कि जो लोग नियमित रूप से किसी कुत्ते को खाना खिलाते हैं, उन्हें भी काटने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। साफ बात — जानवरों से प्यार अच्छी बात है, लेकिन इसकी आड़ में दूसरों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती।
काटने के बाद ये पाँच काम करें:
कदम 1 – तुरंत इलाज: घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट धोएं। गहरे घाव (Category III) में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी लगवाएं। ARV सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलती है। ध्यान रहे — 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग पहली खुराक के बाद पूरा कोर्स नहीं लेते, जो जानलेवा हो सकता है।
कदम 2 – सबूत इकट्ठा करें: घटना की फोटो-वीडियो लें। अस्पताल के सभी कागजात और बिल संभालकर रखें। गवाहों के नाम और नंबर नोट करें।
कदम 3 – पालतू कुत्ते का मामला हो तो: नजदीकी थाने में BNS धारा 291 के तहत FIR दर्ज कराएं। मालिक से इलाज का पूरा खर्च मांगें। मना करे तो उपभोक्ता आयोग या सिविल कोर्ट जाएं।
कदम 4 – आवारा कुत्ते का मामला हो तो: नगर पालिका/नगर निगम को लिखित शिकायत दें और रसीद लें। जिला कलेक्टर को भी अर्जी दें। मुआवजे के लिए जिला उपभोक्ता आयोग या सिविल कोर्ट जाएं और SMW(C) No. 5/2025 के 2025-26 आदेशों का हवाला दें।
कदम 5 – खाना खिलाने वाले के खिलाफ: अगर पता हो कि कोई उस कुत्ते को नियमित रूप से खाना खिलाता था, तो उसे भी मुकदमे में पक्षकार बनाया जा सकता है।
अपना हक जानें, मांगें और पाएं
ज्यादातर पीड़ित सिर्फ इसलिए न्याय से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उन्हें अपने अधिकार पता नहीं होते। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के 2025-26 के फैसले नागरिकों के पक्ष में एक बड़ा बदलाव लेकर आए हैं। नगर निगम की लापरवाही हो, पालतू मालिक की बेपरवाही हो, या खाना खिलाने वाले की गैरजिम्मेदारी — हर किसी को अब जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
संविधान का अनुच्छेद 21 आपको जीने और सुरक्षित रहने का मौलिक अधिकार देता है। सार्वजनिक जगहों पर वह सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
चुप रहना आपकी कमजोरी बन जाती है – अपना हक जानें, मांगें और हासिल करें।

एडवोकेट विवेक शर्मा पूर्व में लगभग 10 वर्षों तक विधिक सेवा प्राधिकरण में कार्यरत रहे हैं। वे सक्रिय रूप से समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। अधिवक्ता के रूप में भी वे जनहित के मुद्दों पर मुखर रहते हैं