“शिक्षा, समानता और न्याय ही समाज की प्रगति का आधार”-जस्टिस इन्द्रजीत सिंह
जयपुर। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट के सतीशचन्द्र सभागार में विशेष जयंती समारोह का आयोजन किया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सतीशचन्द्र सभागार में आयोजित इस विशेष जयंती समारोह की शुरुआत वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस इन्द्रजीत सिंह द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
समारोह में जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल, महासचिव दीपेश शर्मा, अतिरिक्त महाधिवक्ता भरत व्यास सहित अनेक अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों ने डॉ. अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

वास्तविक प्रगति शिक्षा के बिना संभव नहीं
समारोह के मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि अंबेडकर का दृढ़ विश्वास था कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा के बिना संभव नहीं है। उनका प्रसिद्ध मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी प्रत्येक वर्ग को प्रेरित करता है।

उन्होंने आगे कहा कि संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत उनके दूरदर्शी विचारों का ही परिणाम हैं।
जस्टिस सिंह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का मानना था कि व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में भी उन्होंने विधिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
बार-बेंच के समन्वय से ही न्यायपालिका मजबूत
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने इस मौके पर अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करने वाले पेशेवर नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
बार और बेंच के समन्वय से ही न्यायपालिका मजबूत होती है। डॉ. अंबेडकर स्वयं एक प्रखर विधिवेत्ता थे, जिन्होंने वकालत की गरिमा और नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया।
जस्टिस सिंह ने अधिवक्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे न्याय को केवल तकनीकी प्रक्रिया न मानें, बल्कि इसे एक नैतिक कर्तव्य के रूप में निभाएं और संविधान के मूल सिद्धांतों— न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व— की रक्षा करें। एक सशक्त, अनुशासित और नैतिक बार ही निष्पक्ष और प्रभावी न्यायपालिका की आधारशिला रखता है।

हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत
समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म अत्यंत साधारण और निर्धन परिवार में हुआ, जहां बचपन से ही उन्होंने अनेक कठिनाइयों और भेदभाव का सामना किया।
इन सभी संघर्षों के बावजूद, उन्होंने देश के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य किया और समाज में समानता, न्याय और अधिकारों की स्थापना में ऐतिहासिक योगदान दिया। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
चिंतन का अवसर जयंती समारोह
समारोह को राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके आदर्शों—न्याय, समानता और मानव गरिमा—पर चिंतन का अवसर है। एक दूरदर्शी समाज सुधारक और भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में उन्होंने संविधान को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उनका मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र तभी सार्थक है जब समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता भी हो।

कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए उनका संदेश विशेष महत्व रखता है। अधिवक्ताओं का दायित्व केवल कानून की व्याख्या करना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना भी है। अंबेडकर ने “मन के विकास” को मानव जीवन का लक्ष्य बताया और संवैधानिक नैतिकता, निष्पक्षता व ईमानदारी पर जोर दिया।
आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों को व्यवहार में उतारें, अन्याय के विरुद्ध खड़े हों और संविधान के मूल्यों की रक्षा करें—यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

हाईकोर्ट जज रहे मौजूद
समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनुप कुमार ढंड, जस्टिस विनोद कुमार भारवानी, जस्टिस उमाशंकर व्यास, जस्टिस समीर जैन, जस्टिस शुभा मेहता, जस्टिस अशोक कुमार जैन, जस्टिस प्रवीर भटनागर, जस्टिस आशुतोष कुमार, जस्टिस प्रमिल माथुर, जस्टिस चन्द्रप्रकाश श्रीमाली, जस्टिस संदीप तनेजा, जस्टिस बिपिन गुप्ता, जस्टिस अनुरूप सिंघी एवं जस्टिस रवि चिरानिया सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने किया। समारोह के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
