नई दिल्ली। पेपर लीक घोटाले के आरोपी आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ कहा कि इस स्तर पर आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने शुरुआत में नोटिस जारी किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से किए गए कड़े विरोध और गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
सरकार ने कहा राज्य बेच देता
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने यह कहा कि यदि ऐसा व्यक्ति आरएएस जैसे जिम्मेदार पद पर नियुक्त हो जाता, तो वह “राज्य को बेच देता।”
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से एएसजी एस.डी. संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने तर्क दिया कि इस तरह के अपराध केवल व्यक्तिगत नहीं होते, बल्कि यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सीधा हमला हैं। ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी गलत संदेश दे सकती है।
सरकार की ओर से साफ कहा कि आरोपी का आचरण बेहद गंभीर है और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए। अदालत ने राज्य के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राहत देने से मना कर दिया।
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे कृत्य से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है।
अगर जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ही ऐसा करे तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है।
डमी अभ्यर्थी बना था आरोपी
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि जांच में सामने आया कि हनुमाना राम ने तीन अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए डमी उम्मीदवार बनकर परीक्षा दी थी। इसके अलावा, उसने अन्य कई भर्ती परीक्षाओं में भी प्रॉक्सी के रूप में हिस्सा लिया।
आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा, 2021 और पटवार भर्ती परीक्षा, 2021 में डमी अभ्यर्थी बना था।
मेधावी छात्र से आरोपी तक
हनुमाना राम को एक मेधावी अभ्यर्थी माना जाता रहा है। उसने आरएएस परीक्षा 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और इससे पहले एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक प्राप्त की थी।
हालांकि, जांच में सामने आए तथ्यों ने उसके इस रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की शैक्षणिक उपलब्धियां उसे कानून से ऊपर नहीं रख सकतीं।