जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल चुनाव 22 अप्रैल को होने जा रहे हैं, लेकिन मतदान से पहले ही जयपुर में एक मतदान केंद्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के मतदान बूथ संख्या-121 को कथित रूप से दी फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन परिसर में बने शौचालय में स्थापित किए जाने का मामला सामने आया है।
इस निर्णय पर अधिवक्ताओं और बार पदाधिकारियों ने कड़ा विरोध जताया है।
जानकारी के अनुसार, जिस स्थान को मतदान बूथ बनाया गया है, वह मूल रूप से कोर्ट आने वाले पक्षकारों, महिलाओं और आमजन की सुविधा के लिए निर्मित सार्वजनिक शौचालय बताया जा रहा है।
यही नहीं, इसे निर्माणाधीन न्यायालय भवन के मार्ग में अवरोधक भी माना जा रहा है। ऐसे में चुनावी बूथ बनाए जाने से व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
पहले भी उठ चुका है विवाद
दी फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले को पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष उठाया था।
बार पदाधिकारियों ने जस्टिस पी.एस. भाटी से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया था।
शिकायत में कहा गया था कि उक्त ढांचा न्यायालय परिसर की व्यवस्था में बाधा बन रहा है और इसे हटाया जाना चाहिए।
बताया जा रहा है कि इस शिकायत पर हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल को संबंधित ढांचे को हटाने के निर्देश भी दिए थे।
इसके बाद पारिवारिक न्यायालय के नोडल अधिकारी ने 8 अप्रैल को दी फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर दो दिन में शौचालय खाली करने के निर्देश दिए थे।

मेट्रो प्रशासन को भी लिखा गया पत्र
हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में 16 अप्रैल को फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जयपुर मेट्रो-1 डीजी/संबंधित अधिकारी को पत्र लिखकर शौचालय हटाने की मांग की गई थी।
बावजूद इसके, अब उसी स्थान को राजस्थान बार काउंसिल चुनाव के मतदान बूथ संख्या-121 के रूप में घोषित कर दिया गया है।
इस घटनाक्रम ने अधिवक्ताओं के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि जिस स्थान को हटाने के आदेश दिए गए थे, उसे चुनावी मतदान केंद्र कैसे बनाया गया।
बार पदाधिकारियों ने जताई नाराजगी
फैमिली कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.एस. शेखावत और महासचिव पंकज अरोड़ा सहित अन्य पदाधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल अनुचित है बल्कि न्यायालय परिसर की गरिमा और मतदाताओं की सुविधा के विपरीत भी है।
उनका कहना है कि मतदान केंद्र ऐसा होना चाहिए जहां अधिवक्ताओं और मतदाताओं को सम्मानजनक वातावरण मिले, लेकिन शौचालय को बूथ बनाए जाने से असहज स्थिति उत्पन्न होगी।
क्या 22 अप्रैल को यहीं होगा मतदान?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 22 अप्रैल को वास्तव में मतदान बूथ संख्या-121 पर वोटिंग इसी शौचालय परिसर में कराई जाएगी, या फिर चुनाव प्रबंधन समिति अंतिम समय में कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेगी।
राजस्थान बार काउंसिल चुनाव प्रदेश के अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आयोजन माना जाता है। ऐसे में मतदान केंद्रों को लेकर उठे इस विवाद ने चुनावी तैयारियों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अधिवक्ताओं में चर्चा तेज
इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर के विधिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कई अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो मतदान के दिन अव्यवस्था की स्थिति भी बन सकती है।
अब सभी की नजरें बार काउंसिल प्रशासन और चुनाव अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
