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जवाई में बिना अदालत की अनुमति निर्माण, खनन और नाइट सफारी पर रोक, इको-टूरिज्म के लिए सख्त SOP लागू: तेंदुओं की सुरक्षा पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त

Rajasthan High Court Cracks Down on Jawai Eco-Tourism: Bans Construction, Mining & Night Safari to Protect Leopards
हाईकोर्ट ने कहा “The earth does not belong to man; man belongs to the earth.”

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पाली जिले में जवाई क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित पर्यटन, अवैध निर्माण, खनन और वन्यजीवों के आवास में हस्तक्षेप को गंभीर खतरा मानते हुए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि संविधान के तहत नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले की शुरूआत एक महत्वपूर्ण विचार से करते हुए कहा कि “पृथ्वी मनुष्य की नहीं है; मनुष्य पृथ्वी का है।”

इस विचार को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक नीतिगत विषय नहीं, बल्कि जीवन के अस्तित्व की मूल शर्त है।

पर्यावरण संरक्षण जीवन के अधिकार का हिस्सा

जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह ने अपने फैसले में कहा कि “जीवन” का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि स्वच्छ, प्रदूषण रहित और संतुलित पर्यावरण में जीने का अधिकार भी शामिल है।

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत “जीवन” का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वच्छ, प्रदूषण रहित और संतुलित पर्यावरण में जीने का अधिकार भी शामिल है।

कोर्ट ने कहा कि तेंदुओं जैसे वन्यजीवों का अस्तित्व और जैव विविधता का संरक्षण सीधे तौर पर मानव जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

ऐसे में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन माना जाएगा।

जवाई क्षेत्र: मानव और वन्यजीवों का अनूठा सह-अस्तित्व

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जवाई क्षेत्र राजस्थान के पाली जिले में स्थित एक अनोखा पारिस्थितिक क्षेत्र है, जहां ग्रेनाइट की पहाड़ियां, प्राकृतिक गुफाएं और जल स्रोत तेंदुओं के लिए आदर्श आवास प्रदान करते हैं।

यह क्षेत्र लंबे समय से मानव और तेंदुओं के सह-अस्तित्व का उदाहरण रहा है, जहां स्थानीय समुदायों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बना हुआ था।

लेकिन हाल के वर्षों में अनियंत्रित इको-टूरिज्म, अवैध निर्माण और खनन गतिविधियों ने इस संतुलन को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

तेंदुओं की बढ़ती संख्या और खतरे

कोर्ट के अनुसार जवाई क्षेत्र में लगभग 50 से 70 तेंदुए पाए जाते हैं, जो देश में उच्च घनत्व वाले तेंदुआ आवासों में से एक है।

राष्ट्रीय स्तर पर भारत में लगभग 13,874 तेंदुए हैं, जिनमें से कई संरक्षित क्षेत्रों के बाहर रहते हैं, जिससे वे मानव हस्तक्षेप के अधिक खतरे में रहते हैं।

तेंदुआ (Panthera pardus) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “Vulnerable” श्रेणी में रखा गया है।

मुख्य समस्याएं: अनियंत्रित पर्यटन और निर्माण

राजस्थान हाईकोर्ट में पेश कि गयी रिपोर्ट में बताया गया कि जवाई क्षेत्र में कई गंभीर समस्याएं उभरकर सामने आई हैं:

बिना अनुमति के निर्माण और होटल/रिसॉर्ट
अनियंत्रित सफारी संचालन
नाइट सफारी और जानवरों को परेशान करना
अवैध खनन
बाड़बंदी (barbed wire fencing) से वन्यजीवों की आवाजाही बाधित
निजी जमीनों पर भी वन्यजीव आवास होने से नियंत्रण में कठिनाई

हाईकोर्ट के सख्त आदेश

निर्माण गतिविधियों पर पूर्णतया रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जवाई क्षेत्र में बिना अदालत की अनुमति कोई भी नया निर्माण नहीं होगा।

गांवों की आबादी क्षेत्र को छोड़कर अन्य जगहों पर निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

साथ ही, पहले से मौजूद पर्यटन इकाइयों की स्थिति यथावत रखी जाएगी और नए होटल/रिसॉर्ट की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तेंदुओं के आवास में हस्तक्षेप पर रोक

जहां भी तेंदुओं के आवास, गुफाएं या मूवमेंट कॉरिडोर हैं, वहां किसी भी प्रकार का बदलाव या भूमि उपयोग परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि जवाई क्षेत्र में सभी प्रकार की खनन गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद रहेंगी।

नाइट सफारी पर प्रतिबंध

पहले दिए गए अंतरिम आदेश को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने नाइट सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रखा है।

बाड़बंदी (फेंसिंग) पर रोक

कोर्ट ने आदेश दिया कि आगे से किसी भी प्रकार की कांटेदार तार (barbed wire fencing) नहीं लगाई जाएगी, क्योंकि इससे तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को चोट लगने का खतरा रहता है।

SOP (Standard Operating Procedure) लागू

वन विभाग द्वारा तैयार ड्राफ्ट SOP को कोर्ट ने तुरंत लागू करने का आदेश दिया है। इसमें शामिल हैं:

सफारी वाहनों का पंजीकरण, GPS आधारित मॉनिटरिंग, निश्चित मार्ग और समय, पर्यटकों के लिए आचार संहिता, वन्यजीवों के पास वाहन ले जाने पर रोक यह SOP पूरे जवाई क्षेत्र में लागू होगा—चाहे जमीन सरकारी हो या निजी।

समन्वय समिति का गठन

हाईकोर्ट ने “जवाई सफारी एवं इको-टूरिज्म समन्वय समिति” बनाने के आदेश दिए हैं जिसमें
वन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस, पर्यटन विभाग, परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे. यह समिति क्षेत्र में नियमों के पालन और निगरानी का कार्य करेगी।

क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने पर विचार

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 8 और 18 के तहत जवाई क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की संभावना पर विचार करे।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जवाई क्षेत्र से तेंदुओं का अस्तित्व समाप्त हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्यटन राज्य की पहचान हो सकता है, लेकिन इसके नाम पर पर्यावरण और वन्यजीवों की कीमत नहीं चुकाई जा सकती।

राज्य सरकार की स्थिति

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि वन विभाग लगातार पेट्रोलिंग कर रहा है ड्रोन और कैमरा ट्रैप से निगरानी हो रही है अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की जा रही है.

सरकार ने कहा कि SOP तैयार कर ली गयी हैं. हालांकि, निजी जमीनों पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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