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आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: अंतरिम जमानत 25 मई तक बढ़ी, सरकार का कड़ा विरोध खारिज

Asharam Parole Case: Rajasthan High Court Directs State to Comply with 20-Day Parole Order

जोधपुर। यौन उत्पीड़न के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम (Asaram Bapu) को फिलहाल 25 मई तक अंतरिम जमानत की राहत मिली गई हैं.

29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) से मिली 6 महीने की अंतरिम जमानत की मियाद आज 29 अप्रैल को समाप्त हो गई.

ऐसे में जेल वापसी के खतरे को देखते हुए आसाराम की ओर से जमानत अवधि को आगे बढ़ाने के लिए मंगलवार 28 अप्रैल को हाईकोर्ट में नया प्रार्थना पत्र पेश किया गया था.

जिस पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने अंतरिम राहत को अगले 25 मई तक या फिर मामले में अंतिम फैसला आने तक—जो भी पहले हो—तक बढ़ाने का आदेश दिया है।

आसाराम से जुड़े चर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है।

मेडिकल आधार पर मिली राहत

आसाराम को पहले भी स्वास्थ्य कारणों के चलते अंतरिम जमानत दी गई थी।

बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए अदालत ने मानवीय आधार पर यह राहत जारी रखी है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अंतिम फैसला आने तक स्थिति को यथावत रखा जाएगा, लेकिन यह पूरी तरह अस्थायी व्यवस्था है।

सरकार ने किया विरोध

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने जमानत बढ़ाने का कड़ा विरोध किया।

उन्होंने अदालत में दलील दी कि गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को लगातार राहत देना उचित नहीं है और इससे न्याय प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

बीमारी और इलाज का दिया गया हवाला

आसाराम के वकीलों ने अपने आवेदन में चल रहे मेडिकल इलाज का जिक्र किया है.

उनका तर्क है कि 86 वर्षीय आसाराम अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं और उनका इलाज जारी है, इसलिए उन्हें दी गई इस अंतरिम जमानत को और आगे बढ़ाया जाए.

क्यों मिली थी 6 महीने की मोहलत?

पिछले साल 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने आसाराम को यह बड़ी राहत दी थी.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत की दलीलों को सुनने के बाद, कोर्ट ने आसाराम की बढ़ती उम्र (86 वर्ष) और प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को आधार बनाते हुए इलाज के लिए 6 महीने की अंतरिम जमानत मंजूर की थी.

इससे पहले 7 अक्टूबर 2025 को तकनीकी कारणों से उन्हें राहत नहीं मिल पाई थी और प्राइवेट अस्पताल से वापस जोधपुर सेंट्रल जेल लौटना पड़ा था.

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