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जांच अधिकारी को साइबर क्राइम की जांच का तरीका तक नहीं पता, साइबर क्राइम के मामले में पुलिस पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

Rajasthan High Court Grants Bail in Cyber Fraud Case, Questions Police Investigation Standards
आरोपी को सख्त शर्तों के साथ मिली जमानत, पुलिस को सूचना दिए बिना नया सिम कार्ड, बैंक खाता या डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे

जयपुर, 15 जून। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने साइबर ठगी के एक मामले में दो आरोपियों को जमानत देते हुए राज्य की जांच एजेंसी यानी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार कोर्ट के आदेश के बावजूद जांच अधिकारी क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी से संबंधित स्पष्ट रिपोर्ट पेश नहीं कर सका।

हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद जांच अधिकारी मामले में रिपोर्ट पेश तक नहीं कर पा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि जांच अधिकारी को साइबर अपराधों की जांच करने का तरीका तक नहीं पता।

जस्टिस रवि चिरानिया ने डीग जिले के नगर थाना क्षेत्र निवासी साहिल और वाजिब की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

दोनों आरोपियों को साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे लंबे समय से जेल में बंद थे।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट भी पेश कर चुकी है।

आरोपियों के खिलाफ किसी अतिरिक्त बरामदगी की आवश्यकता नहीं है तथा मुकदमे के निस्तारण में काफी समय लग सकता है। ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया।

जांच अधिकारी पर टिप्पणी

हालांकि अदालत ने केस डायरी और जांच की प्रगति का अवलोकन करने के बाद जांच अधिकारी की भूमिका पर सख्त नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट ने जांच अधिकारी को दो बार विशेष रूप से निर्देश दिए थे कि मामले में उपयोग किए गए क्यूआर कोड और अन्य यूपीआई आईडी के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

इसके बावजूद कोई ठोस और विशिष्ट रिपोर्ट अदालत के समक्ष नहीं रखी गई।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि उपलब्ध रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि जांच अधिकारी को साइबर अपराधों की तकनीकी जांच की पर्याप्त समझ ही नहीं है।

सशर्त जमानत

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, वे लंबे समय से जेल में हैं और मुकदमे के निस्तारण में अभी काफी समय लग सकता है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देने का निर्णय लिया।

हालांकि जमानत के साथ हाईकोर्ट ने कई कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।

पुलिस को देनी होगी सूचना

आरोपियों को अपनी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, यूपीआई आईडी, डिजिटल वॉलेट और अन्य वित्तीय विवरणों की जानकारी जांच अधिकारी को देनी होगी।

इसके अलावा उन्हें अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पूरा ब्यौरा भी उपलब्ध कराना होगा।

हाईकोर्ट ने बिना सूचना नया सिम कार्ड, बैंक खाता या डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग करने पर भी रोक लगाई है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपियों ने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया या भविष्य में इसी प्रकार के किसी अन्य अपराध में संलिप्त पाए गए, तो उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है।

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