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बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग-हनीट्रैप केस : हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद जेल से बाहर निकलते ही युवती पर हमला, कारोबारी शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Honeytrap-Blackmail Case Takes Dramatic Turn: FIR Filed Against Businessman After Alleged Attack on Woman Released on Bail

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के कुछ घंटे बाद ही रास्ता रोककर हमले, तेजाब फिंकवाने की धमकी और सोने की चेन छीनने के आरोप

जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और कथित हनीट्रैप प्रकरण में उस समय नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया, जब राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा हुई आरोपी युवती पर कथित हमले का मामला सामने आया।

आरोप है कि जेल से बाहर निकलने के कुछ ही मिनट बाद उसका रास्ता रोका गया, हमला करने का प्रयास किया गया, तेजाब फिंकवाने की धमकी दी गई और गले से सोने की चेन तक छीन ली गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आदर्श नगर थाना पुलिस ने कारोबारी विमल डागा समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस घटनाक्रम ने पहले से चर्चा में चल रहे इस मामले को और अधिक रहस्यमय तथा संवेदनशील बना दिया है।

जेल से रिहाई और कुछ ही देर बाद विवाद

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार जोधपुर निवासी युवती के पिता ने बताया कि उनकी पुत्री को राजस्थान हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद 16 जून को जयपुर स्थित महिला कारागार से रिहा किया गया था।

शिकायत के मुताबिक शाम करीब 4:15 बजे वह अपनी पत्नी, पुत्र और बेटी को लेकर कार से महिला जेल परिसर से बाहर निकले ही थे कि जेल के सामने एक कार ने उनका रास्ता रोक लिया।

आरोप है कि कार में मौजूद कारोबारी विमल डागा और अन्य व्यक्तियों ने उन्हें घेर लिया और विवाद शुरू कर दिया।

परिवार का आरोप है कि इसी दौरान धारदार हथियार से हमला करने का प्रयास किया गया।

हमले से बचने के दौरान युवती के हाथ पर चोट लगी।

शिकायत में पिता की ओर से दावा किया गया है कि इसका एक वीडियो भी है जो वायरल हो रहा है।

तेजाब डलवाने की धमकी का आरोप

एफआईआर में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि घटना के दौरान युवती और उसकी मां पर तेजाब डलवाने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि आरोपियों ने न केवल डराने-धमकाने का प्रयास किया बल्कि खुलेआम जान-माल के नुकसान की चेतावनी भी दी।

यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता है।

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि घटना के दौरान युवती के गले में पहनी हुई सोने की चेन छीन ली गई।

इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

आदर्श नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 126(2), 304(2), 351(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

जमानत के बाद आया नया मोड़

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने युवती को बड़ी राहत देते हुए नियमित जमानत दी थी।

जस्टिस बिपिन गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत मंजूर की थी।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश बताया था।

युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश गुप्ता और लोकेश शर्मा ने अदालत में कहा कि यह मामला केवल कथित ब्लैकमेलिंग का नहीं बल्कि प्रेम संबंध, विश्वासघात, आर्थिक लेन-देन और व्यक्तिगत विवाद से जुड़ा हुआ है।

प्रेम संबंध, शादी का झांसा और आर्थिक लेन-देन की दलील

जमानत के लिए युवती की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गयी कि शिकायतकर्ता कारोबारी ने विवाहित होने के बावजूद स्वयं को अविवाहित बताया और लंबे समय तक विवाह का आश्वासन देकर युवती के साथ संबंध बनाए रखे।

अदालत में यह भी दावा किया गया कि युवती ने कारोबारी की आर्थिक मदद के लिए लगभग 10.5 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर सहयोग किया था। बाद में जब उसने अपनी राशि वापस मांगी तो दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।

बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि युवती का वर्षों तक यौन शोषण किया गया और उस पर 5 से 6 बार गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया।

बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि युवती द्वारा उपलब्ध कराए गए मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच तक नहीं कराई गई। साथ ही जांच एजेंसी पर शिकायतकर्ता के प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया गया।

कारोबारी का पक्ष भी गंभीर

दूसरी ओर शिकायतकर्ता कारोबारी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए अदालत में दावा किया कि युवती और उसके सहयोगियों ने उसे ब्लैकमेल किया तथा करोड़ों रुपये की मांग की।

उसका आरोप था कि उससे लगभग 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं और अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही थी। कारोबारी ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई थी और जमानत का विरोध किया था।

हालांकि हाईकोर्ट ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और आरोपी युवती को जमानत प्रदान कर दी।

सशर्त जमानत

हाईकोर्ट ने युवती को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और 50-50 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया।

साथ ही शर्त लगाई कि वह बिना अदालत की अनुमति देश नहीं छोड़ेगी, किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगी और सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेगी।

जेल में पहुंचने वाले ‘वकीलों’ की जांच भी तेज

इसी बीच एक और विवाद सामने आया है। युवती के परिवार ने आरोप लगाया था कि जमानत याचिका पर सुनवाई से एक दिन पहले कुछ लोग अधिवक्ता बनकर जेल पहुंचे और उस पर समझौते का दबाव बनाने की कोशिश की।

इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी।

महिला जेल प्रशासन ने पुलिस को भेजे जवाब में स्वीकार किया है कि 12 जून को दो व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में जेल पहुंचे थे और उन्होंने युवती से मुलाकात की थी।

जेल प्रशासन के अनुसार युवती के विरोध और शोर मचाने के बाद दोनों व्यक्तियों को कुछ ही मिनटों में जेल परिसर से बाहर निकाल दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि जेल प्रशासन के पत्र में पहले 11 जून की तारीख का उल्लेख किया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 12 जून बताया गया। वहीं मुलाकात का निर्धारित दिन नहीं होने के कारण मुलाकात पंजिका का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात भी कही गई।

इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।

ब्लैकमेलिंग या गहरी साजिश?

यह मामला अब केवल कथित ब्लैकमेलिंग या हनीट्रैप तक सीमित नहीं रह गया है।

एक पक्ष खुद को करोड़ों रुपये की उगाही का शिकार बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष प्रेम संबंध, धोखा, आर्थिक शोषण, यौन उत्पीड़न और जांच को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप लगा रहा है।

मामले में हाल ही में युवती के परिवार ने पुलिस को शिकायत देकर यह भी आरोप लगाया था कि जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले उन पर समझौते का दबाव बनाया गया। शिकायत में दावा किया गया कि कुछ लोग वकील के जूनियर बनकर जेल तक पहुंचे और युवती को समझौते के लिए धमकाने का प्रयास किया।

अब जेल से रिहाई के तुरंत बाद हमले और धमकियों के नए आरोप सामने आने से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या यह वास्तव में ब्लैकमेलिंग का मामला है? या यह किसी बड़े व्यक्तिगत और आर्थिक विवाद का परिणाम है? क्या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है? या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी कहानी छिपी है?

इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और आगामी न्यायिक कार्यवाही से ही सामने आएंगे।

फिलहाल इतना तय है कि राजस्थान के सबसे चर्चित मामलों में शामिल यह प्रकरण अब एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े कई और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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