राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने प्रदेश कि अदालतों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा बरती जा रही लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई हैं.
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय तक पहुंच आमजन का मूल अधिकार है, और सरकारों की लापरवाही इसे बाधित कर रही है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन बांसवाड़ा कि ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की हैं.
सरकारें केवल आश्वासन देती हैं.
प्रदेश की अदालतों के बुनियादी ढांचे के हालात को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य में न्यायिक प्रणाली का सुचारू संचालन तब तक संभव नहीं जब तक बुनियादी ढांचा सुदृढ़ नहीं होगा.
पीठ ने कहा कि कई जिलों में कोर्ट भवन, वकीलों के लिए हॉल और चैंबर्स, न्यायिक अधिकारियों के आवास और महिलाओं व आमजन के लिए जरूरी सुविधाएं कि कमी हैं और इसके लिए सरकारे केवल आश्वासन देती रही हैं.
सुनवाई के दौरान प्रदेश भर की बार एसोसिएशनों कि ओर से अदालत को बताया गया कि बांसवाड़ा, जैसलमेर, भीलवाड़ा और अजमेर और नए जिलों में स्थापित अदालतों में न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं हैं.
अधिवक्ताओं ने कहा कि कोर्ट के बार बार आदेशो के बाद भी कोई भी ठोस प्रगति अब तक नहीं हुई है और कई जिलों में कोर्ट बिना उचित भवनों के चलाए जा रहे हैं.
डॉ सचिन आचार्य की चौकाने वाली रिपोर्ट
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने प्रदेशभर कि अदालतों के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक रिपोर्ट भी पेश की. रिपोर्ट के अनुसार
— प्रदेशभर कि अदालतों के 174 भूमि आवंटन मामले अब तक लंबित हैं, जिनमें से 130 मामले जिलाधिकारियों के स्तर पर रुके हुए हैं.
— 324.29 करोड़ की परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति अब तक नहीं दी गई.
— 59.28 करोड़ की निर्माणाधीन परियोजनाओं को संशोधित स्वीकृति पर पिछले कई वर्षो में निर्णय नहीं लिया गया.
— 258.57 करोड़ की कोर्ट परिसरों में मूलभूत सुविधाओं के भेजे गए प्रस्ताव लंबित हैं.
— 85.04 करोड़ रूपए वकीलों के हॉल, चैंबर, कैंटीन और पार्किंग निर्माण के लिए प्रस्तावित हैं, जिन पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई.
महिलाओं के लिए सुविधाए नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि अधिकांश जिलों में महिला वकीलों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. यहां तक कि कई अदालत परिसरों में महिला शौचालय, क्रेच और आरामस्थल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं.
तैयारी से आए, हम कार्रवाई करेंगे
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 अगस्त दोपहर 2 बजे तय करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अदालत के पिछले आदेशो की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों पर वो सख्त कार्रवाई करेगी.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पूरी तैयारी के साथ अदालत में पेश हों.
अधिकारी अब तक की गई कार्यवाही और आगे की स्पष्ट समय-सीमा की तैयारी के साथ कोर्ट आए.
इसके साथ ही अदालत ने उन जिम्मेदार अधिकारियों की सूची अदालत में पेश करने को हा है कि जिन्होंने अब तक दिए कोर्ट निर्देशों का पालन नहीं किया है.
उन अधिकारियों पर क्या प्रस्तावित कार्रवाई की जाएगी इसकी जानकारी अदालत में पेश करने को काह हैं.
कोर्ट की चेतावनी
कोर्ट ने कहा कि यदि सरकारों ने अगली सुनवाई तक ठोस कार्य नहीं किया, तो कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब केवल “आश्वासन” नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए.