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नारी निकेतन और बाल गृहों की व्यवस्था पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: अधिकारियों से हर संस्थान की वास्तविक रिपोर्ट मांगी, अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश

Rajasthan High Court Demands Ground Reality Reports on Shelter Homes, Says Generic Affidavits Are Unacceptable

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह और फोस्टर होम की व्यवस्थाओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा है कि अब औपचारिक या एक जैसे शपथपत्र देकर काम नहीं चलेगा। हर संस्थान की वास्तविक स्थिति, वहां उपलब्ध सुविधाओं, कमियों और जरूरतों का अलग-अलग तथ्यात्मक ब्योरा कोर्ट के समक्ष पेश करना होगा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने सभी संबंधित अधीक्षकों को स्वयं शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिपोर्ट में केवल उपलब्ध सुविधाओं का ही नहीं, बल्कि जिन व्यवस्थाओं की जरूरत है, उनका भी पूरा विवरण देना होगा।

रिपोर्ट में सीसीटीवी, बिजली बैकअप, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, भोजन, सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों की शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की पूरी जानकारी देने को कहा गया है।

यह निर्देश नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह और फोस्टर होम की व्यवस्थाओं से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पाया था कि कई अधिकारियों की ओर से दाखिल शपथपत्र लगभग एक जैसे थे और उनमें संस्थानों की वास्तविक स्थिति का उल्लेख नहीं था।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर बच्चों और महिलाओं के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और नई सुविधाएं विकसित करने की योजना भी पेश की जाए।

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हाईकोर्ट ने सख्ती क्यों दिखाई?

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि कई अधिकारियों की ओर से दाखिल शपथपत्र लगभग एक जैसे थे। इनमें संबंधित नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह और फोस्टर होम की वास्तविक स्थिति, वहां मौजूद कमियों और जरूरी सुविधाओं का स्पष्ट विवरण नहीं था।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस बार प्रत्येक संस्थान का अधीक्षक स्वयं अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करे और अपने संस्थान की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी दे।

हाईकोर्ट ने नए और स्पष्ट शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। शपथपत्र में संस्थान की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, कमियों और जरूरतों का तथ्यात्मक ब्योरा दिया जाए, ताकि कोर्ट के सामने हर संस्थान की सही तस्वीर आ सके।

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हर संस्थान से क्या-क्या जानकारी मांगी गई?

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि हर संस्थान का अधीक्षक अपने शपथपत्र में वहां उपलब्ध सुविधाओं और जिन व्यवस्थाओं की जरूरत है, उनका अलग-अलग और विस्तृत ब्योरा दे।

कोर्ट ने विशेष रूप से इन व्यवस्थाओं की जानकारी मांगी है—

  • सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था
  • बिजली बैकअप
  • चिकित्सा सुविधाएं
  • शुद्ध पेयजल और वाटर प्यूरिफायर
  • भोजन तैयार करने के उपकरण
  • अग्निशमन व्यवस्था
  • बच्चों और महिलाओं के लिए कपड़े व रोजमर्रा की जरूरी सामग्री
  • सफाईकर्मी, रसोइया और चौकीदार जैसे कर्मचारियों की उपलब्धता

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि शपथपत्र में केवल उपलब्ध सुविधाओं का ही नहीं, बल्कि जिन सुविधाओं की कमी है और जिनकी तत्काल जरूरत है, उनका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए।

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पढ़ाई और प्रशिक्षण का ब्यौरा भी मांगा

हाईकोर्ट ने कहा कि शपथपत्र में केवल भवन और सुविधाओं का ही नहीं, बल्कि संस्थान में रहने वाले बच्चों और महिलाओं के विकास से जुड़ी जानकारी भी दी जाए।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि हर संस्थान बताए कि वहां किस तरह का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति का नाम और उसकी योग्यता की भी जानकारी दी जाए।

इसके अलावा यह भी बताया जाए कि बच्चे किस स्कूल में पढ़ रहे हैं। यदि संस्थान को किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन से दान मिलता है, तो उसका पूरा विवरण भी शपथपत्र में शामिल किया जाए।

सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह या फोस्टर होम में बच्चों या महिलाओं को तुरंत दूसरी जगह भेजने की जरूरत हो, तो संबंधित अधिकारी बिना देरी इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजें।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में बिना देरी किये तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

साथ ही संस्थानों की आवासीय क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त कमरे बनाने, आधुनिक सुविधाएं विकसित करने तथा पुरुष और महिला शौचालयों के विस्तार की प्रस्तावित योजना भी कोर्ट के समक्ष पेश की जाए।

11 अगस्त को अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सभी संबंधित अधिकारियों से नए शपथपत्र दाखिल कराए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय की है। कोर्ट ने कहा कि इस बार सभी अधिकारी अलग-अलग और तथ्यात्मक शपथपत्र दाखिल करें।

हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस बार औपचारिक या एक जैसे शपथपत्र दाखिल न कर हर संस्थान का अलग शपथपत्र दाखिल किया जाए। इसमें वहां की वास्तविक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, कमियों और जरूरतों का तथ्यात्मक ब्योरा दिया जाए।

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