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लॉ कॉलेजों को फिर मिली मोहलत, BCI ने एफिलिएशन की डेडलाइन चौथी बार बढ़ाई; 31 अगस्त तक मौका

BCI U-Turn on NALSAR Students’ Enrollment Ban After CJI Surya Kant Convocation Row

नई दिल्ली: देशभर के मौजूदा लॉ कॉलेजों और कानूनी शिक्षा संस्थानों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक और मौका दिया है।

बीसीआई ने 2026-27 सेशन के लिए पहले से मंजूर लॉ कोर्स की एफिलिएशन जारी रखने या रिन्यू कराने के आवेदन की आखिरी तारीख चौथी बार बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।

यह राहत उन लॉ कॉलेजों और कानूनी शिक्षा केंद्रों के लिए है, जिनके पास जरूरी डॉक्यूमेंट मौजूद हैं, लेकिन टेक्निकल या एडमिनिस्ट्रेटिव वजहों से वे तय समय में अपना आवेदन पूरा नहीं कर पाए।

हालांकि, यह एक्सटेंशन नए लॉ कॉलेज, नए कोर्स, अतिरिक्त सेक्शन, छात्रों का इनटेक बढ़ाने या नया कैंपस शुरू करने के लिए नहीं है।

यह सिर्फ पहले से मंजूर कोर्स की एफिलिएशन जारी रखने या रिन्यू कराने के लिए है।

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बार-बार बढ़ी डेडलाइन

बीसीआई ने 2026-27 सेशन के लिए आवेदन की पहली डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 तय की थी।

इसके बाद इसे पहले 16 जनवरी 2026, फिर 5 मार्च और बाद में 31 जुलाई तक बढ़ाया गया।

अब बीसीआई ने एक बार फिर डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है।

बीसीआई के मुताबिक, अगर पोर्टल तुरंत बंद कर दिया जाता तो जरूरी डॉक्यूमेंट होने के बावजूद कई कानूनी शिक्षा केंद्र अपना आवेदन पूरा नहीं कर पाते।

इससे 2026-27 सेशन में एडमिशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।

इसी वजह से मौजूदा संस्थानों को आवेदन पूरा करने के लिए एक और मौका दिया गया है।

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डॉक्यूमेंट हैं तो मिलेगा मौका

जिन संस्थानों के पास सभी जरूरी डॉक्यूमेंट और वैध एफिलिएशन या एफिलिएशन जारी रखने का ऑर्डर है, लेकिन टेक्निकल या एडमिनिस्ट्रेटिव वजहों से ऑनलाइन आवेदन पूरा नहीं हो पाया, उन्हें अब एक और मौका दिया गया है।

ऐसे संस्थान लिखित अंडरटेकिंग दे सकते हैं। इसके साथ जरूरी डॉक्यूमेंट की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी भी जमा करनी होगी।

संस्थान को यह भी बताना होगा कि वह 31 अगस्त तक फाइनल आवेदन जमा कर देगा।

हालांकि, अंडरटेकिंग देने से अपने आप बीसीआई की अप्रूवल नहीं मिल जाएगी।

बाद में डॉक्यूमेंट की जांच, स्क्रूटिनी और जरूरत पड़ने पर इंस्पेक्शन भी किया जा सकता है।

नए कोर्स पर लागू नहीं होगी छूट

बीसीआई ने साफ किया है कि यह एक्सटेंशन सिर्फ पहले से मंजूर कोर्स, सेक्शन और तय इनटेक को जारी रखने या उनके रिन्यूअल के लिए है।

इसका फायदा नया लॉ कॉलेज खोलने, नया कोर्स शुरू करने, अतिरिक्त सेक्शन जोड़ने, छात्रों का इनटेक बढ़ाने या नया कैंपस शुरू करने के लिए नहीं लिया जा सकता।

यानी जिन संस्थानों के पास पहले से मंजूर कोर्स हैं, वही इस बढ़ी हुई डेडलाइन के तहत अपना आवेदन पूरा कर सकते हैं।

लेट फीस भी देनी होगी

31 अगस्त तक आवेदन जमा करने वाले संस्थानों को तय लेट फीस भी देनी होगी।

हालांकि, अगर कोई यूनिवर्सिटी अपने ही डिपार्टमेंट या फैकल्टी के जरिए कोर्स चला रही है और पहले वाली डेडलाइन के अंदर फीस जमा कर चुकी है, तो उस पर यह शर्त लागू नहीं होगी।

बीसीआई ने साफ किया है कि सिर्फ आवेदन जमा करने या फीस भरने से एफिलिएशन की मंजूरी नहीं मानी जाएगी।

पहले बीसीआई की जांच और जरूरी प्रक्रिया पूरी होगी।

सिर्फ आवेदन से नहीं मिलेगा एडमिशन

बीसीआई ने साफ किया है कि सिर्फ आवेदन जमा करने, फीस भरने या अंडरटेकिंग देने से किसी संस्थान को छात्रों के एडमिशन का अधिकार नहीं मिलेगा।

आवेदन करने के बाद भी बीसीआई की जांच और अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके बाद ही संस्थान को आगे एडमिशन की अनुमति मिल सकेगी।

काउंसिल ने चेतावनी दी है कि अगर कोई संस्थान 31 अगस्त तक फाइनल आवेदन जमा नहीं करता है, तो दी गई अप्रूवल वापस ली जा सकती है।

इसी तरह जांच में कोई गलत या फर्जी डॉक्यूमेंट मिलने पर भी अप्रूवल वापस ली जा सकती है।

31 अगस्त के बाद बंद होगा पोर्टल

बीसीआई ने कहा है कि 31 अगस्त की डेडलाइन खत्म होने के बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा।

इसके बाद आम तौर पर कोई और एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा।

यानी मौजूदा लॉ कॉलेजों और कानूनी शिक्षा केंद्रों के पास 2026-27 सेशन के लिए पहले से मंजूर कोर्स की एफिलिएशन जारी रखने या रिन्यू कराने का अब आखिरी मौका है।

हालांकि, 31 अगस्त तक आवेदन करने से अपने आप अप्रूवल नहीं मिलेगा।

बीसीआई डॉक्यूमेंट की जांच करेगा और जरूरत पड़ने पर इंस्पेक्शन भी कराया जा सकता है।

इसके बाद ही एफिलिएशन को लेकर आगे की मंजूरी दी जाएगी।

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