नई दिल्ली: लॉ की पढ़ाई के दौरान कम अटेंडेंस वाले छात्रों के लिए राहत की खबर है।
अब सिर्फ अटेंडेंस कम होने की वजह से उनका वकील के तौर पर एनरोलमेंट नहीं रुकेगा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने एक बार की विशेष छूट के तहत अटेंडेंस कम होने के बावजूद परीक्षा देने की अनुमति दी थी।
बीसीआई ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के तहत अटेंडेंस कम होने के बावजूद परीक्षा देने और डिग्री हासिल करने वाले छात्रों का सिर्फ अटेंडेंस की कमी के आधार पर एनरोलमेंट नहीं रोका जाएगा।
यानी जिन छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने खास राहत देते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी, वे अब डिग्री मिलने के बाद सिर्फ उसी पुरानी अटेंडेंस कमी की वजह से वकील के तौर पर एनरोल होने से नहीं रुकेंगे।
यह राहत देशभर में इस तरह के सभी छात्रों पर लागू होगी।
हालांकि, यह राहत सभी कम अटेंडेंस वाले छात्रों के लिए नहीं है बल्कि सिर्फ एक बार के लिए और सीमित दायरे में है।
यह सिर्फ उन छात्रों के लिए है जो सुप्रीम कोर्ट की दी गई एक बार वाली छूट के दायरे में आते हैं और उस आधार पर परीक्षा पास कर लॉ की डिग्री हासिल कर चुके हैं।
कम अटेंडेंस पर नहीं रुकेगा एनरोलमेंट
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की लीगल एजुकेशन कमेटी के सह-अध्यक्ष जस्टिस राजेंद्र मेनन ने 12 अगस्त को जारी आदेश में स्थिति साफ की है।
मामला उन लॉ ग्रेजुएट्स का है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने एक बार की छूट देते हुए कम अटेंडेंस के बावजूद परीक्षा देने की अनुमति दी थी। इन छात्रों ने इसी छूट के तहत परीक्षा दी, पास किया और डिग्री हासिल कर ली।
डिग्री मिलने के बाद कुछ छात्रों के सामने एनरोलमेंट की परेशानी आ गई।
कुछ विश्वविद्यालयों ने उन्हें सामान्य अटेंडेंस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया, जिससे बार काउंसिल में वकील के तौर पर एनरोल होने में दिक्कत आने लगी।
अब बीसीआई ने साफ कर दिया है कि सिर्फ कम अटेंडेंस की वजह से इन छात्रों का एनरोलमेंट नहीं रोका जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की छूट से मिली राहत
बीसीआई ने साफ किया है कि जिन छात्रों को सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के तहत कम अटेंडेंस के बावजूद परीक्षा देने की अनुमति मिली थी, उनकी वही अटेंडेंस कमी बाद में एनरोलमेंट के समय फिर से अड़चन नहीं बन सकती।
यानी जब कम अटेंडेंस के बावजूद उन्हें परीक्षा देने और डिग्री हासिल करने की अनुमति मिल गई, तो सिर्फ उसी कमी के आधार पर डिग्री मिलने के बाद उनका एनरोलमेंट नहीं रोका जा सकता।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अटेंडेंस के नियम खत्म हो गए हैं।
यह राहत सिर्फ उन्हीं छात्रों के लिए है, जो सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के दायरे में आते हैं।
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कम अटेंडेंस से शुरू हुआ मामला
यह मामला दिल्ली की एक लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र की आत्महत्या के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में शुरू हुई कार्रवाई से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान लॉ छात्रों की कम अटेंडेंस का मुद्दा उठा।
इसके बाद बीसीआई ने संबंधित अवधि के छात्रों को सिर्फ कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा से नहीं रोकने के निर्देश दिए।
बाद में बीसीआई ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
मई में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
इसके बाद जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार की राहत देते हुए उस समय पढ़ रहे छात्रों को कम अटेंडेंस के बावजूद अंतिम या सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठने की अनुमति दी।
अब इसी छूट के तहत डिग्री हासिल कर चुके छात्रों के एनरोलमेंट का मामला सामने आया है।
डिग्री के बाद एनरोलमेंट में अड़चन
इस मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ लॉ के कुछ छात्रों ने बीसीआई के सामने अपनी परेशानी रखी।
उनका कहना था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के तहत परीक्षा दी और डिग्री हासिल की। लेकिन डिग्री मिलने के बाद एनरोलमेंट में दिक्कत आ गई।
विश्वविद्यालय की ओर से सामान्य अटेंडेंस सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण उनका बार काउंसिल में एनरोलमेंट अटक गया।
अब बीसीआई ने इसका रास्ता साफ किया है। ऐसे छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी और लॉ एजुकेशन संस्थान अल्टरनेट सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं।
इस सर्टिफिकेट में यह साफ किया जाएगा कि छात्र सुप्रीम कोर्ट की छूट के दायरे में था, उसने परीक्षा पास की है और लॉ की डिग्री हासिल की है।
इसके आधार पर वह वकील के तौर पर एनरोलमेंट के लिए आवेदन कर सकेगा।
पुराना रिकॉर्ड नहीं बदलेगा
बीसीआई ने यहां एक जरूरी बात भी साफ की है।
इस राहत का मतलब यह नहीं है कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी पुराने अटेंडेंस रिकॉर्ड को बदल देंगे।
यानी जिस छात्र की जितनी अटेंडेंस थी, रिकॉर्ड में वही रहेगी। उसे बाद में बढ़ाकर या सामान्य बताकर नया रिकॉर्ड नहीं बनाया जाएगा।
सिर्फ इतना होगा कि अगर छात्र सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के दायरे में आता है और उसने उसी आधार पर परीक्षा पास कर डिग्री हासिल की है, तो अटेंडेंस की कमी को उसके एनरोलमेंट में रुकावट नहीं बनाया जाएगा।
देशभर के छात्रों को मिलेगा फायदा
बीसीआई ने यह राहत सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रखी है।
आदेश में साफ किया गया है कि इसी स्थिति में आने वाले देशभर के सभी छात्रों पर यह व्यवस्था लागू होगी।
यानी अगर कोई छात्र दूसरी यूनिवर्सिटी या लॉ एजुकेशन संस्थान से है, लेकिन वह सुप्रीम कोर्ट की दी गई एक बार की छूट के दायरे में आता है और बाकी शर्तें पूरी करता है, तो उसे भी इसी व्यवस्था का फायदा मिल सकता है।
हालांकि, इसके लिए छात्र का उस विशेष वर्ग में होना जरूरी है। हर ऐसे लॉ ग्रेजुएट को यह राहत नहीं मिलेगी जिसकी अटेंडेंस कम रही है।
आगे के छात्रों पर नियम लागू
बीसीआई ने यह भी साफ कर दिया है कि यह फैसला अटेंडेंस के नियम को खत्म नहीं करता।
2008 के लीगल एजुकेशन रूल्स के नियम 12 के तहत अटेंडेंस की जरूरत आगे भी बनी रहेगी।
यानी भविष्य में किसी छात्र की अटेंडेंस कम है तो वह सिर्फ इस आदेश के आधार पर परीक्षा या एनरोलमेंट में राहत का दावा नहीं कर सकता।
यह व्यवस्था सिर्फ उस खास अवधि और उन छात्रों के लिए है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक बार की छूट दी थी।
इसके अलावा वकील के तौर पर एनरोलमेंट के लिए एडवोकेट्स एक्ट की दूसरी जरूरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
संबंधित स्टेट बार काउंसिल को इन शर्तों की जांच करनी होगी।
राहत मिली, लेकिन नियम वही रहेंगे
बीसीआई का यह फैसला उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए राहत है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एक बार वाली छूट के तहत परीक्षा दी, डिग्री हासिल की और बाद में अटेंडेंस सर्टिफिकेट की वजह से एनरोलमेंट में अटक गए थे।
अब सिर्फ उसी पुरानी अटेंडेंस कमी के आधार पर उनका एनरोलमेंट नहीं रोका जाएगा। हालांकि, यह एक बार की राहत है और बीसीआई की मंजूरी भी जरूरी है।
सीधी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की छूट के तहत परीक्षा पास कर डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए कम अटेंडेंस अब एनरोलमेंट में रुकावट नहीं बनेगी।
लेकिन आगे लॉ की पढ़ाई करने वाले छात्रों पर अटेंडेंस के मौजूदा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।