टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

देश में फर्जी वकीलों के खिलाफ एक्शन की तैयारी! फर्जी लॉ डिग्री और वकालत पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, CBI जांच की मांग पर मांगा जवाब

Supreme Court Rules Bar Councils Can Take Action Against Misconduct in Court Premises

नई दिल्ली: देश में फर्जी लॉ डिग्री हासिल कर वकालत कर रहे लोगों पर अब शिकंजा कस सकता है।

फर्जी लॉ डिग्री लेकर वकालत करने या किसी दूसरे की पहचान पर कोर्ट में प्रैक्टिस करने के आरोपों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों पर केंद्र समेत 4 पक्षों से जवाब मांगा है।

एडवोकेट राजा चौधरी ने यह याचिका दाखिल की है और फर्जी वकीलों से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है।

याचिका में ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जो गलत डिग्री या पहचान के आधार पर वकालत कर रहे हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिका पर केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह भी पढ़ें: अब हर वकील को लेना होगा अनिवार्य ट्रेनिंग कोर्स, गोवा में बनेगी नेशनल लीगल अकादमी; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई तैयारी

फर्जी लॉ डिग्री से वकालत का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग फर्जी या गलत तरीके से हासिल की गई लॉ डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे हैं।

इसके अलावा दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके कोर्ट में प्रैक्टिस करने के मामलों की भी जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला सिर्फ कुछ वकीलों तक सीमित नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति फर्जी डिग्री या गलत पहचान के आधार पर कोर्ट में पेश हो रहा है तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो न्याय के लिए कोर्ट का रुख करते हैं।

याचिका में ऐसे मामलों की पहचान करने और उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही कानूनी पेशे में गिरते प्रोफेशनल स्टैंडर्ड से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही गई है।

यह भी पढ़ें: लॉ कॉलेजों को फिर मिली मोहलत, BCI ने एफिलिएशन की डेडलाइन चौथी बार बढ़ाई; 31 अगस्त तक मौका

देश में 3 में से 1 वकील फर्जी!

याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के एक बयान का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया था कि करीब 30 से 40 फीसदी वकील फर्जी हो सकते हैं।

अगर यह दावा सही है तो हर 3 वकीलों में से करीब 1 वकील के फर्जी होने की बात सामने आती है।

हालांकि, याचिका में यह आंकड़ा बीसीआई चेयरमैन के बयान के आधार पर दिया गया है।

अगस्त 2023 में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि देश में करीब 20 लाख रजिस्टर्ड एडवोकेट हैं। हर साल करीब 80 हजार नए वकील इस पेशे में आते हैं।

ऐसे में याचिका में उठाया गया सवाल सिर्फ फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं है।

मुद्दा यह भी है कि इतने बड़े कानूनी पेशे में सही डिग्री और सही पहचान वाले लोगों की जांच कैसे सुनिश्चित की जाए।

इलाहाबाद में 1000 से ज्यादा फर्जी वकीलों का दावा

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद के मामले का भी जिक्र हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि इलाहाबाद में 1000 से ज्यादा फर्जी वकील हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

इलाहाबाद में बार काउंसिल की सिफारिश के बाद करीब 68 वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस की ओर से करीब 100 एफआईआर दर्ज किए जाने की बात भी कही गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर एक जगह इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ सकते हैं तो दूसरे राज्यों में भी इसकी जांच की जरूरत हो सकती है।

इसी वजह से याचिका में पूरे देश में ऐसे मामलों की जांच की मांग की गई है, ताकि सिर्फ शिकायत मिलने पर अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय फर्जी वकीलों की पहचान की जा सके।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मामले का भी जिक्र

याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मोहम्मद कफील बनाम उत्तर प्रदेश मामले का भी हवाला दिया गया है।

इसमें फर्जी वकीलों और कानूनी पेशे से जुड़े ऐसे मामलों पर चर्चा हुई थी।

याचिका के मुताबिक, इस तरह के मामलों में बड़े स्तर पर जांच की जरूरत है।

इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन लोग फर्जी डिग्री, गलत पहचान या दूसरे तरीकों से वकालत कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: दिल्ली विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय ट्रायल एडवोकेसी प्रतियोगिता में जयपुर की टीम का शानदार प्रदर्शन, राजस्थान यूनिवर्सिटी बनी उपविजेता

CBI जांच की मांग

एडवोकेट राजा चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट से फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री और दूसरे व्यक्ति की पहचान पर वकालत करने के मामलों की सीबीआई या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि ऐसे मामलों की जांच सिर्फ अलग-अलग शिकायतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

पूरे देश में जांच होने से फर्जी तरीके से वकालत कर रहे लोगों की पहचान की जा सकती है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति फर्जी डिग्री या गलत पहचान के आधार पर कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा है तो इसका असर सिर्फ वकालत के पेशे पर नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था पर पड़ सकता है।

BCI की भूमिका पर भी सवाल

याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका का भी जिक्र किया गया है।

याचिका में सवाल उठाया गया है कि वकालत में आने वाले लोगों की लॉ डिग्री, पहचान और जरूरी डॉक्यूमेंट की जांच कितनी अच्छी तरह हो रही है।

वकालत करने के लिए लॉ की डिग्री के साथ बार काउंसिल की जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

वकीलों की प्रैक्टिस की जानकारी जांचने के लिए बार काउंसिल के पास वेरिफिकेशन की व्यवस्था भी है।

याचिका में कहा गया है कि इस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि फर्जी डिग्री या गलत पहचान के आधार पर कोई व्यक्ति लंबे समय तक वकालत न कर सके।

अगर कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से वकील बनकर कोर्ट में पहुंचता है तो इसका असर सिर्फ कानूनी पेशे पर नहीं पड़ता।

इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

केंद्र समेत 4 पक्षों से मांगा जवाब

इस मामले में बड़ा सवाल यही है कि फर्जी डिग्री या गलत पहचान के आधार पर वकालत करने वालों की पहचान कैसे हो और ऐसे लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

याचिका में फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री और दूसरे व्यक्ति की पहचान पर वकालत करने जैसे मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अब इन पक्षों के जवाब के बाद कोर्ट तय करेगा कि इस मामले में आगे क्या करना है।

मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। उस दिन कोर्ट के सामने संबंधित पक्षों का जवाब हो सकता है।

सबसे अधिक लोकप्रिय