नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब देशभर के वकीलों के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग की तैयारी शुरू हो गई है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULER) में नेशनल लीगल अकादमी बनाने की तैयारी कर रहा है।
इस अकादमी में देशभर के वकीलों को अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाएगी।
बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के मुताबिक, यह ट्रेनिंग करीब 10 दिन से दो सप्ताह की हो सकती है।
देशभर से युवा वकील इस अकादमी में ट्रेनिंग के लिए आएंगे। बीसीआई को यह जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद मिली है।
नेशनल लीगल अकादमी का मकसद वकीलों को पेशे की बदलती जरूरतों के लिए तैयार करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने अकादमी के जरिए वकीलों की लगातार ट्रेनिंग, पेशेवर और नैतिक मानकों को मजबूत करने और नई तकनीक के साथ उन्हें तैयार करने पर जोर दिया है।
वकीलों की ट्रेनिंग जरूरी होगी
बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के मुताबिक, नेशनल लीगल अकादमी में देशभर के वकीलों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाएगा। यह ट्रेनिंग सभी वकीलों के लिए जरूरी होगी।
इसका मकसद वकीलों की पढ़ाई को कानून की डिग्री तक सीमित नहीं रखना है।
उन्हें वकालत में बदलती जरूरतों, नई कानूनी व्यवस्था और पेशे से जुड़ी नई चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाएगा।
10 दिन से 2 हफ्ते की ट्रेनिंग
मनन कुमार मिश्रा के मुताबिक, ट्रेनिंग की अवधि करीब 10 दिन से दो सप्ताह तक हो सकती है।
देशभर से आने वाले वकीलों को इस दौरान जजों, ट्रेनर्स, प्रोफेसरों और वरिष्ठ वकीलों से सीखने का मौका मिलेगा।
ट्रेनिंग में बदलते कानूनी कामकाज और नई तकनीक से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य वकीलों को अपने पेशे में आगे भी लगातार सीखते रहने के लिए तैयार करना है।
अकादमी में देशभर से आने वाले वकीलों को जजों, वरिष्ठ वकीलों, प्रोफेसरों और दूसरे विशेषज्ञों से सीखने का मौका भी मिलेगा।
जजों और सीनियर वकीलों से सीखेंगे
मनन कुमार मिश्रा के मुताबिक, अकादमी में आने वाले वकीलों को जजों, ट्रेनर्स, प्रोफेसरों और वरिष्ठ वकीलों से सीखने का मौका मिलेगा।
ट्रेनिंग का मकसद वकीलों को कोर्ट में काम करने के बदलते तरीके और पेशे की नई चुनौतियों से परिचित कराना भी होगा।
इसमें तकनीक के इस्तेमाल, पेशेवर व्यवहार और वकालत से जुड़े दूसरे जरूरी पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है, जिससे वकील अपने पेशे में आगे बढ़ते हुए लगातार नई चीजें सीखते रहें।
गोवा में बनेगी अकादमी
बीसीआई ने नेशनल लीगल अकादमी के लिए गोवा स्थित इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULER) कैंपस को चुना है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तय किया गया है कि वकीलों की ट्रेनिंग के लिए बनने वाली यह अकादमी इसी कैंपस में होगी।
इससे देशभर से आने वाले वकीलों को एक ही जगह पर ट्रेनिंग की सुविधा मिल सकेगी।
वहीं, IIULER के छात्रों को भी जजों, वरिष्ठ वकीलों, प्रोफेसरों और दूसरे ट्रेनर्स के साथ बातचीत और सीखने का मौका मिलेगा।
बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि नेशनल लीगल अकादमी का गोवा में बनना IIULER और राज्य दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
दो साल में तैयार होगा कैंपस
बीसीआई चेयरमैन ने बताया कि 8 अगस्त को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, एडवोकेट जनरल देविदास पांगम और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा के साथ बैठक हुई थी।
इस बैठक में IIULER के मुख्य कैंपस का निर्माण दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह कैंपस धरबांदोरा में 50 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बनाया जा रहा है।
जस्टिस नरसिम्हा की सोच इस संस्थान को कानूनी पढ़ाई और रिसर्च के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की है।
नेशनल लीगल अकादमी बनने के बाद इस कैंपस में वकीलों की ट्रेनिंग भी होगी। इससे IIULER की भूमिका और बढ़ जाएगी।
छात्रों को भी होगा फायदा
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा कि कानूनी पढ़ाई सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने छात्रों से अलग-अलग विषयों को समझने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, आने वाले समय में अलग-अलग विषयों के बीच की सीमाएं कम होती जाएंगी।
ऐसे में एक अच्छे वकील के लिए सिर्फ कानून की जानकारी होना काफी नहीं होगा। उन्हें अर्थव्यवस्था, तकनीक, समाज और दूसरे क्षेत्रों की भी समझ रखनी होगी।
जस्टिस नरसिम्हा ने छात्रों को पढ़ाई के साथ अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देने की सलाह दी।
ट्रेनिंग में AI पर भी फोकस
नेशनल लीगल अकादमी में वकीलों को नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए भी तैयार किया जाएगा।
इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने और अपनी सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत रखने पर जोर दिया जाएगा।
ट्रेनिंग का मकसद वकीलों को तकनीक से दूर रखना नहीं, बल्कि उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना सिखाना होगा।
वकील एआई जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन कानूनी मामलों में अपनी समझ और सोच को पूरी तरह उसके भरोसे न छोड़ें।
आने वाले समय में कानूनी कामकाज में तकनीक की भूमिका और बढ़ने वाली है।
ऐसे में नेशनल लीगल अकादमी की ट्रेनिंग में वकीलों को नई तकनीक, बदलते कानूनी कामकाज और पेशे की नई जरूरतों के लिए तैयार किया जाएगा।
SC के निर्देश के बाद शुरू हुई तैयारी
नेशनल लीगल अकादमी बनाने की तैयारी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद शुरू हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई को नेशनल लीगल अकादमी बनाने का निर्देश दिया था और इसकी व्यवस्था नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी, भोपाल की तर्ज पर करने की बात कही थी।
इसका मकसद यह है कि वकीलों की पढ़ाई कानून की डिग्री मिलने के साथ खत्म न हो।
इसके बाद भी उन्हें ट्रेनिंग और नई चीजें सीखने का मौका मिलता रहे।
बीसीआई ने इसके लिए गोवा में तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले समय में देशभर के वकीलों के लिए यह ट्रेनिंग उनके पेशे का जरूरी हिस्सा बन सकती है।