हाईकोर्ट ने पूछा-अधिकारियों की नाक के नीचे कैसे सरकारी जमीन पर खड़े हो गए मकान-दुकान?
जयपुर। सरकारी जमीन और सड़कों पर अतिक्रमण के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने JDA की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कोर्ट के सामने JDA ने खुद 429 मकानों और दुकानों की सूची पेश की है, जिन्हें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए जाने और सड़कों पर निर्माण किए जाने का उल्लेख किया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित JDA अधिकारियों से सीधे जवाब मांगा है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कैसे होने दिए गए?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने साहब सिंह बनाम राजस्थान सरकार मामले की सुनवाई करते हुए JDA के Enforcement Officer और संबंधित Deputy Commissioner को स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट की दो टूक-‘नाक के नीचे’ कैसे होते रहे निर्माण?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने JDA की ओर से पेश रिकॉर्ड पर गौर करते हुए कहा कि सूची में शामिल कई मकान संबंधित Enforcement Officer और क्षेत्र के प्रभारी Deputy Commissioner, JDA की नाक के नीचे बनाए गए।
कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है कि सरकारी जमीन और सड़क पर इन अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को आखिर किस तरह होने दिया गया।
429 अतिक्रमणकारियों को नोटिस, मकानों पर भी चस्पा होगा
JDA के अतिरिक्त शपथपत्र में 429 मकान/दुकानों का उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित Enforcement Officer प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील कराएं और नोटिस उनके मकानों पर चस्पा भी करें।
संबंधित लोगों को अगली सुनवाई में अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने संबंधित भूमि पर निर्माण किस आधार पर और कैसे किया।
कुछ निर्माणों के मालिकों के नाम तक नहीं
हाईकोर्ट ने सूची की जांच के दौरान यह भी पाया कि कुछ मकान और दुकानों के मालिकों के नाम सूची में दर्ज नहीं हैं। कोर्ट ने JDA के अधिवक्ता को ऐसे सभी निर्माणों के मालिकों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
1 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को यह आदेश भी दिया है कि आदेश को समाचार पत्र में प्रकाशित कराया जाए, ताकि सभी संबंधित लोगों को मामले की जानकारी मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब 429 मकान और दुकानें सरकारी जमीन और सड़क तक पर बन गईं, तो JDA का निगरानी तंत्र इतने लंबे समय तक क्या करता रहा?
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों को अब इस सवाल का जवाब कोर्ट के सामने देना होगा।