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पेपरलेस सुनवाई में मेन याचिका ही गायब! राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, कहा-कागजों पर ही न रह जाए पेपरलेस कोर्ट का सपना

Main Petition Missing from Digital Portal: Rajasthan HC Warns Accountability Is Essential for Paperless Courts

जयपुर। कोर्ट में सुनवाई पेपरलेस हो रही हो और उसी केस की सबसे जरूरी याचिका पोर्टल पर मौजूद ही न हो, तो डिजिटल व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ऐसा ही घटनाक्रम सामने आया, जब पेपरलेस कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य याचिका रिकॉर्ड पर अपलोड ही नहीं मिली।

यानी पेपरलेस सुनवाई के दौरान कोर्ट के पास केस का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।

हाईकोर्ट ने डिजिटल प्रक्रिया में हुई इस लापरवाही को गंभीरता से लिया और संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा।

हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर मुख्य याचिका पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने संबंधित क्लर्क के साथ-साथ डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम संभाल रही Enhira Software (Export) Ltd. कंपनी से भी इस बारे में जवाब मांगा।

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ‘अगर जवाबदेही तय नहीं होगी, तो पेपरलेस कोर्ट का सपना केवल कागजों पर ही रह जाएगा’

जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने कोर्ट की फाइलों को डिजिटल करने की प्रक्रिया में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर जरूरी दस्तावेज समय पर ऑनलाइन रिकॉर्ड में नहीं आएंगे, तो पेपरलेस कोर्ट की व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर पाएगी।

हाईकोर्ट ने इस मामले को सिर्फ एक दस्तावेज अपलोड नहीं होने की गलती के तौर पर नहीं देखा। इस बात पर चिंता जताई कि पेपरलेस व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही बार-बार सामने आएगी तो पूरी डिजिटल सुनवाई व्यवस्था प्रभावित होगी।

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पेपरलेस कोर्ट में मुख्य याचिका ही पोर्टल पर नहीं मिली

मामले की सुनवाई पेपरलेस मॉड्यूल 2.0 के जरिए हो रही थी। लेकिन कोर्ट के सामने मुख्य याचिका का रिकॉर्ड ही अपलोड नहीं था।

मॉड्यूल पर सिर्फ स्थगन और अंतरिम राहत से जुड़ी याचिका उपलब्ध थी। ऐसे में कोर्ट के लिए पूरे मामले को देखना मुश्किल हो गया।

यही स्थिति देखकर हाईकोर्ट ने डिजिटल व्यवस्था पर सवाल उठाए और जवाब मांगा कि जरूरी दस्तावेज समय पर अपलोड क्यों नहीं किए गए।

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क्लर्क और सॉफ्टवेयर कंपनी से जवाब मांगा

हाईकोर्ट ने संबंधित क्लर्क और फाइलों को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने वाली कंपनी Enhira Software (Export) Ltd. से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा।

दोनों की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे संतोषजनक नहीं माना।

हाईकोर्ट ने कहा कि दस्तावेज अपलोड करने में इस तरह की कमी बहुत बड़ी समस्या है, क्योंकि इससे सीधे सुनवाई प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि केवल पेपरलेस मॉड्यूल बना देने से काम पूरा नहीं होगा। उसमें रिकॉर्ड समय पर पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

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रोज सामने आ रही ऐसी गलतियों पर कोर्ट नाराज

हाईकोर्ट ने कहा कि पेपरलेस मॉड्यूल पर सुनवाई के दौरान दस्तावेज अपलोड करने में लापरवाही की शिकायतें बार-बार सामने आ रही हैं।

जब किसी केस का जरूरी दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद नहीं होता, तो कोर्ट के लिए पूरे मामले को समझकर सुनवाई आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जब व्यवस्था पहले से मौजूद है, फिर भी दस्तावेज अपलोड करने में लापरवाही हो रही है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पेपरलेस व्यवस्था का असली फायदा तभी मिलेगा, जब केस से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज एक ही डिजिटल रिकॉर्ड में समय पर उपलब्ध हों। अगर याचिका, जवाब या कोई दूसरा अहम दस्तावेज अपलोड होने से रह जाता है, तो उसका असर सीधे सुनवाई की प्रक्रिया पर पड़ता है।

सिर्फ तकनीक नहीं, काम करने का तरीका भी बदलना होगा

हाईकोर्ट ने साफ किया कि पेपरलेस कोर्ट का मतलब सिर्फ कागज हटाकर कंप्यूटर पर काम करना नहीं है। इसका मकसद कोर्ट की पूरी कार्यवाही को ज्यादा तेज, आसान और व्यवस्थित बनाना है।

डिजिटल रिकॉर्ड होने से फाइल ढूंढने में समय कम लगता है। रजिस्ट्री पर काम का दबाव घटता है। दस्तावेज खोने की आशंका भी कम होती है। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड तुरंत देखा जा सकता है।

सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरत पड़ने पर कोर्ट केस से जुड़े दस्तावेज तुरंत देख सकता है। इससे सुनवाई में अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिलती है।

लेकिन यह तभी संभव है, जब कोर्ट में पेश होने वाला हर जरूरी दस्तावेज समय पर स्कैन होकर डिजिटल रिकॉर्ड में आ जाए।

ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि हर दस्तावेज को समय पर डिजिटल रिकॉर्ड में पहुंचाने की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए।

2020 के आदेश में बदलाव का सुझाव

हाईकोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर 2 नवंबर 2020 के रजिस्ट्रार जनरल के स्थायी आदेश का भी जिक्र किया।

यह आदेश आपराधिक मामलों की फाइलों को स्कैन करने और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ा था।

हाईकोर्ट ने कहा कि अब पेपरलेस कोर्ट की जरूरत सिर्फ आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं है। इसलिए इस व्यवस्था को सिविल, आपराधिक, रिट और अन्य सभी तरह के मामलों तक लागू करने के लिए आदेश में जरूरी बदलाव किया जाना चाहिए।

दस्तावेज दाखिल होते ही अपलोड करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित लोगों को चेतावनी देकर आगे सावधानी बरतने को कहा है।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका, जवाब, प्रत्युत्तर, आवेदन, अतिरिक्त हलफनामा और दूसरे दस्तावेज दाखिल होने के तुरंत बाद उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड पर अपलोड किया जाए।

इस काम में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस काम में जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इससे गलती होने पर यह पता चल सकेगा कि चूक कहां हुई।

रजिस्ट्रार को जरूरी बदलाव का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश

वहीं हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि मौजूदा स्थायी आदेश में जरूरी बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसे प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि पेपरलेस कोर्ट सिर्फ कागज हटाने की व्यवस्था नहीं है। इसका असली उद्देश्य यह है कि कोर्ट को सुनवाई के समय पूरा रिकॉर्ड आसानी से और तुरंत उपलब्ध हो।

अगर जरूरी दस्तावेज ही समय पर अपलोड नहीं होंगे तो पूरी डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

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