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सीकर में खेल मैदान की जमीन का विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस राजस्थान हाईकोर्ट भेजा; रिव्यू का दिया मौका, लंबित याचिका में भी उठेगा मुद्दा

Sikar School Playground Land Dispute: Supreme Court Allows Petitioners to Seek Review in Rajasthan High Court

नई दिल्ली: राजस्थान के सीकर जिले में स्कूल के खेल मैदान के लिए आवंटित जमीन के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में अपना मामला दोबारा उठाने का रास्ता खोल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की अनुमति दी है।

सुप्रीम कोर्ट के सामने आया कि जिस जमीन के आवंटन को लेकर विवाद है, उसका खसरा नंबर बाद में बदल दिया गया था। यह तथ्य हाईकोर्ट के सामने नहीं रखा गया था जिसके चलते हाईकोर्ट ने पहले की PIL खारिज कर दी थी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने खसरा नंबर बदले जाने का यह तथ्य हाईकोर्ट के सामने नहीं आने के आधार पर याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल करने की छूट दी है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद जमीन का आवंटन बहाल नहीं किया है और न ही यह कहा है कि जमीन स्कूल को वापस दी जाए। कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ताओं को यह मुद्दा हाईकोर्ट के सामने रखने का मौका दिया है।

इस मामले में जमीन का आवंटन रद्द किए जाने को भी चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता यही तथ्य हाईकोर्ट में पहले से लंबित याचिका में उठा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इसी पहलू पर विचार कर उचित आदेश पारित करने को कहा है।

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स्कूल ने जमीन बदलने की मांग की, कलेक्टर ने आवंटन रद्द किया

विवाद उस जमीन के आवंटन को रद्द किए जाने से जुड़ा है, जो पहले स्कूल के खेल मैदान के लिए दी गई थी।

मामला सीकर के बजोर गांव में सरकारी स्कूल को 11 जनवरी 2023 को खेल मैदान के लिए 2 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। बाद में इस जमीन का खसरा नंबर 1101/966 से बदलकर 1397/1395 हो गया।

स्कूल के प्रिंसिपल ने 27 जनवरी 2026 को तहसीलदार को पत्र भेजकर कहा कि आवंटित जमीन स्कूल से काफी दूर है और इसका खेल मैदान के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने इतनी ही जमीन स्कूल के पास किसी दूसरी जगह देने का अनुरोध किया, ताकि वहां खेल मैदान विकसित किया जा सके।

इसके बाद 5 फरवरी 2026 को सीकर के जिला कलेक्टर ने 2 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया।

आदेश में जमीन का खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल नहीं होने और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था।

कलेक्टर ने जमीन डेजर्ट सफारी के लिए देने का प्रस्ताव बनवाया

आवंटन रद्द होने के अगले ही दिन, 6 फरवरी 2026 को जिला कलेक्टर ने करीब 200 करोड़ रुपये की बजोर डेजर्ट सफारी एंड रिजॉर्ट परियोजना के लिए जमीन आवंटन का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

इस प्रस्ताव में खसरा नंबर 1397/1395 की 2 हेक्टेयर जमीन भी शामिल की गई थी। यही वह जमीन थी, जिसे पहले बजोर के सरकारी स्कूल के खेल मैदान के लिए आवंटित किया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने इसी को आधार बनाकर सवाल उठाया। उनका कहना था कि जिस जमीन को पहले सरकारी स्कूल के खेल मैदान के लिए आवंटित किया गया था, उसका आवंटन रद्द करने के बाद उसे डेजर्ट सफारी-रिजॉर्ट परियोजना के प्रस्ताव में शामिल कर लिया गया।

इस पूरे मामले में 17 खसरों की करीब 16.68 हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव भी विवाद में आया।

याचिकाकर्ताओं ने इसे राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 29 जून 2026 को PIL खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट का मानना था कि स्कूल को आवंटित खसरा नंबर 1101/966 उस जमीन से अलग था, जिसे लेकर आवंटन की चुनौती दी गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने खसरा नंबर बदलने को माना अहम

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूरे विवाद में खास तौर पर स्कूल के खेल मैदान वाली जमीन के पहलू को महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट के सामने आया कि करीब 2 हेक्टेयर जमीन मूल रूप से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बजोर को खेल मैदान के लिए आवंटित की गई थी। बाद में इस जमीन के खसरा नंबर बदल दिए गए।

यानी मूल खसरा नंबर 1101/966 को बाद में 1397/1395 के रूप में रिनंबर किया गया था। जिस जमीन का जिक्र पुराने रिकॉर्ड में 1101/966 के तौर पर था, बाद में उसका नंबर बदल गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि खसरा नंबर बदले जाने का यह तथ्य उस समय राजस्थान हाईकोर्ट के संज्ञान में नहीं लाया गया था, यही वजह है कि हाईकोर्ट ने जमीन को विवाद से अलग मानते हुए PIL पर फैसला किया। यही बात सुप्रीम कोर्ट के लिए अहम बनी।

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सुप्रीम कोर्ट ने खुद जमीन पर फैसला नहीं दिया

सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर जमीन के आवंटन, मालिकाना हक या उसके इस्तेमाल को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ यह माना कि खसरा नंबर बदले जाने का तथ्य अहम है और इसे हाईकोर्ट के सामने रखा जाना चाहिए।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की छूट दी है। हाईकोर्ट अब इस तथ्य पर गौर कर उचित आदेश पारित करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इस तथ्य पर गौर करने और उसके बाद उचित आदेश पारित करने का अनुरोध भी किया है।

लंबित याचिका में भी उठाया जा सकेगा मुद्दा

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एक और राहत दी है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट में एक दूसरी रिट याचिका पहले से लंबित है, जिसमें स्कूल के खेल मैदान के आवंटन को रद्द किए जाने को भी चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खेल मैदान की जमीन और उसके बदले गए खसरा नंबर से जुड़ा तथ्य उस लंबित रिट याचिका में भी उठाया जा सकता है।

यानी अब हाईकोर्ट के सामने जमीन से जुड़ा यह तथ्य भी रखा जा सकेगा। इसके बाद हाईकोर्ट इस बात को देखते हुए आगे फैसला ले सकता है।

हाईकोर्ट में फिर उठेगा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल करने की भी छूट दी है। इसकी वजह यह है कि खसरा नंबर बदले जाने का तथ्य पहले हाईकोर्ट के सामने नहीं आया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमीन का आवंटन बहाल नहीं किया है और न ही यह तय किया है कि जमीन किसके पास रहेगी।

अब हाईकोर्ट रिव्यू याचिका में इस नए तथ्य को देखेगा और उसके आधार पर आगे उचित आदेश दे सकता है।

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