चुनाव समिति के के नोटिस के खिलाफ याचिका दायर, अधिवक्ता दिनेश कुमार पाठक ने वोटिंग पात्रता के नियम को बताया मनमाना और भेदभावपूर्ण; जूनियर वकीलों, नोटरी और ओथ कमिश्नर को बाहर रखने का भी आरोप
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के आगामी वार्षिक चुनाव को लेकर चुनाव समिति की ओर से जारी किया गया पहला नोटिस का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया हैं.
मतदान के लिए कम से कम दो पेशियों में उपस्थिति अथवा दो वकालतनामे दाखिल करने की अनिवार्यता को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
अधिवक्ता दिनेश कुमार पाठक ने चुनाव समिति की ओर से मंगलवार 3 नवंबर को जारी नोटिस के खिलाफ याचिका दायर कर इस पात्रता शर्त को मनमाना, भेदभावपूर्ण और अधिवक्ताओं के अधिकारों के विपरीत बताया है।
मामले में 6 नवंबर को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
याचिका में मुख्य रूप से इस बात पर सवाल उठाया गया है कि बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान का अधिकार देने के लिए दो पेशियों में उपस्थिति या दो वकालतनामों का रिकॉर्ड अनिवार्य करना किस आधार पर उचित है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस शर्त के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक अधिवक्ता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
चुनाव समिति के नोटिस को दी चुनौती
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की 43वीं कार्यकारिणी के वार्षिक चुनाव 11 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित हैं।
चुनाव प्रक्रिया के तहत निर्वाचन समिति ने 3 नवंबर को मतदान की पात्रता से संबंधित नोटिस जारी किया था।
इस नोटिस में मतदान के लिए दो पेशियों में उपस्थिति अथवा दो वकालतनामों का रिकॉर्ड होने की शर्त रखी गई है। इसी शर्त को लेकर अधिवक्ता दिनेश कुमार पाठक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में केवल दो पेशियों या दो वकालतनामों की अनिवार्यता ही नहीं, बल्कि पात्रता निर्धारित करने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था के कारण जूनियर अधिवक्ताओं, नोटरी और ओथ कमिश्नर के रूप में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को मतदान के अधिकार से बाहर रखने की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसके अलावा लॉ फर्म और विभिन्न संस्थानों में कार्यरत अधिवक्ताओं की मतदान पात्रता का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
2 नवंबर की कटऑफ डेट पर भी विवाद
याचिका में दस्तावेजों की कटऑफ डेट 2 नवंबर निर्धारित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव समिति की ओर से 3 नवंबर को नोटिस जारी किया गया, जबकि पात्रता के लिए दस्तावेजों की अंतिम तिथि 2 नवंबर रखी गई।
इस आधार पर भी चुनाव समिति की प्रक्रिया की निष्पक्षता और औचित्य पर सवाल उठाए गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रमाण पत्र और रिटेनरशिप एग्रीमेंट स्वीकार करने की मांग
याचिका में मतदान की पात्रता साबित करने के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों को भी स्वीकार करने की मांग की गई है।
इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रमाण पत्र और रिटेनरशिप एग्रीमेंट जैसे दस्तावेजों को मान्यता देने की मांग प्रमुख है।
याचिकाकर्ता ने विवादित पात्रता शर्त पर रोक लगाने तथा वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ताओं की पात्रता निर्धारित करने की मांग की है।
साथ ही नई पात्रता व्यवस्था के अनुरूप अंतिम मतदाता सूची तैयार करने के निर्देश देने की भी गुहार लगाई गई है।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ में 6 नवंबर को सुनवाई
मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ के समक्ष 6 नवंबर को होगी।
11 दिसंबर को प्रस्तावित बार एसोसिएशन चुनाव से पहले मतदान के अधिकार को लेकर उठा यह विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। 6 नवंबर की सुनवाई चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।