नई दिल्ली, 15 सितंबर
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पोते-पोती को अपने दादा-दादी की संपत्ति में हिस्सा तब तक नहीं मिल सकता जब तक उनके माता-पिता जीवित हैं.
हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत दादा-दादी की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति केवल उनके बच्चों और जीवनसाथी को ही मिलती है.
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस पुरूषेन्द्र कुमार कौरव ने यह फैसला याचिकाकर्ता कृतिका जैन की याचिका को खारिज करते हुए दिया हैं.
कृतिका जैन ने अपने पिता राकेश जैन और बुआ नीना जैन के खिलाफ मुकदमा दायर कर जनकपुरी स्थित दादा स्वर्गीय पवन कुमार जैन की संपत्ति में एक चौथाई हिस्से की मांग की थी.
यह पैतृक नहीं, व्यक्तिगत संपत्ति
याचिकाकर्ता कृतिका जैन कि दलील थी कि यह पैतृक संपत्ति है, इसलिए पोते-पोती को भी इसमें बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए.
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि 1956 के बाद दादा-दादी से बच्चों को मिली संपत्ति पैतृक नहीं बल्कि उनकी व्यक्तिगत संपत्ति मानी जाती है.
ऐसे में पोते-पोतियों का उसमें स्वतः कोई अधिकार नहीं बनता.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पवन कुमार जैन के निधन के बाद संपत्ति केवल उनकी पत्नी और बच्चों के हिस्से में गई.
चूंकि उस समय कृतिका के पिता जीवित थे, इसलिए कृतिका का इसमें कोई अधिकार नहीं है.
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को कानूनी आधारहीन मानते हुए याचिका को सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर VII रूल 11 के तहत खारिज कर दिया।
पिता और बुआ की ओर से दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पिता और बुआ की ओर से अधिवक्ता विनीत जिंदल ने पैरवी करते हुए कई दलीले पेश की.
अधिवक्ता जिंदल ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि दादा-दादी से बच्चों को मिली संपत्ति उनकी व्यक्तिगत होती है, न कि संयुक्त परिवार की.

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए विनीज जिंदल ने कहा कि यह निर्णय उस आम भ्रांति को दूर करता है जिसमें लोग यह मान लेते हैं कि पोते-पोतियों को दादा-दादी की संपत्ति में स्वतः हिस्सा मिल जाता है.
अधिवक्ता ने कहा कि इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप है.
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार यदि कोई हिंदू पुरुष बिना वसीयत के मरता है तो उसकी संपत्ति सबसे पहले क्लास 1 उत्तराधिकारियों को मिलती है.
क्लास 1 उत्ताराधिकारी में पुत्र, पुत्री, विधवा, माता और पूर्व मृत पुत्र या पुत्री के बच्चे शामिल हैं।
इस कानून के अनुसार पोते-पोतियों को सीधा अधिकार केवल तब मिलता है जब उनके माता-पिता का निधन हो चुका हो.
अन्यथा दादा-दादी की संपत्ति पहले उनके बच्चों यानी माता-पिता के हिस्से में जाएगी.