नई दिल्ली, 16 सितम्बर:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार बिगड़ते वायु प्रदूषण से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को चेतावनी भरे लहजे में सीमित राहत दी.
सीजेआई बी आर गंवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव का हलफ़नामा स्वीकार करते हुए कहा कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रत्यक्ष भर्ती से जुड़े सभी रिक्त पद अब हर हाल में तीन माह के भीतर भरे जाएँ.
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों पर तुरंत नियुक्ति की बाध्यता से राज्य को छूट प्रदान की.
808 में से 250 पद रिक्त
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि आरएसपीसीबी में कुल 808 स्वीकृत पदों में से लगभग 70 प्रतिशत पर पहले ही नियुक्ति हो चुकी है। शेष 250 पद रिक्त हैं, जिनमें 175 पद पदोन्नति से भरे जाने हैं.
सरकार ने कहा कि एनसीआर में राजस्थान की हिस्सेदारी केवल पाँच ज़िलों तक सीमित है और इन सभी ज़िलों में बोर्ड चार क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ पूरी क्षमता से कार्यरत है.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया था कि वे 30 अप्रैल 2025 तक अपने अपने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में सभी रिक्त पद भरें.
आदेश की पालना नहीं होने पर 8 मई 2025 को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किया था.
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को यह निर्देश दिया कि वे अपने हलफ़नामों में यह बताए कि दिवाली के दौरान प्रदूषण के खतरनाक स्तर को नियंत्रित करने के लिए क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.