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स्कूल-कॉलेजों में बढ़ते आत्महत्या मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारों को नोटिस

जयपुर, 23 सितंबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त करने, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने और आयु-आधारित मानसिक कल्याण पाठ्यक्रम लागू करने से जुड़ी जनहित याचिका पर राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

जस्टिस एस. पी. शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुजीत स्वामी व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

औसतन हर माह 23 आत्महत्या

अधिवक्ता विशाल कुमार, दीपक कुमार और अमित दाधिच के जरिए दायर याचिका में प्रदेश में पिछले एक दशक में युवाओं के बीच बढ़ती आत्महत्या के प्रति चिंता जताते हुए आंकड़े पेश किए गए हैं।

याचिका में अदालत को बताया गया कि 2015 से 2023 के बीच केवल कोटा, बारां और झालावाड़ में 12 से 30 वर्ष आयु वर्ग में 1,799 आत्महत्या के मामले सामने आए।

वहीं 2021 से मार्च 2025 तक सीकर, जयपुर (दक्षिण), जोधपुर (पूर्व-पश्चिम) जिलों में आत्महत्या के कुल 1,197 मामले सामने आए।

याचिका में कहा गया कि प्रदेश में औसतन हर माह 23 से अधिक युवाओं ने आत्महत्या की है, जो कि शिक्षा क्षेत्र में मानसिक दबाव की गंभीरता को उजागर करता है।

मौलिक अधिकारों का हनन

याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत प्रशिक्षित काउंसलरों और मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता जरूरी है।

लेकिन प्रदेश में इनकी उपलब्धता न होना विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों का हनन है।

याचिका में कहा गया कि यदि विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज स्तर पर मानसिक दबाव से निपटने की शिक्षा दी जाए, तो आत्महत्या जैसे गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में परामर्शदाताओं की नियुक्ति के स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, जबकि राजस्थान बोर्ड और राज्य विश्वविद्यालयों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया कि प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में छह महीने के भीतर प्रशिक्षित काउंसलरों की नियुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की जाए।

इसके साथ ही करियर काउंसलरों की नियुक्ति और मानसिक कल्याण पाठ्यक्रम लागू करने की भी मांग की गई है।

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