टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

RJS मुख्य परीक्षा की तारीख में बदलाव से Rajasthan Highcourt का इंकार, खारिज की याचिकाए

Rajasthan High Court Refuses to Interfere in Interim Maintenance Order, Dismisses Husband and Wife’s Revision Petitions

जोधपुर, 9 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt ने 11 और 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली राजस्थान न्यायिक सेवा (आरजेएस) सिविल जज कैडर भर्ती की मुख्य परीक्षा की तारीख में बदलाव से इंकार करते हुए याचिकाओं को खारिज कर दिया हैं.

जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने मनोज बोराणा व अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.

Rajasthan Highcourt ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को बीच में रोकना या बदलना न केवल प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित होगा, बल्कि इससे अन्य अभ्यर्थियों के प्रति भी पूर्वाग्रह उत्पन्न होगा।

Highcourt ने कहा “हम याचिकाकर्ताओं की दलीलों में कोई दम नहीं पाते। केवल कुछ अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए परीक्षा स्थगित या पुनर्निर्धारित करना संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया के साथ न्याय नहीं होगा।”

दो राज्यों में एक दिन परीक्षा

Rajasthan Highcourt में दायर कि गयी याचिकाओं में कहा गया कि राजस्थान सिविल जज कैडर भर्ती 2025 की मुख्य परीक्षा 11 और 12 अक्टूबर 2025 को आयोजित होगी और उसी दिन गुजरात न्यायिक सेवा की मुख्य परीक्षा भी निर्धारित है.

याचिका में कहा गया कि दो राज्यों में परीक्षाए एक ही दिन होने से कई अभ्यर्थी, जो दोनों परीक्षाओं के लिए पात्र हैं, लेकिन एक परीक्षा देने से वंचित हो जाएंगे.

याचिका में कहा गया यह पुरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन होता है.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि राजस्थान सिविल जज मुख्य परीक्षा की तारीखें पुनर्निर्धारित की जाएं ताकि समान अवसर मिल सके.

हाईकोर्ट प्रशासन का जवाब

याचिकाओं के जवाब में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा 27 जुलाई 2025 को आयोजित हुई थी. जिसका परिणाम 19 अगस्त 2025 को घोषित हुआ और मुख्य परीक्षा कार्यक्रम 12 सितंबर 2025 को जारी किया गया.

Rajasthan Highcourt प्रशासन ने कहा कि परीक्षा आयोजन की पूरी प्रक्रिया पहले से तय की जा चुकी है, और किसी भी प्रकार के बदलाव से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि सैकड़ों अन्य उम्मीदवारों को भी कठिनाई होगी.

अन्य पक्षकारों ने Supreme Court के फैसलो का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक रिक्तियों को शीघ्र भरना अत्यंत आवश्यक है, और उम्मीदवारों को यह तय करना होगा कि वे किस परीक्षा में सम्मिलित होना चाहते हैं

हाईकोर्ट का आदेश

सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्य परीक्षा जैसे बड़े आयोजन को पुनर्निर्धारित करने में कई प्रशासनिक पहलू जुड़े होते हैं – जैसे परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता, परीक्षा सामग्री की तैयारी और अन्य व्यवस्थाएं.

हाईकोर्ट ने कहा कि समान तिथियों पर अन्य राज्यों की परीक्षाएं होना परीक्षा को स्थगित करने का पर्याप्त आधार नहीं है.

सबसे अधिक लोकप्रिय