जयपुर, 6 नवंबर 2025
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर दायर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए Rajasthan Highcourt ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि सरकार पुराने आदेशों के आधार पर जर्जर, मरम्मत योग्य और नए भवनों से संबंधित अलग-अलग मदों में विस्तृत जानकारी पेश करे.
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार को 2021 की NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) की गाइडलाइन, आरटीई एक्ट (Right to Education Act) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अविनाश भारद्वाज मामले में दिए गए फैसले के अनुरूप स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करना होगा।
Rajasthan Highcourt ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा —
“बजट में स्कूलों और कॉलेजों की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन जहां वास्तव में आवश्यकता है, वहां संस्थान नहीं खुलते।”
Rajasthan Highcourt ने कहा —
“चुनावी वादों के आधार पर नहीं, बल्कि धरातल पर काम किया जाए।”
Highcourt ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि —
“आप 2047 के विज़न की बात करते हैं, जबकि स्कूलों के लिए कल की ही कोई ठोस योजना नहीं है।”
Rajasthan Highcourt ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान विभाग के अधिकारी उपस्थित नहीं होते, जो गंभीर चिंता का विषय है।
Rajasthan Highcourt ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले प्रत्येक जिले में स्कूल भवनों की स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता और नए भवनों के निर्माण की प्रस्तावित योजना का पूरा ब्यौरा पेश किया जाए।
गौरतलब है कि झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के बाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। यह मामला राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्थित जर्जर स्कूल भवनों, मरम्मत के अभाव और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
Rajasthan Highcourt ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सुविधा में दिखना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई अब 24 नवंबर 2025 को होगी।