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Rajasthan Highcourt : पिता की निजी संपत्ति में पुत्र केवल अनुमति से रह सकता है, और अनुमति वापस लेने पर उसे संपत्ति खाली करनी होगी.”

Rajasthan High Court Upholds Father’s Right Over Self-Acquired Property, Orders Son to Vacate House

पिता-पुत्र के बीच चल रहे संपत्ति विवाद पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बेटे को घर खाली करने और पीड़ा के लिए 1 लाख अदा करने का आदेश

जयपुर, 28 अक्टूबर 2025

राजस्थान हाईकोर्ट ने संपंति विवाद मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया हैं कि पिता की निजी संपत्ति में पुत्र केवल अनुमति से रह सकता है, और अनुमति वापस लेने पर उसे संपत्ति खाली करनी होगी.

जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने यह रिपोर्टेबल जजमेंट याचिकाकर्ता पिता द्वारा दाखिल की गई अनिवार्य निषेधाज्ञा (Mandatory Injunction) पर दिया हैं.

हाईकोर्ट ने अधिनस्थ अदालत और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पुत्र पर 1 लाख का जुर्माना भी लगाया है.

पिता ने खरीदी थी संपंति

Sawai Madhopur निवासी श्याम सुंदर खत्री (पिता) बनाम ऋतेश खत्री (पुत्र) के बीच इंद्रा कॉलोनी, सवाई माधोपुर स्थित 90×112 फीट के प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था.

वर्ष 1974 में श्याम सुंदर खत्री और उनके भाई ने नगर पालिका की नीलामी से यह प्लॉट खरीदा था.

बाद में दोनों भाइयों ने परस्पर सहमति से प्लॉट का बंटवारा किया और श्याम सुंदर ने अपने हिस्से में मकान बनवाया।

श्याम सुंदर ने यह मकान बाद में अपने बेटे ऋतेश खत्री को रहने के लिए दिया। लेकिन समय के साथ बेटे का व्यवहार बदलने पर उन्होंने अपना मकान वापस मांगा, जिस पर बेटे ने देने से इंकार कर दिया।

पिता के पक्ष में ट्रायल कोर्ट का फैसला

बेटे ने संयुक्त परिवार (HUF) की संपत्ति होने के आधार पर पिता के घर खाली करने के नोटिस को अदालत में चुनौती दी।
ट्रायल कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में फैसला सुनाते हुए पिता के पक्ष में निर्णय दिया।

कोर्ट ने कहा कि फर्म Panna Lal Prem Raj Khatri HUF नहीं बल्कि साझेदारी फर्म है।

कोर्ट ने कहा कि बेटे ने एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया जिससे सिद्ध हो कि संपत्ति HUF की है। मौखिक बंटवारे या स्वामित्व का भी कोई सबूत नहीं है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटा “स्वामी” नहीं, बल्कि पिता की अनुमति से रहने वाला व्यक्ति है।

ट्रायल कोर्ट ने बेटे ऋतेश खत्री को मकान खाली करने का आदेश दिया, हालांकि पिता की मेस्ने प्रॉफिट (₹15,000 प्रतिमाह) की मांग को अस्वीकार कर दिया।

प्रथम अपीलीय अदालत ने भी बेटे की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

इसके बाद बेटे ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की।

पिता की दलील

हाईकोर्ट में बेटे की अपील का विरोध करते हुए पिता ने कहा कि बेटे की शादी के बाद उसे दो कमरे, स्टोर, रसोई आदि रहने हेतु “केवल अनुमति” के आधार पर दिए गए थे।

समय के साथ बेटे का व्यवहार अनुचित हो गया, जिस पर पिता ने 2018 में कानूनी नोटिस भेजकर उससे घर खाली करने को कहा।

पिता की ओर से कहा गया कि यह संपत्ति उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति है।

उन्होंने कहा कि चूंकि यह उनकी निजी संपत्ति है, जिसमें बेटा केवल अनुमति से रह रहा था, इसलिए अनुमति वापस लेने पर उसे खाली करना ही होगा।

बेटे की दलील

बेटे की ओर से दलील दी गई कि विवादित संपत्ति संयुक्त परिवार की है, क्योंकि निर्माण उसके दादा की ओर से कराया गया था।

उसने यह भी दावा किया कि वह मकान के दक्षिणी हिस्से का मौखिक रूप से “स्वामी” है।

हाईकोर्ट का आदेश

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि—
“बेटा अपने पिता के घर में प्रेम, स्नेह और अनुमति के आधार पर रहता है — इससे उसे कोई अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।”

हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के Ramesh Kumar Handoo केस और सुप्रीम कोर्ट के Prabhudas Damodar Kotecha फैसले का हवाला दिया।

हाईकोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के Jai Raj v. Shyam Lal निर्णय का हवाला देते हुए कहा—
“बचपन से किसी संपत्ति में रहना या वयस्क होने पर पिता द्वारा उसे रहने की अनुमति देना, कानूनी स्वामित्व नहीं बनाता।”

कोर्ट ने कहा कि पिता अपनी स्वयं अर्जित, अविभाजित संपत्ति से किसी को भी हटाने के लिए स्वतंत्र हैं।

बेटे को फटकार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुकदमा कोई साधारण मुकदमा नहीं, बल्कि एक बेटे द्वारा अपने पिता के खिलाफ प्रताड़ना का मामला है।

पिता जानता था कि संपत्ति उसके पिता द्वारा खरीदी गई थी, फिर भी उसने बिना किसी सबूत के मुकदमा हाईकोर्ट तक खींचा।

यह पिता का उत्पीड़न है और समाज में पिता-पुत्र के रिश्ते पर काला धब्बा है।

पीड़ा के लिए 1 लाख का जुर्माना

कोर्ट ने कहा कि बेटे पर लगाया गया 1 लाख रुपये का जुर्माना भी उस तनाव, पीड़ा और उत्पीड़न की भरपाई नहीं कर सकता, जो पिता को इस मुकदमे के दौरान सहना पड़ा।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यह 1 लाख रुपये की रकम बेटे को पिता को अदा करनी होगी।

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