दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां को गवाही के लिए दोबारा समन जारी करने का निर्देश, ट्रायल कोर्ट के आदेश रद्द
जयपुर, 11 नवंबर 2025
Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने एक रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए अहम आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि देश के संविधान से किसी भी आरोपी को निष्पक्ष ट्रायल का मौलिक और वैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसमें गवाहों से जिरह (Cross-Examination) करने का अवसर भी शामिल है।
Highcour ने कहा कि आरोपी का यह अधिकार छीना नहीं जा सकता, चाहे आरोप कितने भी गंभीर (दुष्कर्म से जुड़े भी) क्यों न हों।
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश दुष्कर्म के मामले में आरोपी पूरणमल यादव की याचिका पर दिए हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने चोमू के एडीशनल सेशंस जज के उन दो आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके जरिए ट्रायल कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां से जिरह-Cross-Examination करने का अवसर आरोपी के लिए बंद कर दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के अधिवक्ता द्वारा बाद में पीड़िता और उसकी मां को दोबारा बुलाने की याचिका भी खारिज कर दी थी।
निष्पक्ष ट्रायल का मौलिक अधिकार
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शीशराम सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दुष्कर्म के गंभीर आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता पर IPC की धारा 376(2)(n), 506 और 392 के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
याचिका में कहा गया कि ऐसे गंभीर मामले में भी याचिकाकर्ता का निष्पक्ष ट्रायल का मौलिक और वैधानिक अधिकार होता है।
लेकिन ट्रायल कोर्ट ने अधिवक्ता के बीमार होने के चलते शिकायतकर्ता और उसकी मां से Cross-Examination का अधिकार समाप्त कर दिया।
अधिवक्ता बीमार, पहले दिन ही जिरह बंद
अधिवक्ता ने कहा कि 03 अप्रैल 2024 को, जो शिकायतकर्ता और उसकी मां के गवाहों के बयान दर्ज होने का पहला दिन था, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अस्वस्थ थे और बीमारी के कारण न्यायालय में प्रभावी रूप से उपस्थित नहीं हो पाए।
याचिका में कहा गया कि बीमारी के कारण को लिखित रूप से बताते हुए, अधिवक्ता ने गवाहों से किसी अन्य दिन जिरह-Cross-Examination करने का अनुरोध किया था.
लेकिन ट्रायल कोर्ट ने प्रार्थना-पत्र नामंजूर करते हुए शिकायतकर्ता पीड़िता और उसकी मां से Cross-Examination का अवसर भी खारिज कर दिया.
इसके साथ ही आरोपी याचिकाकर्ता के Cross-Examination का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया.
दूसरा आवेदन भी खारिज
याचिका में कहा गया कि 3 अप्रैल को Cross-Examination का अवसर समाप्त करने के अगले दिन 4 अप्रैल 2024 को याचिकाकर्ता द्वारा एक और प्रार्थना-पत्र पेश किया गया.
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 311 के तहत प्रार्थना-पत्र पेश कर शिकायतकर्ता और उसकी मां-दोनों गवाहों को पुनः कोर्ट में बुलाने और Cross-Examination का अवसर देने का आग्रह किया.
लेकिन अदालत ने इस आवेदन को भी 10 मई 2024 को खारिज कर दिया.
अधिवक्ता ने कहा कि Cross-Examination करना आरोपी का वैधानिक अधिकार है और निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण मुकदमे की प्रक्रिया के लिए यह अवसर दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।
जिरह – वैधानिक अधिकार
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की एकलपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि Cross-Examination या जिरह करना न केवल प्राकृतिक अधिकार है, बल्कि विधिसम्मत अधिकार भी है.
कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 137 में मुख्य-परीक्षण, जिरह-Cross-Examination और पुनः-परीक्षण का प्रावधान है.
धारा 138 प्रतिपक्ष को उस गवाह से जिरह-Cross-Examination करने का अधिकार देती है, जिसका मुख्य-परीक्षण हो चुका हो.
कोर्ट ने कहा कि यह अवसर देना अनिवार्य है, क्योंकि आरोपी न केवल स्वयं का प्रतिनिधित्व करने का मूल्यवान अधिकार रखता है, बल्कि उसे इस अधिकार की जानकारी भी दी जानी चाहिए.
किसी अपवाद की स्थिति तभी बनती है, जब विधि में स्पष्ट रूप से इसका प्रावधान हो या आवश्यक रूप से इसकी व्याख्या की जा सके.
निष्पक्ष सुनवाई का अवसर
Highcour ने कहा कि जिरह-Cross-Examination करना आरोपी का वैधानिक अधिकार है और यदि यह अवसर न दिया जाए, तो आरोपी अपना बचाव प्रभावी रूप से नहीं कर सकता.
वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता को ऐसा अवसर नहीं दिया गया.
Highcour ने कहा कि जब ट्रायल कोर्ट ने जिरह-Cross-Examination का अवसर बंद कर दिया, तो याचिकाकर्ता ने धारा 311 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया, जिसे भी ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया.
किसी भी चरण पर तलब का अधिकार
Highcour ने कहा कि CrPC की धारा 311 अदालत को किसी भी चरण में किसी गवाह को तलब करने, पुनः बुलाने या पुनः जाँच करने का व्यापक अधिकार देती है.
धारा 138 साक्ष्य अधिनियम जाँच–जिरह–पुनः-जाँच के क्रम को तय करती है.
दोनों धाराओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत न्यायपूर्ण और सही निर्णय लेने हेतु आवश्यक साक्ष्य प्राप्त कर सके.
Highcour ने कहा कि इस शक्ति का प्रयोग सावधानी और उचित उद्देश्य से किया जाना चाहिए.
ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द
Highcour ने अपने फैसले में चोमू एडीशनल सेशंस जज के दोनों आदेशों को रद्द करने का आदेश दिया है।
साथ ही, दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां को अगली तारीख पर पुनः तलब कर याचिकाकर्ता को Cross-Examination का अवसर देने का निर्देश दिया है.